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Success Story: कौन हैं IAS सौम्या झा? जिन्होंने ‘पढ़ाई विद AI’ से रचा इतिहास, बच्चों के सीखने का तरीका बदला; जानिए...

Success Story: IAS सौम्या झा ने राजस्थान के टोंक जिले में कलेक्टर रहते हुए 'पढ़ाई विद AI' पहल शुरू कर सरकारी स्कूलों की शिक्षा पद्धति में क्रांतिकारी बदलाव किया। MBBS के बाद UPSC टॉप करने वाली सौम्या की यह पहल देशभर में सराही जा रही है।

29-Jul-2025 11:58 AM

By First Bihar

Success Story: राजस्थान के टोंक जिले की पूर्व कलेक्टर और 2016 बैच की आईएएस अधिकारी सौम्या झा आज देशभर में अपनी कार्यशैली और नवाचार के लिए पहचानी जा रही हैं। उन्होंने न केवल प्रशासनिक कामों में अपनी दक्षता दिखाई, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के इस्तेमाल से एक नई क्रांति की शुरुआत कर दी। “पढ़ाई विद AI” नामक योजना के जरिए उन्होंने सरकारी स्कूलों में पढ़ाई को न सिर्फ दिलचस्प बनाया, बल्कि उसे तकनीक से जोड़कर बच्चों और शिक्षकों दोनों के लिए ज्यादा प्रभावी भी बना दिया।


बिहार में जन्मीं और मध्य प्रदेश में पली-बढ़ीं सौम्या झा ने दिल्ली के मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू की और पहले ही प्रयास में साल 2016 में ऑल इंडिया रैंक 58 हासिल कर आईएएस अफसर बनीं। उनका परिवार भी खासा प्रेरणादायक है — उनके पिता IPS अधिकारी हैं और मां रेलवे में डॉक्टर हैं।


आईएएस बनने के बाद शुरुआत में उन्हें हिमाचल प्रदेश कैडर मिला, लेकिन बाद में उनका ट्रांसफर राजस्थान हो गया। यहाँ उन्होंने जयपुर जिला परिषद की सीईओ, उदयपुर और गिर्वा की एसडीएम, और फिर टोंक जिले की कलेक्टर के रूप में काम किया। वे राजस्थान के मुख्यमंत्री कार्यालय में जॉइंट सेक्रेटरी के रूप में भी सेवाएं दे चुकी हैं।


टोंक में कलेक्टर रहते हुए सौम्या झा ने 2024 में “पढ़ाई विद AI” पहल की शुरुआत की। इस योजना के तहत स्कूलों में AI-बेस्ड लर्निंग टूल्स जैसे कि इंटरैक्टिव ऐप्स, चैटबॉट्स और विज़ुअल लर्निंग प्लेटफॉर्म का प्रयोग किया गया, जिससे बच्चों की समझ और रुचि दोनों में सुधार आया। उन्होंने कहा, “बच्चों को सपनों तक पहुंचाने का रास्ता स्कूल की क्लासरूम से होकर गुजरता है। सही माहौल और तकनीक मिले तो वे भी बड़ा सोच सकते हैं।”


इसके साथ ही उन्होंने अवैध स्लॉटर हाउस के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर प्रशासनिक स्तर पर भी कई मजबूत फैसले लिए। उनकी कार्यकुशलता, दूरदृष्टि और समाज के प्रति संवेदनशीलता की वजह से न केवल जनता में उनकी लोकप्रियता बढ़ी, बल्कि वे देश की सबसे प्रभावशाली महिला अधिकारियों में गिनी जाने लगीं।


सौम्या झा की यह कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सामाजिक परिवर्तन लाने और तकनीक के ज़रिए शिक्षा को सशक्त बनाने का सपना देखते हैं। एक डॉक्टर से कलेक्टर तक की यह यात्रा बताती है कि अगर जज़्बा हो, तो हर क्षेत्र में बदलाव संभव है।