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10-Aug-2023 09:44 PM
By FIRST BIHAR
JAMUI: बिहार में मुर्दे भी तालाब खोद रहे है. सरकार उनसे काम करा कर बकायदा मजदूरी का भुगतान कर रही है. सरकार में फैले भ्रष्टाचार की नयी कहानियां फिर से सामने आयी है. आलम ये है कि अच्छी खासी नौकरी कर रहे लोगों को भी सरकारी कागजातों में मजदूर बता कर उन्हें सरकारी खजाने से पैसे का भुगतान किया जा रहा है.
सरकारी तंत्र का ये खेल जमुई जिले में सामने आया है. एक व्यक्ति ने अपनी मौत के एक साल बाद सरकार से काम मांगा. सरकार ने उसे काम दिया और फिर मनरेगा के तहत उसे मजदूरी का भुगतान किया. मृत व्यक्ति ने एक दो दिन नहीं बल्कि पूरे 24 दिन तक सरकारी काम किया. ये सिर्फ एक उदाहरण है. एक कंपनी में नौकरी में कर रहे व्यक्ति को भी सरकारी कागजातों में मजदूर बना दिया गया और उससे पूरे 38 दिन तक तालाब खुदवा कर पैसे का भुगतान कर दिया गया.
मनरेगा में खुली लूट
बेरोजगारों को काम देने की सरकारी योजना है मनरेगा. जमुई जिले में इसमें कैसे कैसे खेल हुए इसका नमूना देखिये. जमुई के खैरा प्रखंड के कागेश्वर गांव के रहने वाले संजीत कुमार की मौत दो अगस्त 2018 को हो गयी. सरकार ने ही संजीत कुमार की मौत का प्रमाण पत्र भी दिया. लेकिन मौत के अगले साल संजीत कुमार को मनरेगा के तहत रोजगार दे दिया गया. सरकारी कागजातों के मुताबिक मनरेगा के जॉब कार्ड में फैमिली संख्या 988 के तौर पर दर्ज संजीत ने 2019 में 18 अप्रैल से लेकर मई तक काम की मांग की. इसके बाद उन्हें 12-12 दिन कर दो बार काम दिया गया. उन्हें मजदूरी का भुगतान भी कर दिया गया.
अब जमुई में ही दूसरा चौंकाने वाला मामला देखिये. सूरज कुमार नाम के व्यक्ति एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं. उन्हें कंपनी की ओर से वेतन का भुगतान होता है. लेकिन सरकारी कागजातों में दर्ज है कि सूरज कुमार ने फरवरी और मार्च महीने में मनरेगा योजना के तहत देहरीडीह में गैरमजरूआ जमीन में पोखर की खुदाई की. इस दौरान उन्होंने 38 दिन मजदूरी की, जिसका भुगतान उन्हें किया गया.
ये जानकारी जब सूरज कुमार को लगी तो वे हैरान रह गये. सूरज ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि उन्होंने कभी मनरेगा का काम ही नहीं किया है. इसकी गवाह उनकी कंपनी की सैलरी स्लिप है. सैलरी स्लीप बताता है कि सूरज ने मार्च में बगैर गैरहाजिर हुए पूरे महीने काम किया, जिसके एवज में उन्हें कंपनी से वेतन मिला. लेकिन मनरेगा के सरकारी कागज में दर्ज है कि सूरज कुमार का जॉब कार्ड नंबर 3355 है.
इस जॉब कार्ड में लिखा गया है कि सूरज कुमार ने इस साल सात फरवरी से 20 फरवरी में 14 दिन, 25 फरवरी से 10 मार्च तक 12 दिन तथा 14 मार्च से 27 मार्च तक 12 दिन तालाब खुदाई का काम किया. यानि सूरज ने कुल 38 दिन तालाब की खुदाई की. स्पष्ट है मामला भ्रष्टाचार का है. मनरेगा के तहत पैसे की लूट खसोट की कहानी पहले भी सामने आती रही हैं. अब तो मृतक को भी काम देकर पैसे की लूट की जा रही है.
JAMUI: बिहार में मुर्दे भी तालाब खोद रहे है. सरकार उनसे काम करा कर बकायदा मजदूरी का भुगतान कर रही है. सरकार में फैले भ्रष्टाचार की नयी कहानियां फिर से सामने आयी है. आलम ये है कि अच्छी खासी नौकरी कर रहे लोगों को भी सरकारी कागजातों में मजदूर बता कर उन्हें सरकारी खजाने से पैसे का भुगतान किया जा रहा है.
सरकारी तंत्र का ये खेल जमुई जिले में सामने आया है. एक व्यक्ति ने अपनी मौत के एक साल बाद सरकार से काम मांगा. सरकार ने उसे काम दिया और फिर मनरेगा के तहत उसे मजदूरी का भुगतान किया. मृत व्यक्ति ने एक दो दिन नहीं बल्कि पूरे 24 दिन तक सरकारी काम किया. ये सिर्फ एक उदाहरण है. एक कंपनी में नौकरी में कर रहे व्यक्ति को भी सरकारी कागजातों में मजदूर बना दिया गया और उससे पूरे 38 दिन तक तालाब खुदवा कर पैसे का भुगतान कर दिया गया.
मनरेगा में खुली लूट
बेरोजगारों को काम देने की सरकारी योजना है मनरेगा. जमुई जिले में इसमें कैसे कैसे खेल हुए इसका नमूना देखिये. जमुई के खैरा प्रखंड के कागेश्वर गांव के रहने वाले संजीत कुमार की मौत दो अगस्त 2018 को हो गयी. सरकार ने ही संजीत कुमार की मौत का प्रमाण पत्र भी दिया. लेकिन मौत के अगले साल संजीत कुमार को मनरेगा के तहत रोजगार दे दिया गया. सरकारी कागजातों के मुताबिक मनरेगा के जॉब कार्ड में फैमिली संख्या 988 के तौर पर दर्ज संजीत ने 2019 में 18 अप्रैल से लेकर मई तक काम की मांग की. इसके बाद उन्हें 12-12 दिन कर दो बार काम दिया गया. उन्हें मजदूरी का भुगतान भी कर दिया गया.
अब जमुई में ही दूसरा चौंकाने वाला मामला देखिये. सूरज कुमार नाम के व्यक्ति एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं. उन्हें कंपनी की ओर से वेतन का भुगतान होता है. लेकिन सरकारी कागजातों में दर्ज है कि सूरज कुमार ने फरवरी और मार्च महीने में मनरेगा योजना के तहत देहरीडीह में गैरमजरूआ जमीन में पोखर की खुदाई की. इस दौरान उन्होंने 38 दिन मजदूरी की, जिसका भुगतान उन्हें किया गया.
ये जानकारी जब सूरज कुमार को लगी तो वे हैरान रह गये. सूरज ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि उन्होंने कभी मनरेगा का काम ही नहीं किया है. इसकी गवाह उनकी कंपनी की सैलरी स्लिप है. सैलरी स्लीप बताता है कि सूरज ने मार्च में बगैर गैरहाजिर हुए पूरे महीने काम किया, जिसके एवज में उन्हें कंपनी से वेतन मिला. लेकिन मनरेगा के सरकारी कागज में दर्ज है कि सूरज कुमार का जॉब कार्ड नंबर 3355 है.
इस जॉब कार्ड में लिखा गया है कि सूरज कुमार ने इस साल सात फरवरी से 20 फरवरी में 14 दिन, 25 फरवरी से 10 मार्च तक 12 दिन तथा 14 मार्च से 27 मार्च तक 12 दिन तालाब खुदाई का काम किया. यानि सूरज ने कुल 38 दिन तालाब की खुदाई की. स्पष्ट है मामला भ्रष्टाचार का है. मनरेगा के तहत पैसे की लूट खसोट की कहानी पहले भी सामने आती रही हैं. अब तो मृतक को भी काम देकर पैसे की लूट की जा रही है.