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26-Dec-2019 02:35 PM
PATNA: क्या झारखंड में हेमंत सोरेन की सरकार बनवाने में ईसाई मिशनरियों की बड़ी भूमिका रही. सत्ता परिवर्तन के बाद झारखंड में ईसाई धर्म के सबसे प्रमुख धर्म गुरू आर्च बिशप के बयान से यही संकेत मिल रहा है. आर्च बिशप फेलिक्स टोप्पो ने आज कहा कि हेमंत सोरेन के मुख्यमंत्री बनने से झारखंड में ईसाई धर्म के लोगों को क्रिसमस गिफ्ट मिल गया है. अब चर्च के काम में कोई बाधा नहीं आयेगी.
ईसाई धर्म गुरू का विवादास्पद बयान
अमूमन ईसाई धर्म गुरू मीडिया के सामने आने से परहेज करते हैं. लेकिन झारखंड के आर्च बिशप अपनी खुशी को संभाल नहीं पाये. आर्च बिशप फेलिक्स टोप्पो ने मीडिया से बात करते हुए कहा “ झारखंड में सत्ता परिवर्तन से हमें क्रिसमस गिफ्ट मिल गया है. भाजपा सरकार के समय हम तनाव में रहते थे. अब हमें लग रहा है कि हमलोग खुश रहेंगे. पहले हमारे काम में बाधा आ रही थी. अब हमें अपना काम करने में सुविधा होगी.”
आर्च बिशप के बयान पर भाजपा भड़की
आर्च बिशप फेलिक्स टोप्पो झारखंड में ईसाई धर्म के सबसे बडे धर्म गुरू हैं. उनके बयान पर भाजपा ने कडी आपत्ति जतायी है. पार्टी के प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा है कि किसी धर्म के प्रमुख का सियासी बयान बेहद आपत्तिजनक है. इससे ये भी साफ हो गया है कि झारखंड में बनने जा रही नयी सरकार किनके इशारों पर चलेगी.
झारखंड में शुरू से विवादों में रही हैं ईसाई मिशनरियां
झारखंड में ईसाई मिशनरियां शुरू से विवादों में रही हैं. राज्य के एक दर्जन जिलों में ईसाई मिशनरियों द्वारा आदिवासियों का धर्म परिवर्तन कराने की खबरें लगातार आती रही हैं. सरकारी आंकडे भी इसकी पुष्टि करते हैं. सरकारी आंकडों के मुताबिक झारखंड में दस सालों में ईसाई धर्म मानने वालों की तादाद 30 प्रतिशत बढ़ गयी.
भाजपा सरकार से चर्च को थी भारी नाराजगी
झारखंड में धर्मांतरण को रोकने के लिए भाजपा सरकार ने 2017 में धर्म स्वतंत्रता विधेयक पारित किया था. इसके बाद धर्मांतरण कराना लगभग असंभव हो गया था. इस विधेयक के मुताबिक धर्म परिवर्तन करने के लिए जिले के उपायुक्त से मंजूरी लेना जरुरी कर दिया गया है. उपायुक्त जांड पड़ताल के बाद इसकी मंजूरी दे रहे थे. लिहाजा प्रलोभन या दूसरे गलत तरीके से धर्मांतरण की कवायद पर रोक लग गयी थी. पिछली सरकार के फैसले का चर्च ने खुल कर विरोध किया था.
झारखंड के आधा दर्जन जिलों में चर्च का प्रभाव
झारखंड के आधा दर्जन जिलों में चर्च का गहरा असर है. चर्च का फरमान सियासी पार्टियों को फायदा या नुकसान पहुंचाती रही हैं. हालांकि चर्च से जुडे लोग किसी भी सियासी गतिविधि में शामिल होने की बात से पूरी तरह इंकार करते रहे हैं.