जमुई में नकाबपोश बदमाशों ने घर पर बमबाजी कर लूट की वारदात को दिया अंजाम, जमीन के दस्तावेज भी जलाए मधुबनी में भीषण सड़क हादसा: बेलगाम ट्रैक्टर की चपेट में आने से महिला की मौत, चालक फरार सीट लूटने के चक्कर में दो यात्रियों की मौत, गया जंक्शन पर दर्दनाक हादसा सहरसा में सिर कटी लाश का खुलासा: प्रेम-प्रसंग में युवती के भाई ने रची थी साजिश बिहार में खुले में मांस-मछली की बिक्री पर रोक, बिना लाइसेंस के नहीं लगेगी दुकान, नीतीश सरकार ने किये नियम सख्त JEE Mains Result 2026: जेईई मेन 2026 का रिजल्ट घोषित, बिहार के शुभम कुमार ने लहराया परचम, हासिल किये 100 परसेंटाइल बिक्रमगंज के रेड लाइट एरिया में पुलिस की रेड, 4 महिलाएं समेत 6 हिरासत में कर्पूरी ठाकुर की जयंती में राजद के दो गुट भिड़े, इसराइल मंसूरी और हैदर आजाद में तीखी नोकझोंक Bihar News: बिहार में दर्दनाक सड़क हादसे में मासूम बच्चे की मौत, गुस्साए लोगों ने सड़क पर किया भारी बवाल BIHAR CRIME NEWS: बिहार में प्रशासन लिखी स्कॉर्पियो से फायरिंग, पेशकार और पुलिस अधिकारी गिरफ्तार
10-May-2022 06:37 PM
PATNA: पटना हाईकोर्ट ने बिहार फार्मेसी काउंसिल के अध्यक्ष समेत सभी सदस्यों को पद से हटाने का निर्देश दिया है। बिहार फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार रिटायर होने के बाद भी काम कर रहे थे। चीफ जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एस कुमार की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता उमा शंकर शर्मा की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को यह आदेश दिया।
पटना हाईकोर्ट ने24 घंटे के भीतर किसी भी पदेन सदस्य को रजिस्ट्रार के रूप में नियुक्त करने का आदेश सरकार को दिया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शिल्पी केसरी ने कोर्ट को बताया कि बिहार फार्मेसी काउंसिल के अध्यक्ष मामलों का संचालन करती रहीं।
परिषद के रजिस्ट्रार के रूप में अवैध और अनधिकृत रूप से कार्य कर रहे है। प्रतिवादी बिंदेश्वर नायक को कार्यमुक्त करने में उक्त अध्यक्ष को कम से कम पांच महीने का समय लगा। परिषद के कुप्रबंधन, आचरण और मामलों के संदर्भ में 5 जून 2010 और 20 दिसम्बर 2013 की दो प्राथमिकी दर्ज की गयी थी। लेकिन इस संबंध में कोई प्रगति नहीं हुई।
अधिवक्ता ने बताया कि कार्यवाहक अध्यक्ष/अध्यक्ष फार्मासिस्टों को अनियमित ढंग से लाइसेन्स देते थे। वे मनमानी ढंग से नियमों की अनदेखी कर लाइसेन्स फोन पर ही दे दिया करते थे। प्रतिवादी की ओर से पेश अजय बिहारी सिन्हा ने कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया कि सरकार द्वारा कई पत्र जारी किए गए थे जिसमें अध्यक्ष और परिषद को रजिस्ट्रार के नाम भेजने के लिए कहा गया है लेकिन ऐसा नहीं किया गया।