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24-Jan-2025 10:24 PM
By FIRST BIHAR
SUCCESS STORY: आजकल की लड़कियां किसी से कम नहीं हैं। इस बात को साबित कर दिया है बिहार के नवादा जिले के पाकरीबरावां गांव की रहने वाली दो बहनों ने, पूजा और प्रिया कुमारी की कहानी है मेहनत, लगन और सपनों को साकार करने की। आलू बेचकर अपनी बेटियों को पढ़ाने वाले पिता के सपने को साकार करते हुए आज दोनों बहनें दारोगा बन गईं हैं।
गांव के सरकारी स्कूल से अपनी पढ़ाई शुरू करने वाली पूजा और प्रिया ने कृषक कॉलेज से इंटर और ग्रेजुएशन किया। आर्थिक तंगी के बावजूद, उन्होंने कभी हार नहीं मानी। गांव से ही पढ़कर उन्होंने वो मुकाम हासिल किया जिसके लिए बड़े शहरों के कॉलेज जाने की जरूरत नहीं होती।
कॉलेज के बाद दोनों बहनें अपने ननिहाल नवादा चली गईं। उनके मामा टिंकू साव ने हर कदम पर उनका साथ दिया। उनकी प्रेरणा और मदद के बिना ये मुकाम पाना मुश्किल होता। आज दोनों बहनें अपनी सफलता का श्रेय अपने मामा को देती हैं।
छोटी बहन पूजा ने पहले प्रयास में ही दारोगा बनने का सपना पूरा किया, जबकि प्रिया ने दूसरे प्रयास में सफलता हासिल की। दोनों बहनें एक साथ दारोगा बनकर पूरे गांव के लिए मिसाल बन गई हैं। उनकी सफलता से गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। पूजा और प्रिया की सफलता बताती है कि अगर दृढ़ इच्छा शक्ति हो तो कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
SUCCESS STORY: आजकल की लड़कियां किसी से कम नहीं हैं। इस बात को साबित कर दिया है बिहार के नवादा जिले के पाकरीबरावां गांव की रहने वाली दो बहनों ने, पूजा और प्रिया कुमारी की कहानी है मेहनत, लगन और सपनों को साकार करने की। आलू बेचकर अपनी बेटियों को पढ़ाने वाले पिता के सपने को साकार करते हुए आज दोनों बहनें दारोगा बन गईं हैं।
गांव के सरकारी स्कूल से अपनी पढ़ाई शुरू करने वाली पूजा और प्रिया ने कृषक कॉलेज से इंटर और ग्रेजुएशन किया। आर्थिक तंगी के बावजूद, उन्होंने कभी हार नहीं मानी। गांव से ही पढ़कर उन्होंने वो मुकाम हासिल किया जिसके लिए बड़े शहरों के कॉलेज जाने की जरूरत नहीं होती।
कॉलेज के बाद दोनों बहनें अपने ननिहाल नवादा चली गईं। उनके मामा टिंकू साव ने हर कदम पर उनका साथ दिया। उनकी प्रेरणा और मदद के बिना ये मुकाम पाना मुश्किल होता। आज दोनों बहनें अपनी सफलता का श्रेय अपने मामा को देती हैं।
छोटी बहन पूजा ने पहले प्रयास में ही दारोगा बनने का सपना पूरा किया, जबकि प्रिया ने दूसरे प्रयास में सफलता हासिल की। दोनों बहनें एक साथ दारोगा बनकर पूरे गांव के लिए मिसाल बन गई हैं। उनकी सफलता से गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। पूजा और प्रिया की सफलता बताती है कि अगर दृढ़ इच्छा शक्ति हो तो कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।