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Patna Ultra Pods : 'लंदन का मजा अब पटना में ...', मेट्रो के बाद अब एक और नया कमाल; अब चुटकी बाजते पहुंच जाएंगे ऑफिस; पढ़िए क्या है नई सुविधा

पटना में मेट्रो के बाद अब अल्ट्रा पॉड्स ट्रांसपोर्ट सिस्टम शुरू करने की तैयारी है। 296 करोड़ की इस परियोजना से सचिवालय परिसर और प्रशासनिक भवन जुड़ेंगे।

Patna Ultra Pods : 'लंदन का मजा अब पटना में ...', मेट्रो के बाद अब एक और नया कमाल; अब चुटकी बाजते पहुंच जाएंगे ऑफिस; पढ़िए क्या है नई सुविधा
Tejpratap
Tejpratap
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Patna Ultra Pods : राजधानी पटना में मेट्रो के बाद अब एक और आधुनिक और हाईटेक परिवहन व्यवस्था शुरू करने की तैयारी हो रही है। बिहार सरकार शहर में अल्ट्रा पॉड्स ट्रांसपोर्ट सिस्टम लागू करने की योजना पर काम कर रही है। इस अत्याधुनिक प्रणाली के जरिए पुराने सचिवालय परिसर और उसके आसपास स्थित प्रमुख प्रशासनिक भवनों को आपस में जोड़ा जाएगा। इससे अधिकारियों, कर्मचारियों और आम लोगों को तेज, सुरक्षित और ट्रैफिक मुक्त आवागमन की सुविधा मिल सकेगी।


प्रस्तावित योजना के तहत यह प्रणाली पर्सनल रैपिड ट्रांजिट (PRT) तकनीक पर आधारित होगी। इसमें छोटे कैप्सूलनुमा वाहन यानी पॉड्स एक विशेष ट्रैक पर बिना ड्राइवर के ऑटोमैटिक तरीके से चलेंगे। ये पॉड्स यात्रियों को कम समय में एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में सक्षम होंगे। इस प्रणाली की खासियत यह होगी कि इसमें यात्रा लगभग नॉन-स्टॉप होगी, यानी यात्रियों को बीच-बीच में अनावश्यक रुकावटों का सामना नहीं करना पड़ेगा और वे सीधे अपने तय गंतव्य तक पहुंच सकेंगे।


इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर सोमवार को मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी लार्सन एंड टूब्रो (एल एंड टी) की टीम के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में कंपनी की ओर से अल्ट्रा पॉड्स परियोजना की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की गई। योजना का उद्देश्य प्रशासनिक परिसरों के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना और कार्यालय समय के दौरान होने वाली भीड़ व ट्रैफिक दबाव को कम करना है।


करीब 296 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाली इस परियोजना के तहत लगभग 5 किलोमीटर लंबा ट्रैक बनाया जाएगा। प्रस्तावित रूट विश्वेश्वरैया भवन से शुरू होकर विकास भवन और विधानसभा होते हुए पुराने सचिवालय परिसर तक जाएगा। प्रशासनिक मंजूरी मिलने के बाद इस परियोजना को करीब 15 महीनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।


परियोजना के तहत कुल 59 पॉड्स चलाने का प्रस्ताव है। प्रत्येक पॉड में छह यात्रियों के बैठने की व्यवस्था होगी। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए हर सात सेकंड के अंतराल पर अगला पॉड स्टेशन पर उपलब्ध रहेगा। इससे लोगों को ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा और आवागमन काफी तेज और सुगम हो जाएगा। खासकर सुबह और शाम के कार्यालय समय में सरकारी भवनों के बीच आने-जाने वाले कर्मचारियों को इससे काफी राहत मिलने की उम्मीद है।


इस परियोजना के पहले चरण में कुल 9 स्टेशन बनाए जाने की योजना है। इनमें से दो स्टेशनों के पास पार्किंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी ताकि लोग अपनी गाड़ी पार्क कर आसानी से पॉड्स सेवा का उपयोग कर सकें। पूरे नेटवर्क के संचालन और निगरानी के लिए एक अत्याधुनिक कंट्रोल रूम स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा पॉड्स के रखरखाव और संचालन के लिए अलग से पार्किंग और ऑपरेशन सुविधा भी विकसित की जाएगी।


सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी पॉड्स में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे और पूरी प्रणाली आधुनिक ऑटोमैटिक सिस्टम से संचालित होगी। यह पूरी व्यवस्था इलेक्ट्रिक आधारित होगी, जिससे प्रदूषण भी कम होगा और पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचेगा।


अल्ट्रा पॉड दरअसल एक छोटी ड्राइवरलेस इलेक्ट्रिक गाड़ी होती है, जो अलग ट्रैक पर चलती है। इसमें छोटे-छोटे कैप्सूल जैसे वाहन होते हैं जो यात्रियों को जल्दी, सुरक्षित और बिना ट्रैफिक के उनके गंतव्य तक पहुंचाते हैं। हर कुछ सेकंड में अगला पॉड उपलब्ध होने से लोगों को इंतजार करने की जरूरत नहीं पड़ती।


कुल मिलाकर यह प्रणाली पटना की परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है। यदि यह परियोजना सफल होती है तो आने वाले समय में शहर के अन्य हिस्सों में भी इस तरह की हाईटेक परिवहन व्यवस्था विकसित की जा सकती है। इससे राजधानी पटना में स्मार्ट और सुगम यातायात व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।

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