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06-Feb-2020 10:03 PM
By Rahul Singh
PATNA : बिहार में पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण को देखते हुए सरकार ने 15 साल से ज्यादा पुराने सरकारी डीजल वाहनों के परिचालन पर पूरे राज्य में रोक लगाने का फैसला किया है. पुराना सचिवालय स्थित सभागार में बजट पूर्व परिचर्चा की तीसरी कड़ी में चर्चा के दौरान डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने कहा कि वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए 15 साल पुराने सरकारी डीजल वाहनों के परिचालन को पूरे राज्य में प्रतिबंधित कर दिया गया है. इसके साथ ही पटना और इसके आस पास के नगर निकाय क्षेत्रों दानापुर, खगौल एवं फुलवारीशरीफ में 15 वर्षों से जयादा पुराने व्यावसायिक वाहनों के परिचालन को भी प्रतिबंधित कर दिया गया है.
डिप्टी सीएम ने कहा कि इन इलाकों में डीजल चालित तिपहिया वाहनों के परिचालन को भी मार्च 2021 के बाद प्रतिबंधित कर दिया जायेगा. उन्होंने कहा कि डीजल और पेट्रोल चालित तिपहिया वाहनों को CNG में तब्दील करने के लिए 40 हजार रुपये, बैट्री चालित में बदलने के लिए 25 हजार और सीएनजी किट लगाने पर 20 हजार रुपये तक एकमुश्त अनुदान देने का प्रावधान किया गया है. पटना में गेल के प्रस्तावित 5 आउटलेट में से तीन से सीएनजी की आपूर्ति प्रारंभ हो गयी है.
प्लास्टिक कैरी बैग राज्य में पहले से ही प्रतिबंधित है. यूएनडीपी और हिन्दुस्तान कोका-कोला बिवरेजेज द्वारा पटना के गर्दनीबाग में 5 टन प्रतिदिन क्षमता का प्लास्टिक अपशिष्ट प्रोसेसिंग इकाई स्थापित की जा रही है. मेडिकल अपशिष्टों के प्रबंधन के लिए चार सामूहिक उपचार केन्द्र पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और गया में कार्यरत हैं. इसके अलावा भोजपुर और मधेपुरा में दो और केन्द्र स्थापित किए जायेंगे. परिवेशीय वायु गुणवत्ता के अनुश्रवण के लिए पटना, मुजफ्फरपुर व गया में पहले से कार्यरत एक-एक के आलावा पटना में 5 तथा हाजीपुर एवं गया में एक-एक केन्द्र स्थापित किए जा चुके हैं. शीघ्र ही मुजफ्फरपुर में एक और नया केन्द्र काम करने लगेगा. उपजाऊ उपरी मृदा के संरक्षण के लिए सभी सरकारी भवनों में फ्लाई ऐश आधारित उत्पादों का इस्तेमाल सुनिश्चित किया जायेगा.