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18-Aug-2020 07:45 AM
PATNA : बिहार में हर साल आने वाली बाढ़ को लेकर राज्य सरकार के अधिकारी संसदीय समिति की बैठक में शामिल हुए। संसदीय समिति की बैठक में बिहार के अधिकारियों ने राज्य में आने वाली बाढ़ का ठीकरा एक बार फिर से नेपाल के माथे पर फोड़ा लेकिन संसदीय समिति ने जब अधिकारियों से यह पूछा कि बिहार में बाढ़ से निपटने के लिए क्या ठोस उपाय किए गए तो इसका कोई जवाब अधिकारियों के पास नहीं था।
दरअसल जल संसाधन मंत्रालय से जुड़ी संसदीय समिति ने बिहार, असम और केरल में बाढ़ के हालात को लेकर एक बैठक बुलाई थी। इस समिति में बिहार सरकार के अधिकारी भी शामिल हुए बिहार की तरफ से अधिकारियों ने समिति के सामने एक प्रेजेंटेशन भी दिया। इस प्रेजेंटेशन में नेपाल से आने वाली नदियों और बिहार की भौगोलिक स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि नेपाल से आने वाली नदियों में ज्यादा पानी छोड़े जाने की वजह से बिहार में इस साल बाढ़ की आपदा आई है। अधिकारियों से समिति में शामिल सांसदों ने सवालों की झड़ी लगा दी। बिहार सरकार के अधिकारियों से पूछा कि राज्य सरकार ने बाढ़ से निपटने के लिए अपनी तरफ से क्या ठोस उपाय किए हैं इसके बारे में जानकारी दें। बिहार में तटबंध के टूटने का कारण समिति ने अधिकारियों से पूछा। साथ ही साथ सुझाव भी दिया कि नेपाल से सटे सीमावर्ती इलाकों में तट बंधुओं को मजबूत बनाया जाए समिति ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि तटबंध मेंटेनेंस के काम की निगरानी किस स्तर से की जाती है।
खास बात यह है कि इस संसदीय समिति के अध्यक्ष बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद डॉ संजय जयसवाल हैं। जयसवाल की अध्यक्षता वाली समिति ने बिहार सरकार के अधिकारियों को जवाब देते पसीना छूट गया। अब समिति ने अगली बैठक में विदेश मंत्रालय के अधिकारियों को तलब किया है। नेपाल के साथ बाढ़ प्रबंधन के मसले पर विदेश मंत्रालय किस तरह की पहल कर सकता है इस बाबत संसदीय समिति जानकारी लेगी। इसके अलावा आगे आने वाले दिनों में नीति आयोग के अधिकारियों की बैठक भी संसदीय समिति बुला सकती है। डॉ संजय जायसवाल के संसदीय क्षेत्र में भी बाढ़ की भीषण स्थिति देखने को मिली थी। कोरोना से ठीक होने के बाद संजय जयसवाल ने खुद बाढ़ प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया था। कोरोणा के बाद अब बाढ़ के मुद्दे पर नीतीश सरकार कि एक बार फिर फजीहत होती दिख रही है।