RJD विधायक ने LPG गैस संकट को सरकार द्वारा प्रायोजित कृत्रिम समस्या बताया, कालाबाजारी बढ़ाने का भी लगाया आरोप बिहार के इस जिले में बनेगी फोरलेन सड़क, लोगों को जाम से मिलेगी राहत; परियोजना पर खर्च होंगे इतने करोड़ बिहार के इस जिले में बनेगी फोरलेन सड़क, लोगों को जाम से मिलेगी राहत; परियोजना पर खर्च होंगे इतने करोड़ बिहार में साइकिल दुकान से भारी मात्रा में LPG सिलेंडर बरामद, कालाबाजारी के आरोप में एक गिरफ्तार बिहार में साइकिल दुकान से भारी मात्रा में LPG सिलेंडर बरामद, कालाबाजारी के आरोप में एक गिरफ्तार ‘दीदी, मुझे डर लग रहा है… दो लड़के पीछा कर रहे हैं’, आखरी कॉल के बाद गायब हो गई पटना की छात्रा Bihar News: जाली नोट गिरोह का भांडाफोड़: दो आरोपी गिरफ्तार, 100-100 रुपए के इतने नोट बरामद Bihar Crime News: झोपड़ी में सो रहे युवक की गोली मारकर हत्या, पुराने विवाद में मर्डर की आशंका Bihar Crime News: झोपड़ी में सो रहे युवक की गोली मारकर हत्या, पुराने विवाद में मर्डर की आशंका करगिल में ड्यूटी के दौरान पश्चिम चंपारण का ‘अग्निवीर’ मनीष शहीद, गांव में शोक की लहर
03-Oct-2022 02:25 PM
By Ajit Kumar
JEHANABAD : बिहार के डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री तेजस्वी यादव राज्य की स्वास्थ्य सेवा को बेहतर करने का दावे करते नहीं थकते लेकिन इसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही है। राज्य में बद से बदतर होती जा रही सदर अस्पतालों की हालत किसी से छिपी नहीं है। ताजा मामला जहानाबाद से सामने आया है जहां डॉक्टर की लापरवाही के कारण एक नवजात की जान चली गई। सदर अस्पताल से डॉक्टर के ड्यूटी से गायब रहने के कारण नर्सों और ममता ने महिला का प्रसव कराया लेकिन बेहतर इलाज नहीं होने के कारण नवजात बच्चे ने दम तोड़ दिया। जिसके बाद परिजनों ने डॉक्टर पर लापरवाही लगाते हुए जमकर हंगामा मचाया।
दरअसल, जिले के सलमानपुर बखरी की रहने वाली अंकिता देवी प्रसव पीड़ा के बाद रविवार की रात सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था लेकिन ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों ने मरीज का इलाज करने के बजाए पल्ला झाड़ लिया। काफी मुश्किल से ममता और अस्पताल में तैनात नर्सों की कोशिश से बच्चे का जन्म हुआ। बच्चे की हालत बिगड़ते देख उसे एसएनसीयू में भर्ती कराया गया लेकिन उचित इलाज नहीं मिलने के कारण उसकी जान चली गई। बच्चे की मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा मचाया।
परिजनों का आरोप है कि महिला के इलाज के लिए अस्पताल में तैनात स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा पैसे की मांग की गई थी। पैसे नहीं देने के कारण इलाज में लापरवाही बरती गई जिससे जन्म के बाद बच्चे की मौत हो गई। हालांकि अस्पताल अधीक्षक ने पैसे मांगने की बात से इनकार किया है। इधर, मामला संज्ञान में आने के बाद सिविल सर्जन ने पूरे मामले की जांच कराने की बात कही है। बता दें कि बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली कोई नई बात नहीं है। अक्सर ऐसे मामले सामने आते रहे हैं जब डॉक्टरों की लापरवाही के कारण लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।