Bihar Teacher News : हेडमास्टर साहब टीचर से कर रहे थे अवैध वसूली, DEO ने जारी किया नोटिस; पढ़िए क्या है पूरी खबर

मुजफ्फरपुर जिले के सरैया प्रखंड में एक गंभीर भ्रष्टाचार मामला सामने आया है। उत्क्रमित मध्य विद्यालय लक्ष्मीपुर अरार के प्रधानाध्यापक विनोद कुमार पर शिक्षकों से अवैध धन वसूलने का आरोप लगा है।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Wed, 07 Jan 2026 10:22:17 AM IST

Bihar Teacher News : हेडमास्टर साहब टीचर से कर रहे थे अवैध वसूली, DEO ने जारी किया नोटिस; पढ़िए क्या है पूरी खबर

- फ़ोटो AI PHOTO

Bihar Teacher News : मुजफ्फरपुर जिले के शिक्षा विभाग में एक बार फिर से भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है, जिसने जिले में हड़कंप मचा दिया है। सरैया प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय लक्ष्मीपुर अरार के प्रधानाध्यापक विनोद कुमार पर शिक्षकों से अवैध धन उगाही करने का आरोप लगा है। मामला तब उजागर हुआ जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें प्रधानाध्यापक कथित तौर पर शिक्षकों से पैसे लेते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस घटना के बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) कुमार अरविन्द सिन्हा ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रधानाध्यापक को नोटिस जारी किया है और उनसे 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है।


पूरे मामले की कहानी

मामला सरैया प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय लक्ष्मीपुर अरार का है। जानकारी के अनुसार, प्रधानाध्यापक विनोद कुमार ने शिक्षकों से उनकी चल-अचल संपत्ति का विवरण और अनुपस्थिति विवरणी जमा कराने के नाम पर 300 रुपये प्रति शिक्षक की मांग की। इस प्रक्रिया को औपचारिक दिखाने के लिए शिक्षकों से दस्तावेज मांगे गए और पैसे लेने का वीडियो भी बना लिया गया। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि प्रधानाध्यापक ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अवैध राशि वसूली।


इस वीडियो के वायरल होने के बाद जिला शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया। DEO कुमार अरविन्द सिन्हा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 5 जनवरी 2026 को पत्रांक-25 जारी कर प्रधानाध्यापक से तत्काल स्पष्टीकरण मांगा। नोटिस में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया कि वीडियो में दिख रहे साक्ष्य प्रथम दृष्टया प्रमाणित करते हैं कि प्रधानाध्यापक ने सरकारी पद का दुरुपयोग किया है और शिक्षकों से अवैध उगाही की है।


आचार संहिता और नियमों का उल्लंघन

शिक्षा विभाग ने बताया कि प्रधानाध्यापक का यह कृत्य सरकारी कर्मचारी आचार संहिता-1976 का उल्लंघन है। विभाग की ओर से पहले ही सभी शिक्षकों को अपनी संपत्ति का विवरण कंप्यूटराइज्ड फॉर्मेट में जमा करने का निर्देश दिया गया था। इस प्रक्रिया के लिए कोई शुल्क निर्धारित नहीं है। ऐसे में प्रधानाध्यापक द्वारा राशि की मांग पूरी तरह अवैध मानी जा रही है। नोटिस में स्पष्ट किया गया कि यह स्वेच्छाचारिता और कर्तव्यों की अनदेखी है।


शिक्षकों से पैसे वसूलने का यह मामला जिले में अन्य स्कूलों के लिए भी चेतावनी बन गया है। शिक्षा विभाग ने कहा है कि किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार, अनुशासनहीनता या पद का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। DEO ने स्पष्ट किया कि यदि प्रधानाध्यापक संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं देते हैं, तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।


DEO की त्वरित कार्रवाई और संदेश

जिला शिक्षा पदाधिकारी ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को सख्त संदेश दिया है कि सरकारी नियमों और प्रक्रियाओं का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग भ्रष्टाचार के किसी भी रूप को सहन नहीं करेगा। DEO ने प्रधानाध्यापक को निर्देश दिया कि वे कार्यालय में स्वयं उपस्थित होकर अपने स्पष्टीकरण के साथ 24 घंटे के भीतर जवाब दें।


मामले के उजागर होने के बाद जिले में अन्य विद्यालयों के शिक्षक भी सतर्क हो गए हैं। विभाग ने यह सुनिश्चित करने का भी आदेश दिया है कि आगे से कोई भी कर्मचारी अवैध धन वसूली या अनुचित व्यवहार न करे। शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि इस प्रकार के मामले शिक्षा व्यवस्था की साख पर प्रश्न उठाते हैं और इसलिए इन्हें गंभीरता से लिया जा रहा है।


यह मामला यह भी दर्शाता है कि सोशल मीडिया अब शिक्षा विभाग और प्रशासनिक मामलों में पारदर्शिता लाने का एक शक्तिशाली माध्यम बन गया है। वायरल हुए वीडियो ने तुरंत अधिकारियों की नजर में इस कृत्य को लाया और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की। इस घटना से अन्य शिक्षकों और कर्मचारियों के बीच स्पष्ट संदेश गया कि गलत काम सार्वजनिक होने पर सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।


इस पूरे प्रकरण ने यह साफ कर दिया है कि शिक्षा विभाग भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाए हुए है। प्रधानाध्यापक विनोद कुमार की कार्रवाई से यह भी स्पष्ट हो गया कि विभाग नियमों और आचार संहिता का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ तुरंत कदम उठाने के लिए तैयार है। अब सभी की निगाहें इस पर टिकी हैं कि 24 घंटे के भीतर प्रधानाध्यापक अपने स्पष्टीकरण में क्या प्रस्तुत करते हैं और शिक्षा विभाग अगली कार्रवाई में कितनी कड़ी नीति अपनाता है।