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21-Apr-2024 12:03 PM
By First Bihar
DELHI: योग गुरु बाबा राम देव अब नई मुसीबत में घिरते दिख रहे हैं। बाबा रामदेव की पतंजलि योगपीठ को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने अपीलीय न्यायाधिकरण के उस फैसले को बरकरार रखने का आदेश दिया है, जिसमें ट्रस्ट को योग शिविरों के आयोजन में प्रवेश शुल्क लेने पर सेवा कर का भुगतान करने को कहा गया था।
शीर्ष अदालत में जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्जवल भुइयां की पीठ ने सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क और सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण की इलाहाबाद पीठ के पांच अक्टूबर 2023 को आए फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। पीठ ने ट्रस्ट की अपील को खारिज करते हुए कहा कि न्यायाधिकरण ने ठीक ही कहा है कि शुल्क वाले शिविरों में योग करना एक सेवा है, हमें इस आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं मिला इसलिए अपील खारिज की जाती है।
दरअसल, बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के अधीन काम करने वाला यह ट्रस्ट विभिन्न शिविरों में योग प्रशिक्षण प्रदान करने में लगा हुआ था। न्यायाधिकरण ने अपने आदेश में कहा था कि पतंजलि योगपीठ के योग शिविरों के लिए प्रतिभागियों से दान के रूप में शुल्क एकत्र किया गया था। यह राशि दान के रूप में ली गई थी लेकिन यह उक्त सेवाएं प्रदान करने के लिए शुल्क नहीं था।
CISTAT ने अपने आदेश में कहा था कि पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट की तरफ से आयोजित आवासीय एवं गैर-आवासीय योग शिविरों में शामिल होने के लिए लोगों से शुल्क लिया जाता है, लिहाजा यह 'स्वास्थ्य और फिटनेस सेवा' की श्रेणी में आता है और इस पर सेवा कर लगेगा। सीमा शुल्क और केंद्रीय उत्पाद शुल्क, मेरठ रेंज के आयुक्त ने अक्टूबर, 2006 से मार्च, 2011 के लिए जुर्माना और ब्याज सहित लगभग 4.5 करोड़ रुपये के सेवा कर की मांग की थी। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट को 4.5 करोड़ रुपए टैक्स भरने होंगे।