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Fake Helpline Number: नकली कस्टमर केयर नंबर से बढ़ रही साइबर ठगी, जानें कैसे बचें

Fake Helpline Number: नकली कस्टमर केयर नंबर के जरिए साइबर ठग लोगों से बैंक डिटेल लेकर खातों को खाली कर रहे हैं। जानें किन सेवाओं को निशाना बनाया जा रहा है और कैसे बच सकते हैं।

Fake Helpline Number

28-Sep-2025 04:01 PM

By First Bihar

Fake Helpline Number: आज के डिजिटल युग में लोग हर छोटी-बड़ी समस्या का समाधान फोन या इंटरनेट पर खोजने लगे हैं। चाहे बैंकिंग सर्विस हो, मोबाइल रिचार्ज, ई-कॉमर्स रिफंड या किसी अन्य सेवा से जुड़ा सवाल, अधिकांश लोग तुरंत गूगल पर हेल्पलाइन नंबर सर्च कर लेते हैं। लेकिन इसी आदत का फायदा साइबर ठग बड़े पैमाने पर उठा रहे हैं। एक गलत कॉल करने भर से लोगों के बैंक अकाउंट खाली हो रहे हैं और करोड़ों रुपये की ठगी का सिलसिला लगातार बढ़ रहा है।


कैसे करते हैं साइबर ठग शिकार?

साइबर अपराधी गूगल सर्च रिजल्ट्स, सोशल मीडिया या थर्ड पार्टी वेबसाइट्स पर नकली कस्टमर केयर नंबर डाल देते हैं। जब कोई व्यक्ति अपनी समस्या का समाधान खोजते हुए इन नंबरों पर कॉल करता है, तो फोन उठाने वाला खुद को कस्टमर केयर एग्जिक्यूटिव बताता है। इसके बाद वह ग्राहक से समस्या समझने के बहाने ओटीपी, डेबिट/क्रेडिट कार्ड डिटेल, यूपीआई पिन या बैंक अकाउंट की जानकारी मांग लेता है। कई मामलों में ठग यूज़र को स्क्रीन-शेयरिंग ऐप (जैसे AnyDesk, QuickSupport) इंस्टॉल करने के लिए कहते हैं। जैसे ही शिकार इन झांसे में आता है, मिनटों में उसके बैंक खाते से पैसे ट्रांसफर कर दिए जाते हैं।


अब और भी हो रहे हैं स्मार्ट

अब ये ठग सिर्फ नकली नंबर डालकर ही नहीं, बल्कि गूगल पर पेड ऐड्स चलाकर भी लोगों को फंसाने लगे हैं। चूंकि ये ऐड्स सबसे ऊपर दिखाई देते हैं, अनजान लोग इन्हें असली समझकर कॉल कर बैठते हैं। इसके अलावा, ईमेल और एसएमएस के जरिए भी फर्जी कस्टमर केयर लिंक भेजे जाते हैं। लिंक पर क्लिक करते ही मोबाइल में मैलवेयर इंस्टॉल हो जाता है, जिससे सभी जरूरी डाटा ठगों तक पहुंच जाता है।


किन सेवाओं को सबसे ज्यादा निशाना बनाया जा रहा है?

बैंक और यूपीआई सर्विसेज

ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म (Amazon, Flipkart)

मोबाइल और DTH रिचार्ज कंपनियां

ट्रैवल बुकिंग वेबसाइट्स

ई-वॉलेट और पेमेंट ऐप्स

हर दिन हजारों लोग इन नकली हेल्पलाइन नंबरों के जाल में फंसकर अपनी मेहनत की कमाई गंवा रहे हैं।



बचने के तरीके

हमेशा ऑफिशियल वेबसाइट/ऐप पर जाकर ही हेल्पलाइन नंबर देखें।

कभी भी अपना ओटीपी, यूपीआई पिन, डेबिट/क्रेडिट कार्ड डिटेल किसी के साथ साझा न करें।

स्क्रीन शेयरिंग ऐप केवल भरोसेमंद स्रोतों से और सिर्फ जरूरी होने पर ही इंस्टॉल करें।

किसी अनजान लिंक, ईमेल या एसएमएस पर क्लिक करने से बचें।

ठगी का शक होने पर तुरंत बैंक या साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें।


भारतीय साइबर सेल लगातार नकली हेल्पलाइन नंबरों को ब्लॉक करने का काम कर रही है। साथ ही, बैंकों और ई-कॉमर्स कंपनियों ने ग्राहकों को जागरूक करने के लिए नोटिफिकेशन, ईमेल अलर्ट और ऐप में वॉर्निंग मैसेज भेजने शुरू कर दिए हैं। त्योहारी सीजन हो या सामान्य दिन–साइबर ठग हर मौके का फायदा उठाने के लिए तैयार रहते हैं। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही भी आपके पूरे बैंक बैलेंस पर भारी पड़ सकती है। जागरूकता और सतर्कता ही इस तरह की साइबर ठगी से बचने का सबसे बड़ा हथियार है।

Fake Helpline Number: आज के डिजिटल युग में लोग हर छोटी-बड़ी समस्या का समाधान फोन या इंटरनेट पर खोजने लगे हैं। चाहे बैंकिंग सर्विस हो, मोबाइल रिचार्ज, ई-कॉमर्स रिफंड या किसी अन्य सेवा से जुड़ा सवाल, अधिकांश लोग तुरंत गूगल पर हेल्पलाइन नंबर सर्च कर लेते हैं। लेकिन इसी आदत का फायदा साइबर ठग बड़े पैमाने पर उठा रहे हैं। एक गलत कॉल करने भर से लोगों के बैंक अकाउंट खाली हो रहे हैं और करोड़ों रुपये की ठगी का सिलसिला लगातार बढ़ रहा है।


कैसे करते हैं साइबर ठग शिकार?

साइबर अपराधी गूगल सर्च रिजल्ट्स, सोशल मीडिया या थर्ड पार्टी वेबसाइट्स पर नकली कस्टमर केयर नंबर डाल देते हैं। जब कोई व्यक्ति अपनी समस्या का समाधान खोजते हुए इन नंबरों पर कॉल करता है, तो फोन उठाने वाला खुद को कस्टमर केयर एग्जिक्यूटिव बताता है। इसके बाद वह ग्राहक से समस्या समझने के बहाने ओटीपी, डेबिट/क्रेडिट कार्ड डिटेल, यूपीआई पिन या बैंक अकाउंट की जानकारी मांग लेता है। कई मामलों में ठग यूज़र को स्क्रीन-शेयरिंग ऐप (जैसे AnyDesk, QuickSupport) इंस्टॉल करने के लिए कहते हैं। जैसे ही शिकार इन झांसे में आता है, मिनटों में उसके बैंक खाते से पैसे ट्रांसफर कर दिए जाते हैं।


अब और भी हो रहे हैं स्मार्ट

अब ये ठग सिर्फ नकली नंबर डालकर ही नहीं, बल्कि गूगल पर पेड ऐड्स चलाकर भी लोगों को फंसाने लगे हैं। चूंकि ये ऐड्स सबसे ऊपर दिखाई देते हैं, अनजान लोग इन्हें असली समझकर कॉल कर बैठते हैं। इसके अलावा, ईमेल और एसएमएस के जरिए भी फर्जी कस्टमर केयर लिंक भेजे जाते हैं। लिंक पर क्लिक करते ही मोबाइल में मैलवेयर इंस्टॉल हो जाता है, जिससे सभी जरूरी डाटा ठगों तक पहुंच जाता है।


किन सेवाओं को सबसे ज्यादा निशाना बनाया जा रहा है?

बैंक और यूपीआई सर्विसेज

ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म (Amazon, Flipkart)

मोबाइल और DTH रिचार्ज कंपनियां

ट्रैवल बुकिंग वेबसाइट्स

ई-वॉलेट और पेमेंट ऐप्स

हर दिन हजारों लोग इन नकली हेल्पलाइन नंबरों के जाल में फंसकर अपनी मेहनत की कमाई गंवा रहे हैं।



बचने के तरीके

हमेशा ऑफिशियल वेबसाइट/ऐप पर जाकर ही हेल्पलाइन नंबर देखें।

कभी भी अपना ओटीपी, यूपीआई पिन, डेबिट/क्रेडिट कार्ड डिटेल किसी के साथ साझा न करें।

स्क्रीन शेयरिंग ऐप केवल भरोसेमंद स्रोतों से और सिर्फ जरूरी होने पर ही इंस्टॉल करें।

किसी अनजान लिंक, ईमेल या एसएमएस पर क्लिक करने से बचें।

ठगी का शक होने पर तुरंत बैंक या साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें।


भारतीय साइबर सेल लगातार नकली हेल्पलाइन नंबरों को ब्लॉक करने का काम कर रही है। साथ ही, बैंकों और ई-कॉमर्स कंपनियों ने ग्राहकों को जागरूक करने के लिए नोटिफिकेशन, ईमेल अलर्ट और ऐप में वॉर्निंग मैसेज भेजने शुरू कर दिए हैं। त्योहारी सीजन हो या सामान्य दिन–साइबर ठग हर मौके का फायदा उठाने के लिए तैयार रहते हैं। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही भी आपके पूरे बैंक बैलेंस पर भारी पड़ सकती है। जागरूकता और सतर्कता ही इस तरह की साइबर ठगी से बचने का सबसे बड़ा हथियार है।