1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 12, 2026, 7:49:12 AM
- फ़ोटो
BIHAR NEWS : बिहार सरकार ने राज्य में खनिज परिवहन को पारदर्शी और नियंत्रित बनाने के लिए एक नई अहम पहल की घोषणा की है। अब राज्य में अन्य राज्यों से आने वाले बालू, पत्थर, स्टोन चिप्स, मोरम और स्टोन डस्ट जैसे लघु खनिजों से लदे वाहनों के लिए ट्रांजिट पास (टीपी) लेना अनिवार्य कर दिया गया है। यह कदम उपमुख्यमंत्री और खान एवं भूतत्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा के निर्देश पर लागू किया गया है और इसे बिहार खनिज नियमावली, 2019 (संशोधित) के नियम 41 के तहत लागू किया गया है।
इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य खनिज परिवहन को पारदर्शी बनाना, अवैध खनन और परिवहन पर रोक लगाना और राज्य के राजस्व में वृद्धि करना है। पिछले कुछ वर्षों में बिहार में अवसंरचना और सड़क निर्माण के कामों में तेजी आने के कारण पड़ोसी राज्यों से खनिजों की बड़ी मात्रा में आयात हो रहा है। इसी के मद्देनजर राज्य सरकार ने खनिज परिवहन पर कड़ी निगरानी रखने का फैसला किया है।
ट्रांजिट पास प्रणाली के तहत नियम और शुल्क:
नई व्यवस्था के अनुसार, बिहार की सीमा में प्रवेश करने वाले सभी खनिज लदे वाहनों को डिजिटल ट्रांजिट पास लेना अनिवार्य होगा। वाहन चालकों को यह ट्रांजिट पास वाहन के चालान के आधार पर प्राप्त करना होगा। यदि चालान में खनिज का वजन अंकित है, तो प्रति मीट्रिक टन 60 रुपये का शुल्क देना होगा। वहीं, यदि चालान में खनिज का आयतन (Volume) दर्ज है, तो प्रति घनमीटर 85 रुपये का शुल्क निर्धारित किया गया है।
इस डिजिटल ट्रांजिट पास प्रणाली का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इससे खनिज परिवहन पर सटीक निगरानी की जा सकेगी। राज्य में प्रवेश करने वाले प्रत्येक वाहन का डिजिटल अनुश्रवण (Tracking) किया जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि कोई भी वाहन किसी एक ही चालान पर बार-बार खनिज न ला सके। इस तरह की अनियमितताओं पर कड़ा नियंत्रण किया जा सकेगा और अवैध खनन एवं परिवहन पर रोक लगाई जा सकेगी।
सीमावर्ती जिलों और निगरानी व्यवस्था:
सरकार ने सीमावर्ती जिलों की जिम्मेदारी बढ़ा दी है। अब इन जिलों में खनिज लदे वाहनों की सख्त निगरानी की जाएगी। इसके लिए राज्य की सीमा पर सीसीटीवी कैमरे और निगरानी उपकरण लगाए जाएंगे। किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस पहल से न केवल अवैध खनन पर नियंत्रण होगा बल्कि खनिज परिवहन की पूरी प्रक्रिया तकनीक आधारित और पारदर्शी बनेगी।
सरकार का मानना है कि यह कदम खनिज परिवहन में सुधार लाएगा और राज्य के राजस्व संग्रह में बढ़ोतरी करेगा। पहले, कई बार एक ही चालान के आधार पर कई वाहन खनिज ले जाते थे, जिससे अवैध खनन और परिवहन को बढ़ावा मिलता था। नई डिजिटल ट्रांजिट पास प्रणाली इस समस्या का समाधान करेगी।
लाभ और प्रभाव:
अवैध खनन और परिवहन पर नियंत्रण – अब प्रत्येक वाहन का वजन और आयतन डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज होगा।
राजस्व में वृद्धि – निर्धारित शुल्क के माध्यम से राज्य को स्थायी राजस्व प्राप्त होगा।
पारदर्शिता – हर खनिज वाहन का डिजिटल अनुश्रवण होगा और किसी भी स्तर पर गड़बड़ी पर तुरंत कार्रवाई संभव होगी।
सीमावर्ती जिलों में निगरानी मजबूत – सीसीटीवी और अन्य तकनीकी उपकरणों से हर वाहन की निगरानी की जाएगी।
सुधारित खनिज परिवहन व्यवस्था – तकनीक आधारित प्रणाली से राज्य में खनिज वितरण अधिक नियंत्रित और व्यवस्थित होगा।
सरकार का संदेश
उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा है कि राज्य में खनिज परिवहन को पूरी तरह पारदर्शी बनाना हमारी प्राथमिकता है। इस नई व्यवस्था से न केवल अवैध खनन पर अंकुश लगेगा, बल्कि खनिज व्यापार में तकनीक आधारित सुधार आएगा। सीमावर्ती जिलों और अधिकारियों की जिम्मेदारी बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार इस पहल के सफल कार्यान्वयन के लिए कड़ी निगरानी रखेगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
इस पहल के लागू होने से बिहार में खनिज परिवहन में नए दौर की शुरुआत होगी। अब हर वाहन को डिजिटल ट्रांजिट पास के माध्यम से दर्ज किया जाएगा और राज्य में खनिज व्यापार अधिक नियंत्रित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनेगा। इससे न केवल खनिज परिवहन में सुधार आएगा बल्कि राज्य सरकार का राजस्व संग्रह भी मजबूत होगा।
इस नई व्यवस्था के माध्यम से बिहार सरकार ने यह संदेश दिया है कि राज्य में अवैध खनन और खनिज परिवहन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी वाहन चालकों और खनिज व्यापारियों को निर्देशित किया गया है कि वे नियमों का पालन करें और ट्रांजिट पास प्रणाली के अनुसार काम करें। यह कदम खनिज क्षेत्र में जिम्मेदार और पारदर्शी प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।