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26-Nov-2025 08:59 AM
By First Bihar
Bihar teachers news : बिहार शिक्षा विभाग ने राज्य के माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की सीनियरिटी और प्रमोशन को लेकर एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। इस आदेश के आने के बाद अब स्कूलों में प्रभारी प्रधानाध्यापक बनाने से लेकर पदोन्नति तक की पूरी प्रक्रिया एक नई व्यवस्था के अनुसार होगी। शिक्षा विभाग के सचिव दिनेश कुमार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में स्पष्ट कर दिया गया है कि किस श्रेणी के शिक्षक किस स्कूल में सबसे सीनियर माने जाएंगे और किस आधार पर उन्हें जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
प्रमंडल स्तर पर नियुक्त शिक्षक होंगे सबसे सीनियर
नए आदेश के अनुसार, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में प्रमंडल स्तर पर नियुक्त सहायक शिक्षक अब स्कूल के सबसे सीनियर माने जाएंगे। इनकी वरिष्ठता स्थानीय निकाय शिक्षक, विशेष शिक्षक और विद्यालय अध्यापक से ऊपर होगी। इसका मतलब है कि किसी भी स्कूल में सबसे पहले प्रमंडल स्तर पर नियुक्त शिक्षक को ही प्रशासनिक और प्रभार संबंधी जिम्मेदारी दी जाएगी।
इसके बाद वरिष्ठता क्रम में स्थानीय निकाय शिक्षकों, विशेष शिक्षकों तथा विद्यालय अध्यापकों को रखा गया है। शिक्षा विभाग का मानना है कि प्रमंडलीय नियुक्ति प्रक्रिया अधिक सख्त और पारदर्शी होती है, इसलिए इन्हें प्राथमिकता देना आवश्यक है।
जहां प्रमंडलीय शिक्षक नहीं होंगे, वहां अनुभव होगा आधार
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन स्कूलों में प्रमंडलीय संबंध के शिक्षक उपलब्ध नहीं होंगे, वहां वरिष्ठता का निर्धारण शिक्षकों के कार्य अनुभव के आधार पर किया जाएगा। ऐसे शिक्षकों में 4 से 8 वर्ष का शिक्षण अनुभव रखने वालों को प्राथमिकता मिलेगी। प्रभारी बनाने के लिए 4 वर्ष का अनुभव 11वीं–12वीं कक्षा को पढ़ाने की योग्यता से जोड़ा जाएगा।
वहीं 8 वर्ष का अनुभव 8वीं से 10वीं कक्षा तक की पढ़ाई कराने वालों पर लागू होगा। यदि एक ही अनुभव वाले दो या अधिक शिक्षक मौजूद हैं, तो उम्र के आधार पर सीनियरिटी तय की जाएगी। अर्थात, जो शिक्षक उम्र में बड़ा होगा, उसे प्रभारी का दायित्व सौंपा जाएगा।
शिक्षकों के प्रमोशन में बड़ा बदलाव
नए आदेश का सबसे बड़ा प्रभाव शिक्षकों के प्रमोशन पर पड़ेगा। शिक्षा विभाग के सचिव दिनेश कुमार ने बताया कि अब शिक्षकों के पूर्व शैक्षणिक अनुभव को पदोन्नति में शामिल किया जाएगा। प्रमोशन का नया ढांचा इस प्रकार है—कक्षा 1 से 5 तक पढ़ाने वाले शिक्षक अब कक्षा 6 से 8 की ओर प्रमोट होंगे। कक्षा 6 से 8 के शिक्षक कक्षा 9 और 10 में पदोन्नति पाएंगे। कक्षा 9 और 10 के शिक्षक 11वीं और 12वीं कक्षा में प्रमोट होंगे।इसके साथ ही, स्थानीय निकाय के रूप में पहले से स्कूलों में पढ़ा चुके शिक्षकों के अनुभव को भी प्रमोशन में जोड़ा जाएगा। यह उन शिक्षकों के लिए बड़ी राहत है, जिन्हें कई वर्षों से अनुभव की मान्यता नहीं मिली थी।
एक लाख शिक्षकों को होगा लाभ
सचिव के अनुसार, इस फैसले से करीब एक लाख शिक्षकों को सीधा लाभ मिलने वाला है। लंबे समय से कई शिक्षक प्रमोशन की कतार में थे, लेकिन अनुभव के आकलन को लेकर अस्पष्टता बनी हुई थी। अब विभाग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि स्थानीय निकाय शिक्षकों से लेकर संविदा और स्थायी शिक्षकों का अनुभव प्रमोशन में शामिल किया जाएगा।
प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार की दिशा में कदम
शिक्षा विभाग का मानना है कि नई व्यवस्था से स्कूलों में प्रशासनिक ढांचा मजबूत होगा। पहले कई स्कूलों में वरिष्ठता को लेकर विवाद होते थे, जिससे शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होती थी। नए दिशा-निर्देशों के आने के बाद—प्रभारी प्रधानाध्यापक की नियुक्ति तेजी से और स्पष्ट मानकों पर होगी। पदोन्नति प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी। समान अनुभव वाले शिक्षकों के बीच सीनियरिटी को लेकर भ्रम दूर होगा।
शिक्षक संगठनों की प्रतिक्रिया
कई शिक्षक संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि लंबे समय से शिक्षकों के अनुभव को उचित मान्यता नहीं दी जा रही थी, जिससे प्रमोशन प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न होती थी। अब अनुभव और वरिष्ठता दोनों के स्पष्ट मानकों से शिक्षकों के भविष्य में सकारात्मक बदलाव आएगा।
वहीं कुछ संगठनों ने यह भी कहा कि प्रमंडलीय शिक्षकों को सबसे सीनियर मानने के निर्णय पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए, क्योंकि कई स्थानीय निकाय शिक्षक भी वर्षों से स्कूलों में सेवा दे रहे हैं और उनके अनुभव को बराबरी का दर्जा मिलना चाहिए।
आने वाले दिनों में होगा लागू
शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर दिया है और अब जिला शिक्षा अधिकारियों को इसे लागू करने का निर्देश दिया गया है। आने वाले कुछ हफ्तों में सभी स्कूलों में सीनियरिटी की नई सूची तैयार होगी और उसी आधार पर प्रभारी तथा प्रशासनिक जिम्मेदारियां तय होंगी।
शिक्षा विभाग का यह निर्णय बिहार की शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव लेकर आएगा। वरिष्ठता, अनुभव और प्रमोशन के नए मानकों से न केवल शिक्षकों को लाभ मिलेगा, बल्कि स्कूलों के प्रबंधन और शैक्षणिक गुणवत्ता में भी सुधार होगा। लंबे समय से चल रहे विवाद और अस्पष्टता अब समाप्त होने की उम्मीद है।