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10-Aug-2023 04:45 PM
By First Bihar
DELHI: नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर सदन मे बहस जारी है। पक्ष और विपक्ष के सदस्य सदन में मजबूती से अपनी बातों को रख रहे हैं। लोजपा (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और जमुई सांसद चिराग पासवान ने सदन में अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ में अपनी बातों रखा।
चिराग पासवान ने कहा कि इस सदन ने इससे पहले भी कई अविश्वास प्रस्ताव देखे हैं लेकिन इस बार का अविश्वास प्रस्ताव अनोखा है। इस बार सरकार के प्रति अविश्वास जताना कम और अपने गठबंधन के प्रति विश्वास बढ़ाना ज्यादा जरूरी है। विपक्ष यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि उनका गठबंधन साथ है। पिछले तीन दिनों से बहस चल रही है, जिसमें केवल दोषारोपण किया गया। मणिपुर को लेकर सबने केवल दोष बताए हैं, किसी ने समाधान देने की कोशिश नहीं की।
उन्होंने कहा कि आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति के बीच मणिपुर के लोग यह जानना चाह रहे हैं कि उनकी बेहतरी के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गृहमंत्री अमित शाह ने सभी पहलूओं को बहुत ही स्पष्ट तरीके से सदन के समक्ष रखा है। 1990 के दशक में भी मणिपुर में इसी तरह की परिस्थितियां उत्पन्न हुई थीं, उस वक्त देश में किसकी सरकार थी। उस वक्त सरकार में बैठे लोगों ने कितनी बार इस सदन में चर्चा की थी।
चिराग ने कहा कि यह अच्छी बात है कि विपक्ष के लोग मणिपुर गए थे, लेकिन बिहार के दरभंगा, अरवल और मुजफ्फरपुर क्यों नहीं गए। कुछ दिन पहले ही बछवाड़ा में एक 10 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म करके उसे तेजाब डालकर मार दिया गया और उसके शव को अपने ही घर में दफना दिया गया। मुजफ्फरपुर में दलित महिला के साथ दुष्कर्म करके उसके शरीर को दो हिस्सों में काट दिया गया और नग्न अवस्था में खेत में फेंक दिया गया। ये लोग अपने गठबंधन को मजबूत करने के लिए पटना गए, लेकिन ऐसे परिवारों के पास नहीं गए।
जमुई सांसद ने कहा कि हकीकत है कि देश के किसी भी कोने में अगर मां-बेटी के साथ ऐसी घटना होती है तो वह अक्षम्य है। उसको कोई बर्दाश्त नहीं कर सकता। गृहमंत्री ने अपील की है कि ऐसी घटनाओं के लिए पूरे सदन को एकजुट होना होगा। पश्चिम बंगाल, बिहार, राजस्थान और कर्नाटक पर भी चर्चा करनी चाहिए। देश एक है, इसे आइसोलेट कर और टुकड़ों में बांटकर बात नहीं कर सकते। यही वजह है कि हर चुनाव के साथ प्रधानमंत्री के प्रति विश्वास लोगों का बढ़ता जा रहा है। 2024 में 2019 से भी बड़ा जनादेश एनडीए को मिलने जा रहा है।