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15-Jan-2026 07:31 PM
By FIRST BIHAR
Antibiotic Resistance: इलाज की सबसे भरोसेमंद मानी जाने वाली एंटीबायोटिक दवाएं अब खुद गंभीर संकट में हैं। इंसानी शरीर इन दवाओं को पहचानकर निष्क्रिय करने लगा है, जिससे सामान्य संक्रमण भी जानलेवा रूप ले सकता है। एसएमएस मेडिकल कॉलेज और उससे संबद्ध पांच अस्पतालों में किए गए एक बड़े शोध में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि एंटीबायोटिक का असर 57 प्रतिशत से लेकर 100 प्रतिशत तक कम हो चुका है।
इस रिसर्च में कुल 9,776 मरीजों को शामिल किया गया। रिपोर्ट के अनुसार एक भी ऐसा मरीज नहीं मिला, जिसमें एंटीबायोटिक की प्रभावशीलता 60 प्रतिशत से अधिक रही हो। सभी मामलों में 60 से 98 प्रतिशत तक एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस पाया गया, जबकि कुछ दवाएं पूरी तरह बेअसर हो चुकी हैं। सबसे ज्यादा मामले यूरिन इंफेक्शन, निमोनिया और स्किन इंफेक्शन से जुड़े सामने आए हैं। कई मरीजों में रेजिस्टेंट बैक्टीरिया अब सामान्य रूटीन इंफेक्शन तक में फैल चुका है।
रिसर्च में अलग-अलग एंटीबायोटिक पर रेजिस्टेंस का स्तर बेहद चिंताजनक पाया गया। वेनकोमाइसिन में 100 प्रतिशत, लाइनजोलिड में 98 प्रतिशत, टाइगेसाइक्लिन और टेसोप्लेनिन में 97 प्रतिशत, डॉक्सीसाइक्लिन और एम्पिसिलिन में 93 प्रतिशत तक रेजिस्टेंस दर्ज की गई। इसके अलावा सिप्रोफ्लॉक्सासिन, जेंटामाइसिन, एरिथ्रोमाइसिन, इमिपेनम और मेरोपेनम जैसी दवाओं की प्रभावशीलता भी तेजी से घटती पाई गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दी, जुकाम और वायरल संक्रमण में बिना डॉक्टर की सलाह एंटीबायोटिक लेने की आदत इस संकट की सबसे बड़ी वजह है। एसएमएस मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की विशेषज्ञ डॉ. रजनी शर्मा के अनुसार बच्चों में वायरल और एलर्जी के मामलों में एंटीबायोटिक देने से शरीर में तेजी से रेजिस्टेंस विकसित हो जाती है। कोविड के बाद इन दवाओं के अत्यधिक उपयोग ने हालात को और गंभीर बना दिया है।
डब्ल्यूएचओ की ओर से लैंसेट जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार अब तक 12.9 लाख मौतें एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस के कारण हो चुकी हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो भविष्य में सामान्य संक्रमण का इलाज भी चुनौती बन जाएगा।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि एंटीबायोटिक का इस्तेमाल केवल डॉक्टर की सलाह पर करें, तय डोज और अवधि का पालन करें और सर्दी-जुकाम व वायरल संक्रमण में इन दवाओं से पूरी तरह बचें। इस रिसर्च की रिपोर्ट दिल्ली भेज दी गई है और आने वाले समय में एंटीबायोटिक के सही उपयोग को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।