1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 11, 2026, 7:57:10 AM
- फ़ोटो
LPG gas shortage : केंद्र सरकार ने देशभर में ‘एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955’ लागू कर दिया है। यह कदम उस समय उठाया गया है जब हॉर्मुज जलमार्ग के रास्ते होने वाली गैस सप्लाई में व्यवधान के कारण पेट्रोलियम पदार्थों और एलपीजी गैस की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। सरकार के इस निर्णय का उद्देश्य घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए गैस की आपूर्ति को नियंत्रित करना और कालाबाजारी, जमाखोरी जैसी गतिविधियों पर रोक लगाना है।
गैस किल्लत की स्थिति में कई राज्यों ने कॉमर्शियल गैस की सप्लाई अस्थायी रूप से रोक दी है। इनमें बिहार, दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ प्रमुख हैं। बिहार में प्रतिदिन कुल 2.5 लाख गैस सिलेंडर की आपूर्ति होती है, जिसमें 12,500 सिलेंडर कॉमर्शियल उपयोग के लिए होटल, रेस्टोरेंट, स्कूल और हॉस्टल आदि को भेजे जाते हैं। फिलहाल, इन कॉमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई अस्थायी रूप से रोक दी गई है। पिछले तीन दिनों से सिलेंडर की डिलीवरी नहीं हो रही है, इसलिए बचा हुआ स्टॉक ही बाजार में उपलब्ध है।
कॉमर्शियल गैस की कमी की खबर के बाद घरेलू उपभोक्ताओं में पैनिक बुकिंग बढ़ गई है। गोपालगंज, आरा, दरभंगा, अररिया, बेतिया, पूर्णिया और सुपौल में एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखने को मिली। इस पर राज्य प्रशासन ने तुरंत सतर्कता बढ़ा दी है।
स्पेशल ब्रांच के DIG ने सभी डिविजनल कमिश्नर, रेंज के IG, DIG, सभी जिलों के DM और SSP/SP को अलर्ट लेटर भेजा है। इस लेटर में कहा गया है कि मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध और तनावपूर्ण स्थिति के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गैस और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। बिहार में भी एलपीजी गैस, पेट्रोल और डीजल की कमी होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
लेटर में यह भी निर्देश दिया गया है कि गैस एजेंसियों, विक्रेताओं और पेट्रोल पंपों पर आम नागरिकों की भीड़ बढ़ने की संभावना है, जिससे अव्यवस्था और सुरक्षा संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। प्रशासन को सतत निगरानी रखनी है और जमाखोरी या कालाबाजारी करने वाले असामाजिक तत्वों पर कड़ी कार्रवाई करनी है। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को यह सुनिश्चित करना होगा कि विधि व्यवस्था बनाए रखी जाए और पब्लिक को स्थिति से अवगत कराया जाए। अफवाहों और गलत खबरों से बचने के लिए विशेष ध्यान देने को कहा गया है।
एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955 एक ऐसा कानून है, जो सरकार को जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति और कीमतों को नियंत्रित करने की ताकत देता है। इसे आम भाषा में ‘जमाखोरी रोकने वाला कानून’ कहा जा सकता है। जब किसी जरूरी वस्तु की कमी होने लगती है या उसकी कीमतें असामान्य रूप से बढ़ जाती हैं, तो सरकार इस कानून को लागू कर व्यापारियों के स्टॉक पर सीमा निर्धारित कर सकती है। इसके जरिए सरकार यह सुनिश्चित करती है कि आम लोगों को वस्तुएं पर्याप्त मात्रा में और उचित कीमत पर उपलब्ध हों।
विशेष रूप से एलपीजी गैस की कमी की स्थिति में यह कानून महत्वपूर्ण साबित होता है, क्योंकि यह न केवल स्टॉक लिमिट तय करता है बल्कि कालाबाजारी और जमाखोरी को रोककर बाजार में स्थिरता बनाए रखता है। सरकार का कहना है कि घरेलू उपभोक्ताओं की सुविधा को प्राथमिकता दी जाएगी और किसी भी प्रकार की संकट या अफवाह को रोकने के लिए जिला प्रशासन और आपूर्ति विभाग सतत निगरानी करेंगे।
इस कदम के तहत बिहार समेत अन्य प्रभावित राज्यों में नागरिकों को स्थिति से अवगत रखने और उन्हें सुरक्षित तरीके से गैस एवं पेट्रोलियम उत्पाद उपलब्ध कराने के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। वहीं प्रशासन का ध्यान जमाखोरी और कालाबाजारी पर विशेष निगरानी रखने, स्टॉक की नियमित जांच करने और आवश्यकतानुसार कड़ी कार्रवाई करने पर रहेगा।
इस तरह केंद्र सरकार और राज्य प्रशासन ने गैस और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति में व्यवधान के मद्देनजर सतर्कता बढ़ा दी है, जिससे आम जनता को पर्याप्त मात्रा में घरेलू गैस उपलब्ध हो और किसी प्रकार की आपूर्ति समस्या या अफवाह से बचा जा सके।