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16-Aug-2025 08:54 AM
By First Bihar
AMCA: भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है। 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से स्वदेशी फाइटर जेट इंजन बनाने का आह्वान भी किया था। AMCA प्रोजेक्ट डायरेक्टर कृष्णा राजेंद्र ने बताया कि इस 5वीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट का डिजाइन अंतिम रूप ले चुका है और 2027 के अंत तक इसकी पहली उड़ान होने की संभावना है। 15,000 करोड़ रुपये की इस परियोजना के तहत 5 प्रोटोटाइप तैयार किए जाएंगे, जिनका रोलआउट 2026-27 से शुरू होगा और 2034 तक भारतीय वायुसेना में शामिल होने की उम्मीद है।
AMCA एक सिंगल-सीट, ट्विन-इंजन, ऑल-वेदर स्टील्थ फाइटर जेट है, जिसे एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA), DRDO, HAL और निजी क्षेत्र की भागीदारी से विकसित किया जा रहा है। इसकी प्रमुख विशेषताएं में स्टील्थ मोड (1.5 टन हथियार क्षमता), नॉन-स्टील्थ मोड (5 टन हथियार), सुपर-क्रूज क्षमता, AESA रडार और AI-आधारित “इलेक्ट्रॉनिक पायलट” शामिल हैं जो सिंगल पायलट को दूसरा डिजिटल सह-पायलट प्रदान करेगा। यह जेट रडार और इंफ्रारेड सिग्नेचर को कम करने वाली तकनीकों से लैस है जो इसे अमेरिका के F-35, रूस के Su-57 और चीन के J-20 जैसे जेट्स के समकक्ष बनाता है।
भारतीय वायुसेना की घटती स्क्वाड्रन संख्या (42 के मुकाबले 31) और क्षेत्रीय खतरों जैसे चीन का J-20 और पाकिस्तान का J-35A ने AMCA को प्राथमिकता बना दिया है। शुरुआती दो स्क्वाड्रन GE-F414 इंजन से संचालित होंगे, लेकिन बाद में स्वदेशी 110 kN थ्रस्ट इंजन विकसित करने की योजना है, जिसमें सैफरान या रॉल्स-रॉयस जैसे अंतरराष्ट्रीय भागीदारों का सहयोग लिया जाएगा। यह परियोजना पुराने मिग-21 और जगुआर जेट्स को बदलने और राफेल जैसे आयातित जेट्स पर निर्भरता कम करने के लिए महत्वपूर्ण है। मई 2025 में रक्षा मंत्रालय ने AMCA के लिए इंडस्ट्री पार्टनरशिप मॉडल को मंजूरी दी, जिसमें निजी कंपनियों को भी शामिल किया गया है।
AMCA परियोजना भारत को विश्व के उन चुनिंदा देशों (अमेरिका, रूस, चीन) में शामिल करेगी जो 5वीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर बना सकते हैं। सोशल मीडिया पर इसे लेकर काफी उत्साह है, यूजर्स इसे ‘आत्मनिर्भर भारत’ का प्रतीक बता रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि समय पर डिलीवरी और स्वदेशी इंजन विकास महत्वपूर्ण होगा क्योंकि पहले की परियोजनाओं में देरी ने भारत को चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। यदि यह परियोजना सफल होती है तो 2035 तक शुरू होने वाला सीरियल प्रोडक्शन भारत की वायु शक्ति और रक्षा उद्योग को वैश्विक स्तर पर और भी मजबूत करेगा।