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23-Jan-2026 12:22 PM
By First Bihar
Indian Army : भारतीय सेना ने इस वर्ष कोलकाता के रेड रोड पर आयोजित गणतंत्र दिवस परेड के दौरान नवगठित अश्नि (ASHNI) प्लाटून को उसके उन्नत और एकीकृत स्वरूप ‘पंचनाग (PANCHNAAG)’ के रूप में प्रदर्शित किया। यह प्रदर्शन सेना के क्षमता विकास और परिचालन आधुनिकीकरण के प्रयासों को दर्शाता है। पंचनाग दल का नेतृत्व 15वीं बटालियन, द राजपूत रेजिमेंट के कैप्टन सोनू कुमार ने किया।
पंचनाग की परिकल्पना अश्नि प्लाटून की परिचालन क्षमता में वृद्धि के उद्देश्य से की गई है, जिससे इसकी गतिशीलता, बहुआयामी उपयोगिता और त्वरित तैनाती क्षमता को सुदृढ़ किया जा सके। इस स्वरूप में पाँच कार्यात्मक क्षमताओं—टोही एवं निगरानी, स्ट्राइक, काउंटर-ड्रोन ऑपरेशन, लॉजिस्टिक्स तथा मेंटेनेंस—को नेक्स्ट जेनरेशन उपकरणों के माध्यम से एकीकृत किया गया है। यह प्लाटून निगरानी रडार, थर्मल इमेजर, ड्रोन, एंटी-ड्रोन प्रणालियों, विभिन्न हथियार प्रणालियों तथा लॉजिस्टिक्स ड्रोन से सुसज्जित है। यह प्रदर्शन समकालीन परिचालन आवश्यकताओं के अनुरूप तकनीकी एकीकरण पर सेना के फोकस को दर्शाता है।
पंचनाग की पाँच प्रमुख क्षमताएँ
पंचनाग का नाम इसकी पाँच प्रमुख एकीकृत क्षमताओं से लिया गया है, जो इसे एक ऑल-इन-वन कॉम्बैट यूनिट बनाती हैं—
1️⃣ टोही और निगरानी (Reconnaissance & Surveillance)
प्लाटून को उन्नत निगरानी रडार, थर्मल इमेजर्स और हाई-एंड सर्विलांस ड्रोन से लैस किया गया है, जिससे दिन-रात और हर मौसम में दुश्मन की गतिविधियों पर नज़र रखी जा सकती है।
2️⃣ स्ट्राइक क्षमता (Strike Capability)
पंचनाग के पास आधुनिक व्यक्तिगत हथियार, सटीक निशाना साधने वाली हथियार प्रणालियाँ और फायर सपोर्ट सिस्टम मौजूद हैं, जो सीमित समय में निर्णायक कार्रवाई करने में सक्षम हैं।
3️⃣ काउंटर-ड्रोन ऑपरेशन (Counter-Drone Operations)
आधुनिक युद्ध में ड्रोन एक बड़ा खतरा बन चुके हैं। पंचनाग को विशेष एंटी-ड्रोन सिस्टम से सुसज्जित किया गया है, जो दुश्मन के ड्रोन को पहचानने, ट्रैक करने और निष्क्रिय करने में सक्षम है।
4️⃣ लॉजिस्टिक्स सपोर्ट (Logistics Support)
लॉजिस्टिक्स ड्रोन और स्मार्ट सप्लाई सिस्टम के माध्यम से पंचनाग कठिन इलाकों में भी गोला-बारूद, दवाइयाँ और जरूरी सामग्री तेजी से पहुंचा सकता है।
5️⃣ मेंटेनेंस और टेक्निकल सपोर्ट (Maintenance & Technical Support)
मैदान में ही उपकरणों की मरम्मत और तकनीकी सहायता की व्यवस्था पंचनाग को लंबे समय तक आत्मनिर्भर बनाए रखती है।
तकनीकी एकीकरण और भविष्य की तैयारी
पंचनाग प्लाटून नेटवर्क-आधारित कमांड और कंट्रोल सिस्टम पर कार्य करता है, जिससे रियल-टाइम डेटा शेयरिंग, बेहतर निर्णय क्षमता और संयुक्त सैन्य अभियानों में तालमेल संभव होता है। यह फॉर्मेशन विशेष रूप से बॉर्डर सिक्योरिटी, काउंटर-इंसर्जेंसी, हाइब्रिड वारफेयर और सीमित अवधि के हाई-इंटेंसिटी कॉन्फ्लिक्ट के लिए उपयुक्त मानी जा रही है। गणतंत्र दिवस पर पंचनाग का प्रदर्शन इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारतीय सेना भविष्य के युद्धों के लिए केवल तैयार ही नहीं, बल्कि तकनीकी रूप से अग्रणी भूमिका निभाने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रही है। ‘पंचनाग’ भारतीय सेना की उस नई सोच का प्रतीक है, जहाँ साहस, तकनीक और रणनीति एक साथ मिलकर राष्ट्र की सुरक्षा को और मजबूत बना रहे हैं।