ब्रेकिंग न्यूज़

Bihar Accident : दर्दनाक हादसा! स्कूल बस-ट्रक की भिड़ंत में 2 शिक्षकों की मौत, बच्चों में मचा चीख-पुकार Bihar Board Result Date : काउंटडाउन शुरू! बिहार बोर्ड मैट्रिक रिजल्ट बस कुछ कदम दूर,कितने टॉपर्स को बुलाया गया बोर्ड ऑफ‍िस? Bihar Road: अब तीन घंटे में तय होगी पटना से पूर्णिया की दूरी, जानें इस एक्सप्रेस वे का क्या है नया अपडेट Bihar crime : छठ घाट पर चली गोली! रिटायर्ड दारोगा के बेटे को मारी गोली, अफरा-तफरी में फरार हुआ शूटर बिहार में दर्दनाक सड़क हादसा: बर्थडे पार्टी से लौट रहे दंपति को अज्ञात वाहन ने रौंदा, बेटी गंभीर रूप से घायल Bihar News : बिहार में छुट्टी लेने का नया नियम लागू! अब इस पोर्टल से ही होगी अर्जी, बिना मंजूरी नहीं मानेगी छुट्टी Chaiti Chhath 2026 : चैती छठ के समापन पर मातम: पटना समेत कई जिलों में डूबने से मौतें, अर्घ्य के बीच हादसे मरीन ड्राइव पर तेज रफ्तार का कहर: बुलेट और जुगाड़ गाड़ी की भीषण टक्कर, चालक की दर्दनाक मौत आवाज़ उठाई तो बरसी लाठियां! बिहार के इस जिले में छेड़खानी के विरोध पर हिंसा, लोग सहमे Railway News : रेलवे कर्मचारियों के लिए खुशखबरी! राम नवमी से पहले सरकार का बड़ा फैसला; जानें फायदे

Home / news / Chhath Puja 2024 Arghya Time : कैसे हुई छठ पूजा की शुरुआत, जानिए...

Chhath Puja 2024 Arghya Time : कैसे हुई छठ पूजा की शुरुआत, जानिए इसकी विधि; शुभ मुहूर्त और महत्व

07-Nov-2024 06:26 AM

By First Bihar

PATNA : चार दिवसीय छठ पर्व का सबसे प्रमुख दिन होता है कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि। इस दिन व्रती डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं। जिसे संध्या अर्घ्य के नाम से जाना जाता है। इस बार छठ पर्व में संध्या अर्घ्य 7 नवंबर को दिया जाएगा। 


व्रतधारी सूर्य को अर्घ्य देने के लिए पास की ही किसी पवित्र नदी, तालाब, कुण्ड में जाते हैं और वहां पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया जाता है। फिर अगली सुबह व्रती उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हुए उसे नमस्कार करते हैं और इसी के साथ छठ पर्व का समापन हो जाता है।


छठ पूजा के तीसरे दिन सूर्य देव को अर्पित करने के लिए प्रसाद तैयार किया जाता है। फिर इस प्रसाद और फलों को एक बांस की टोकरी में सजाया जाता है। इसके बाद टोकरी की पूजा की जाती है। फिर सूर्य डूबने से पहले सभी व्रती पास के ही किसी तालाब, नदी या घाट पर जाते हैं। वहां स्नान करके पानी में खड़े रहकर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य चढ़ाते हैं। बता दें सूर्य देव को अर्घ्य बांस या पीतल की टोकरी का इस्तेमाल करते हुए दिया जाता है। 


 अर्घ्य देने के लिए एक लोटे में पवित्र जल लें। फिर इसमें कच्चे दूध की कुछ बूंदे, साथ में लाल चंदन, फूल, अक्षत और कुश भी डाल दें। फिर सूर्य देव की तरफ देखते हुए सूर्य मंत्र का जाप करें और धीरे-धीरे अर्घ्य दें। ध्यान रहे कि अर्घ्य के जल ते छीटें आपके पैरों पर न पढ़ें।


 सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद सजाए गए सूप से छठी मैया की विधि विधान पूजा की जाती है। फिर छठी मैया के गीत और व्रत कथा सुनी जाती है। इसके बाद छठ पूजा के चौथे दिन सुबह के समय उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।इसके बाद छठ का प्रसाद सभी में बांटा जाता है और इसी के साथ छठ व्रत का समापन हो जाता है।


इधर, एक और कथा के अनुसार, प्रथम देवासुर संग्राम में जब असुरों के हाथों देवता हार गये थे, तब देव माता अदिति ने तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति के लिए देवारण्य के देव सूर्य मंदिर में छठी मैया अपनी पुत्री की आराधना की थी। तब प्रसन्न होकर छठी मैया ने उन्हें सर्वगुण संपन्न तेजस्वी पुत्र होने का वरदान दिया था।


छठ पूजा का व्रत लोक आस्था का सबसे बड़ा महापर्व माना जाता है। ये व्रत सबसे कठिन व्रतों में से एक होता है। छठ व्रत में मिट्टी के चूल्हे का ही प्रयोग करें। इसके साथ ही इस दिन मिट्टी के बर्तन ही इस्तेमाल करने चाहिए। मिट्टी के बर्तनों के बिना छठ पूजा का व्रत अधूरा माना जाता है। इसके साथ ही इस दिन शुद्ध देशी घी में ही ठेकुआ प्रसाद बनाकर भोग लगाना चाहिए और भोग में गन्ने का प्रयोग जरूर करना चाहिए।