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26-Dec-2025 06:54 PM
By FIRST BIHAR
Bihar Crime News: पटना के परसा बाजार थाना क्षेत्र से सामने आया मामला केवल दो अपराधियों की गिरफ्तारी भर नहीं है, बल्कि यह संगठित पारिवारिक अपराध की एक खतरनाक तस्वीर पेश करता है। कुख्यात अपराधी छोटू नट और उसके सहयोगी गोविंद कुमार की गिरफ्तारी के बाद पुलिस जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे कानून व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक छोटू नट का परिवार वर्षों से डकैती, लूट और चोरी को व्यवसाय की तरह अंजाम देता आ रहा था। परिवार के सदस्य अलग-अलग भूमिकाओं में बंटे हुए थे। कोई रेकी करता था, कोई वारदात को अंजाम देता था और कोई लूट के माल को ठिकाने लगाता था। यही वजह है कि इस गिरोह की जड़ें कई थानों और जिलों तक फैली हुई थीं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि महिलाएं भी इस आपराधिक नेटवर्क का सक्रिय हिस्सा थीं। छोटू नट की पत्नी पहले भी जेल जा चुकी है, जबकि उसके पिता और साले समेत परिवार के अन्य सदस्य भी डकैती और लूट के मामलों में नामजद हैं। अपराध यहां व्यक्तिगत नहीं, बल्कि परिवार की सामूहिक रणनीति बन चुका था।
पुलिस पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ है कि यह गिरोह घरों को निशाना बनाने से पहले पूरी प्लानिंग और लोकेशन सर्वे करता था। कौन सा घर बंद है, किस इलाके में पुलिस की गश्त कम है—इन सबका आकलन करने के बाद ही वारदात को अंजाम दिया जाता था। यही वजह रही कि यह गिरोह लंबे समय तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहा।
इस पूरे मामले में एक और अहम पहलू सामने आया है—अवैध संपत्ति। छोटू नट के पास तीन से चार मंजिला पक्का मकान होने की जानकारी पुलिस को मिली है, लेकिन उसकी आय का कोई वैध स्रोत अब तक सामने नहीं आया है। अब पुलिस इस संपत्ति की वित्तीय जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश में जुटी है कि अपराध की कमाई कहां-कहां निवेश की गई।
यह मामला सिर्फ कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि सामाजिक विफलता का भी उदाहरण है, जहां अपराध पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ता गया। सवाल यह भी उठता है कि आखिर कब तक ऐसे संगठित पारिवारिक गिरोह शहर और जिले की सुरक्षा के लिए चुनौती बने रहेंगे। पुलिस का दावा है कि इस गिरोह की गिरफ्तारी से जिले में डकैती और लूट की कई अनसुलझी वारदातों का खुलासा हो सकता है। आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।