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16-Nov-2025 07:49 AM
By First Bihar
Bihar CM face Dispute: बिहार चुनाव में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद सरकार गठन की प्रक्रिया भले ही शुरू हो गई हो, लेकिन मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासत अचानक गर्माती दिख रही है। अब तक माना जा रहा था कि एनडीए का नेतृत्व करने वाले नीतीश कुमार ही 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे, लेकिन दिल्ली और पटना के राजनीतिक गलियारों में इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है क्या नीतीश कुमार ही सीएम बनेंगे या भाजपा इस बार कोई नया चेहरा पेश कर सकती है?
नई सरकार गठन से पहले दिल्ली में बड़ा सियासी मंथन हुआ। बिहार चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान और संगठन प्रभारी विनोद तावड़े ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार, इस मुलाकात में सिर्फ चुनावी नतीजों पर चर्चा नहीं हुई, बल्कि सत्ता गठन, नेतृत्व, सीट शेयरिंग और मंत्रिमंडल संतुलन को लेकर भी विस्तार से बातचीत हुई।
दिल्ली में इस बैठक के बाद ही राजनीतिक चर्चा तेज हो गई कि भाजपा अब शायद नीतीश कुमार के नाम पर तुरंत मुहर लगाने के मूड में नहीं है। जबकि चुनाव अभियान के दौरान भाजपा बार-बार कहती रही थी कि “बिहार में सीएम की कोई वैकेंसी नहीं है” और गठबंधन का नेतृत्व नीतीश ही करेंगे।
भाजपा की रणनीति पर सवाल—क्यों बढ़ रही है दूरी?
सियासी विश्लेषक मानते हैं कि इस बार भाजपा बेहद मजबूत स्थिति में उभरी है और उसकी सीटें गठबंधन का बड़ा हिस्सा हैं। ऐसे में पार्टी यह भी चाहती है कि सरकार में नेतृत्व और फैसलों में उसकी भूमिका पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा हो। यही वजह है कि शीर्ष स्तर पर यह संभावना भी जांची जा रही है कि क्या किसी नए चेहरे को आगे कर पार्टी सत्ता में ज्यादा प्रभावी हिस्सेदारी ले सकती है।
हालांकि आधिकारिक रूप से भाजपा ने ऐसा कोई संकेत नहीं दिया है, लेकिन अंदरखाने से आ रही सूचनाओं के मुताबिक पार्टी नेतृत्व नीतीश के नाम पर “फौरन आखिरी मुहर” लगाने से बचता दिख रहा है। यह स्थिति ही “सीएम फेस पर तकरार” की बड़ी वजह बन गई है।
पटना में हलचल—जदयू सतर्क, एनडीए विधायक इंतजार में
इधर पटना में जदयू ने अपने विधायकों को एकजुट रखा है और पार्टी स्पष्ट कर चुकी है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही होंगे। जदयू का मानना है कि गठबंधन का चेहरा नीतीश थे, प्रचार अभियान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनका नाम लिया था, और जनता ने वोट भी एनडीए के संयुक्त चेहरे को ध्यान में रखकर दिया है। ऐसे में नेतृत्व बदलने की चर्चा को जदयू “अनावश्यक शोर” बता रही है।
दूसरी ओर एनडीए के नए विधायक भी उत्सुकता से इंतजार कर रहे हैं कि भाजपा शीर्ष नेतृत्व आखिर क्या निर्णय लेता है। यह संकेत भी मिल रहा है कि एनडीए की संयुक्त विधायक दल की बैठक तब तक नहीं होगी, जब तक दिल्ली से अंतिम संदेश नहीं आ जाता।
अब यह चर्चा भी तेजी से फैल रही है कि भाजपा किसी “सरप्राइज फैसले” की तैयारी कर सकती है। हालांकि पार्टी इस बात से वाकिफ है कि नेतृत्व बदलने का कोई भी कदम नीतीश कुमार को नाराज कर सकता है, जिससे गठबंधन में अस्थिरता पैदा होने की आशंका है। लेकिन दूसरी ओर भाजपा को यह भी दिख रहा है कि उसकी ताकत बढ़ी है, जबकि जदयू की सीटें पहले के मुकाबले कम हुई हैं। कुछ जानकार यह भी कह रहे हैं कि भाजपा “डिप्टी सीएम पद और प्रमुख मंत्रालयों” में अधिक हिस्सेदारी चाहती है, और नेतृत्व को लेकर हो रही यह चर्चा असल में दबाव बनाने की रणनीति भी हो सकती है।
नीतीश की 10वीं शपथ या नया अध्याय?
अब पूरा बिहार इसी फैसले पर टिका है कि क्या एनडीए अपने पुराने नेतृत्व मॉडल पर चलेगा और नीतीश कुमार 10वीं बार शपथ लेंगे, या फिर इस बहुमत के साथ भाजपा कोई नया चेहरा पेश कर राजनीतिक समीकरण बदल देगी।