ब्रेकिंग न्यूज़

‘सरकार जनता के प्रति कर्तव्य पालन में विफल’, प्रीमियम पेट्रोल के दाम बढ़ने पर भड़के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ‘सरकार जनता के प्रति कर्तव्य पालन में विफल’, प्रीमियम पेट्रोल के दाम बढ़ने पर भड़के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी बिहार में रामनवमी मेला और अन्य धार्मिक आयोजनों के लिए 1.63 करोड़ जारी, विजय सिन्हा बोले- आस्था और परंपरा में नहीं होगी कोई कमी बिहार में रामनवमी मेला और अन्य धार्मिक आयोजनों के लिए 1.63 करोड़ जारी, विजय सिन्हा बोले- आस्था और परंपरा में नहीं होगी कोई कमी झोलाछाप डॉक्टर की लापरवाही से विवाहिता की मौत, पेट दबाकर जबरन करा रहा था डिलीवरी, आरोपी फरार Bihar Weather News: बिहार में बदला मौसम का मिजाज, बगहा, मुजफ्फरपुर और वैशाली समेत कई जिलों में बारिश, आसमान से गिरे ओले Bihar Weather News: बिहार में बदला मौसम का मिजाज, बगहा, मुजफ्फरपुर और वैशाली समेत कई जिलों में बारिश, आसमान से गिरे ओले UDGAM Portal: कहीं आपके नाम पर भी तो जमा नहीं हैं अनक्लेम्ड अमाउंट? मिनटों में ऐसे करें चेक बिहार में आर्थिक अपराधों पर EOU का कड़ा रुख, परीक्षा से लेकर खनन और बैंक घोटाले तक हुई सख्त कार्रवाई बिहार में आर्थिक अपराधों पर EOU का कड़ा रुख, परीक्षा से लेकर खनन और बैंक घोटाले तक हुई सख्त कार्रवाई

Home / india / DRDO Humanoid Robot: बॉर्डर के लिए तैयार किए जा रहे 'आयरन मैन', जवानों...

DRDO Humanoid Robot: बॉर्डर के लिए तैयार किए जा रहे 'आयरन मैन', जवानों की सुरक्षा के साथ दुश्मनों की बर्बादी की पूरी तैयारी

DRDO Humanoid Robot: पुणे में DRDO ह्यूमनॉइड रोबोट विकसित कर रहा है, जो जोखिम भरे सैन्य मिशनों में सैनिकों की जगह लेगा। 2027 तक पूरा होने का लक्ष्य।

14-May-2025 08:12 AM

By First Bihar

DRDO Humanoid Robot: भारत-पाक तनाव और सीमा पर बढ़ते खतरों के बीच DRDO एक क्रांतिकारी कदम उठा रहा है। पुणे में DRDO के वैज्ञानिक एक ह्यूमनॉइड रोबोट पर काम कर रहे हैं, जो जोखिम भरे सैन्य मिशनों में सैनिकों की जगह ले सकेगा। इसका मकसद जंगल, पहाड़ और अन्य कठिन इलाकों में खतरनाक कार्यों को अंजाम देना है, ताकि सैनिकों की जान को खतरा कम हो।


DRDO की पुणे स्थित रिसर्च एंड डेवलपमेंट इस्टैब्लिशमेंट लैब में यह ह्यूमनॉइड रोबोट विकसित किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य सैनिकों को जोखिम भरे मिशनों से बचाना है, जैसे कि बम डिफ्यूज करना, जंगल में टोही मिशन, और दुश्मन के इलाकों में निगरानी। इस रोबोट को AI और मशीन लर्निंग तकनीक से लैस किया जा रहा है, ताकि यह स्वचालित रूप से फैसले ले सके और कठिन परिस्थितियों में भी काम कर सके।


DRDO के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रवि शंकर ने बताया, "हमारा लक्ष्य 2027 तक इस प्रोजेक्ट को पूरा करना है। प्रोटोटाइप का टेस्ट सफल रहा है, और अब हम इसे और उन्नत बनाने पर काम कर रहे हैं।" रोबोट को इस तरह डिज़ाइन किया जा रहा है कि यह 50 किलो तक वजन उठा सके, 10 किमी/घंटा की रफ्तार से चल सके, और 48 घंटे तक बैटरी बैकअप दे सके।


अब तक दो प्रोटोटाइप बनाए जा चुके हैं, जिन्हें पुणे के पास जंगल और पहाड़ी इलाकों में टेस्ट किया गया है। टेस्ट में रोबोट ने बाधाओं को पार करने, निगरानी करने, और हल्के हथियारों को संभालने में सफलता दिखाई है। लेकिन विशेषज्ञों ने इसकी समयसीमा पर सवाल उठाए हैं। रक्षा विशेषज्ञ कर्नल राजीव शर्मा का कहना है, "इस तरह की तकनीक को पूरी तरह तैयार होने में 15-20 साल लग सकते हैं। AI अभी भी मानव निर्णय की बराबरी नहीं कर सकता, खासकर जटिल युद्ध परिस्थितियों में।"


बताते चलें कि 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले और उसके बाद शुरू हुए ऑपरेशन सिंदूर ने सैन्य तकनीक की जरूरत को और बढ़ा दिया है। इस ऑपरेशन में 7 मई को भारत ने 9 आतंकी ठिकानों को नष्ट किया, लेकिन इस दौरान कई सैनिक भी शहीद हुए। ऐसे में, ह्यूमनॉइड रोबोट जैसे प्रोजेक्ट सैनिकों की जान बचाने में अहम साबित हो सकते हैं।