ब्रेकिंग न्यूज़

Vaibhav Suryavanshi : अंडर-19 वर्ल्ड कप स्टार वैभव सूर्यवंशी अब 10वीं बोर्ड परीक्षा की चुनौती के लिए तैयार; जारी हुआ एडमिट कार्ड; जानिए किस सेंटर पर देंगे एग्जाम Civil Court Bomb Threat : सिविल कोर्ट को उड़ाने की फिर मिली धमकी, 24 घंटे के भीतर दूसरी बार कॉल से मचा हड़कंप Patna Traffic Update : पटना का इनकम टैक्स गोलंबर बदलेगा, ट्रैफिक व्यवस्था में होने जा रहा बड़ा परिवर्तन; जानिए नीतीश सरकार का नया प्रोजेक्ट Bihar Budget Session : बिहार विधानमंडल का बजट सत्र: महिला सुरक्षा पर हंगामे के आसार, आज कई विभागों से जुड़े सवालों पर होगी चर्चा Pahadi Saidpur Nala : पटना के पहाड़ी-सैदपुर नाले में गिरा छात्र: सुरक्षा घेरा ध्वस्त, निर्माण कार्य में लापरवाही से हुआ हादसा Bihar police dispute : होटल में खाने का पैसा मांगना पड़ा महंगा: मालिक से मारपीट का आरोप, SHO पर गंभीर सवाल; एसपी और डीआईजी से शिकायत Bihar Road : बिहार में सड़कों की ऊंचाई बढ़ाने पर सख्ती, पथ निर्माण विभाग ने जारी किया नया आदेश; इंजीनियरों को पहले करना होगा यह काम Vande Bharat Express : बिहार में इन इलाके के लोगों को जल्द मिलने वाला है वंदे भारत एक्सप्रेस की सौगात, नई रेलवे लाइन की भी उम्मीद Bihar Road : बिहार के इस इलाके के लोगों की बदलेगी किस्मत, 2 लेन की जगह अब 4 लेन सडकों का होगा निर्माण; सरकार से मिली मंजूरी Teacher Vacancy 2026 : बिहार शिक्षक भर्ती 2026: 46 हजार पदों के लिए BPSC ने जारी किया नोटिस, विज्ञापन जल्द

बिहार चुनाव में आपराधिक रिकार्ड का प्रचार नहीं करने वालों को झटका, सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्शन कमीशन और राजनीतिक दलों को भेजा नोटिस

बिहार चुनाव में आपराधिक रिकार्ड का प्रचार नहीं करने वालों को झटका, सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्शन कमीशन और राजनीतिक दलों को भेजा नोटिस

15-Feb-2021 06:50 PM

PATNA : बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान दागी नेताओं के आपराधिक रिकार्ड सार्वजनिक नहीं करने को लेकर राजनीतिक पार्टियों और इलेक्शन कमीशन को झटका लगा है. सर्वोच्च न्यायालय ने राजनीतिक दलों और मुख्य चुनाव आयुक्त को अवमानना नाटिस जारी किया है. नोटिस का जवाब चार हफ़्ते में देना है, जिसके बाद इस मामले में 9 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई होगी. 


जस्टिस रोहिंटन एफ नरीमन, जस्टिस हेमन्त गुप्ता और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने वकील बृजेश सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए पूछा है कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट दिशा निर्देशों के बावजूद राजनीतिक पार्टियों ने उन पर पूरी तरह से अमल नहीं किया तो आयोग ने उनके खिलाफ क्या एक्शन लिया गया. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल सभी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट दे दी है.


आपको बता दें कि चुनाव अयोग ने सभी दलों को फॉर्म सी 8 जारी किया था. वहीं फॉर्म सी 7 भी इसके साथ दिया गया था, जिसमें उन्हें चुनाव में आपराधिक पृष्ठभूमि के उम्म्दवारों को चुनने के पीछे की वजह वोटरों को 48 घंटों के अंदर बतानी थी. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, याचिका में यह आरोप लगाया गया है कि लगभग सभी राजनीतिक दलों ने इसमें चतुराई से काम लिया और छोटे स्तर के अखबारों में ही इसकी जानकारी दी. जबकि इसे मुख्य समाचार पत्रों या मीडिया प्लेटफार्म पर देना चाहिए था.


उच्चतम न्यायालय ने 13 फरवरी 2020 को एक फैसले में सभी चुनावी पार्टियों और नियामक संस्था चुनाव अयोग को निर्देश दिया था कि सभी सुनाव लड़ने वाले दल यदि ऐसे उम्मीदवार को चुनते हैं, जिनका आपराधिक रिकॉर्ड है तो वे इस बारे में मतददाताओं को स्पष्टीकरण देंगे कि उन्होंने ऐसा उम्मीदवार क्यों चुना. यह स्पष्टीकरण उन्हें दल की वेबसाइट पर देना होगा. साथ ही चुने गए उम्म्दवारों की जिम्मेदारी होगी कि मतदान से दो हफ्ते पहले उन्हें अपने आपराधिक रिकॉर्ड का उचित माध्यमों में जैसे रेडियो, टीवी और स्थानीय अखबारों में जो उनके क्षेत्र में लोकप्रिय हों और उनका व्यापक प्रसार हो, उनमें तीन बार प्रचार करेंगे.


याचिकाकर्ता ने कहा कि चुनावों के दौरान बिहार में इस आदेश का कतई पालन नहीं हुआ. जिन उम्मीदवारों ने अपने खिलाफ लंबित अपराधिक मामलों का प्रचार किया, वे अखबार बहुत की छोटे थे और एक औपचारिकता दिखाते हुए यह प्रचार कर दिया गया. इस प्रचार को मतददाताओं ने नहीं देखा, जबकि प्रचार करने का आदेश देने का यही मतलब था.