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27-Jul-2023 09:23 AM
By First Bihar
DESK : देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के खिलाफ सदन में विपक्ष के तरफ से अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है जिसके बाद इस अविश्वास प्रस्ताव का पलटवार एनडीए भी करने की तैयारी में है। हालांकि एनडीए की संख्या को देखते हुए इस प्रस्ताव का नतीजा तो पहले से तय है। लेकिन एनडीए की कोशिश है कि इस बार विपक्ष दलों की गठबंधन 'इंडिया' को तगड़ा झटका दिया जा सके।
दरअसल, मानसून सत्र के दौरान मोदी सरकार के खिलाफ विपक्षी दलों के तरफ से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर सत्तारूढ़ दल एनडीए की यह कोशिश है कि 5 साल पहले मोदी सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव से ज्यादा अंतर से इस में जीत दर्ज की जाए। ताकि लोगों के बीच यह संदेश जा सके कि एनडीए गठबंधन के सामने इंडिया जो नया गठबंधन तैयार हुआ है, वह कारगर नहीं है।
मालूम हो कि, मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के दूसरे कार्यकाल में विपक्ष द्वारा लाया जा रहा यह पहला अविश्वास प्रस्ताव है। इससे पहले मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल में जुलाई, 2018 में कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव लाया था। तब इस अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन में सिर्फ 126 वोट पड़े थे, जबकि इसके खिलाफ 325 सांसदों ने मत दिया था। लेकिन, इस बार सदन का संख्या बल एनडीए के पक्ष में ज्यादा है। इस बार एनडीए के पास अपने 332 सांसदों का समर्थन है। विपक्षी गठबंधन से बाहर खड़े दलों का अगर समर्थन मिलता है तो यह संख्या और बढ़ सकती है।
वहीं, कांग्रेस के साथ बने विपक्षी गठबंधन के साथ लगभग 153 सांसद हैं। जबकि दोनों गठबंधनों से दूर दलों के पास 53 सांसद हैं। जबकि पांच सीटें खाली हैं। इनमें शिवसेना और एनसीपी को लेकर अभी स्थिति साफ नहीं है। ये दोनों दल आपस में ही बंट चुके हैं। ऐसे में व्हिप जारी होने पर इन दलों के दोनों खेमे कैसे मतदान करेंगे साफ नहीं है।
आपको बताते चलें कि, इस अविश्वास प्रस्ताव के जरिये जहां विपक्ष मोदी सरकार को घेरने की कोशिश के साथ अपनी एकजुटता, खासकर नए बने गठबंधन इंडिया की ताकत को दिखाएगा, वहीं एनडीए की कोशिश विपक्षी खेमे में सेंध लगाने की होगी। भाजपा की कोशिश विपक्षी खेमे में सेंध लगाने की है। मतदान के समय अगर इस खेमे के कुछ दल या कुछ सांसद टूटते हैं या सदन से बाहर रहते हैं तो वह भी भाजपा के लिए काफी लाभदायक और विपक्ष के लिए नुकसानदेह हो सकता है।