ब्रेकिंग
पटना में जाम से त्राहिमाम, शपथ ग्रहण और पीएम मोदी के रोड शो को लेकर कई रूट डायवर्ट; लोगों की बढ़ी परेशानीबिहार कैबिनेट विस्तार: कौन हैं इंजीनियर कुमार शैलेंद्र? जो सम्राट सरकार में बनने जा रहे मंत्रीशपथ ग्रहण से पहले पूर्व सीएम नीतीश कुमार पर रोहिणी आचार्य का तीखा तंज, बीजेपी को भी घेराबिहार कैबिनेट विस्तार: कौन हैं डॉ. श्वेता गुप्ता? जो पहली बार बनने जा रही हैं मंत्री, कई नए चेहरों को मौकाकैबिनेट विस्तार से पहले बजरंगबली के दरबार में शाह-सम्राट: पटना के राजवंशी नगर हनुमान मंदिर में की पूजा-अर्चनापटना में जाम से त्राहिमाम, शपथ ग्रहण और पीएम मोदी के रोड शो को लेकर कई रूट डायवर्ट; लोगों की बढ़ी परेशानीबिहार कैबिनेट विस्तार: कौन हैं इंजीनियर कुमार शैलेंद्र? जो सम्राट सरकार में बनने जा रहे मंत्रीशपथ ग्रहण से पहले पूर्व सीएम नीतीश कुमार पर रोहिणी आचार्य का तीखा तंज, बीजेपी को भी घेराबिहार कैबिनेट विस्तार: कौन हैं डॉ. श्वेता गुप्ता? जो पहली बार बनने जा रही हैं मंत्री, कई नए चेहरों को मौकाकैबिनेट विस्तार से पहले बजरंगबली के दरबार में शाह-सम्राट: पटना के राजवंशी नगर हनुमान मंदिर में की पूजा-अर्चना

Bihar gas crisis : बिहार में गैस सिलेंडर को लेकर भटक रहे लोग, केवाईसी नियम ने बढ़ाई जनता की परेशानी; सुबह से ही गैस एजेंसियों के बाहर लंबी लाइन

बिहार में रसोई गैस सिलेंडर की कमी, केवाईसी बाध्यता ने परिवारों की मुश्किलें बढ़ाईं। गोपालगंज और शहरों में लोग सुबह से लाइन में खड़े।

Bihar gas crisis : बिहार में गैस सिलेंडर को लेकर भटक रहे लोग, केवाईसी नियम ने बढ़ाई जनता की परेशानी; सुबह से ही गैस एजेंसियों के बाहर लंबी लाइन
Tejpratap
Tejpratap
4 मिनट

बिहार में रसोई गैस सिलेंडर की कमी ने आम जनता की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गोपालगंज समेत कई जिलों में लोग सुबह से ही गैस एजेंसियों के बाहर लाइन में खड़े नजर आ रहे हैं। कुछ लोगों ने बताया कि वे लगातार तीन दिनों से सिलेंडर लेने आए हैं, लेकिन गैस उपलब्ध नहीं हो रही। कुछ घरों में शादी जैसी खास मौके पर भी सिलेंडर नहीं मिलने की वजह से लोग परेशान हैं। हॉस्टल संचालक भी स्थिति से चिंतित हैं और उनका कहना है कि सरकार को इस समस्या को हल करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।


इस सिलेंडर संकट के पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण हाल में लागू नया केवाईसी नियम है। इसके तहत अब रसोई गैस सिलेंडर के लिए उपभोक्ताओं का केवाईसी करना अनिवार्य है। केवाईसी के लिए आधार कार्ड के साथ वास्तविक उपभोक्ता की मौजूदगी जरूरी है। यह नियम विशेष रूप से उन परिवारों के लिए परेशानी का कारण बन गया है, जिनके सदस्य बाहर रहते हैं।


हालांकि पहले लोग अपने रजिस्टर्ड नंबर से आसानी से सिलेंडर बुक कर लेते थे और समय पर सिलेंडर मिल जाता था, लेकिन अब केवाईसी की बाध्यता ने इस प्रक्रिया को जटिल बना दिया है। जिन लोगों ने अभी तक केवाईसी नहीं कराया है, उनकी संख्या अब भी 50 प्रतिशत से ज्यादा है। ऐसे उपभोक्ता, जिनके सदस्य शहर या राज्य से बाहर रहते हैं, उन्हें सिलेंडर पाने के लिए बार-बार वितरण केंद्र का चक्कर लगाना पड़ रहा है।


कई उपभोक्ता इस समस्या से परेशान हैं कि उनके नाम पर कनेक्शन है, लेकिन वास्तविक उपभोक्ता के बिना केवाईसी पूरा नहीं हो रहा। एजेंसियां उपभोक्ताओं को बुलाने के लिए कह रही हैं, जिससे परिवारों में असमंजस और बढ़ रहा है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि केंद्र पर उपभोक्ताओं और एजेंसी कर्मचारियों के बीच हो-हल्ला भी देखने को मिल रहा है।


इसके अलावा परिवार के किसी मृत सदस्य के नाम पर कनेक्शन ट्रांसफर करने के लिए एजेंसियां मृत्यु प्रमाण पत्र की मांग करती हैं, जो कई परिवारों के लिए अतिरिक्त झंझट बन गया है। इस वजह से सिलेंडर वितरण केंद्र पर अक्सर तनावपूर्ण माहौल बन जाता है।


शहर के कई हिस्सों में पाइपलाइन से गैस की आपूर्ति हो रही है। ऐसे उपभोक्ताओं की संख्या भी काफी अधिक है, और इनमें कई ने अपना कनेक्शन सिलेंडर तक कर दिया है। अब आपूर्ति में किसी भी तरह की बाधा आने का संशय इन्हें अलग ही परेशान कर रहा है।


विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को इस संकट को कम करने के लिए आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करनी होगी और केवाईसी नियम को सरल बनाना होगा, ताकि वास्तविक उपभोक्ता को बार-बार केंद्रों पर आने की जरूरत न पड़े। साथ ही, डिजिटल या ऑनलाइन केवाईसी विकल्प को अधिक सुलभ बनाया जाए, ताकि बाहर रहने वाले परिवार भी आसानी से नियम का पालन कर सकें।


वर्तमान में स्थिति यह है कि गोपालगंज जैसे शहरों में लोग सुबह 4 बजे से ही सिलेंडर के लिए लाइन में खड़े रहते हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि जनता को गैस उपलब्ध कराने में एजेंसियों और सरकार को तुरंत कदम उठाने की जरूरत है। घरों में खाना बनाने से लेकर हॉस्टलों में छात्रों की सुविधा तक, हर जगह इस संकट का असर महसूस किया जा रहा है।


इस सिलेंडर संकट ने बिहार में लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित किया है। अगर सरकार और संबंधित एजेंसियां जल्द समाधान नहीं निकालती हैं, तो सिलेंडर की किल्लत और बढ़ सकती है, जिससे आम जनता की परेशानियां और गंभीर रूप ले सकती हैं।

संबंधित खबरें