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18-Feb-2025 01:07 PM
By First Bihar
टेस्ला ने 17 फरवरी को LinkedIn पर 13 पदों के लिए भर्तियों का ऐलान किया, जिसमें कस्टमर सर्विस और बैकएंड ऑपरेशंस से जुड़े पद शामिल हैं। यह कदम इस ओर इशारा करता है कि मस्क अब भारतीय बाजार में टेस्ला की एंट्री को लेकर पूरी तरह गंभीर हैं। इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान, मस्क ने उनसे मुलाकात की थी और भारत में निवेश को लेकर सकारात्मक संकेत दिए थे।
इंपोर्ट ड्यूटी में राहत से आसान हुई राह
अब तक टेस्ला की भारत में एंट्री में सबसे बड़ी बाधा थी – उच्च आयात शुल्क (Import Duty)। टेस्ला लगातार भारत सरकार से इस शुल्क को कम करने की मांग कर रही थी। अब, 40,000 डॉलर (लगभग 35 लाख रुपये) से अधिक कीमत वाली कारों पर इंपोर्ट ड्यूटी 110% से घटाकर 70% कर दी गई है, जिससे टेस्ला के लिए भारतीय बाजार में प्रवेश करना अधिक आकर्षक हो गया है।
फैक्ट्री के लिए जगह की तलाश, महाराष्ट्र-गुजरात रेस में आगे
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, टेस्ला भारत में केवल गाड़ियां बेचने ही नहीं, बल्कि एक मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने की भी योजना बना रही है। कंपनी ऑटोमोटिव हब वाले राज्यों में ज़मीन की तलाश कर रही है, जिसमें महाराष्ट्र, गुजरात और तमिलनाडु सबसे आगे हैं। यदि यह फैक्ट्री स्थापित होती है, तो भारत इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) मैन्युफैक्चरिंग में एक वैश्विक हब बनने की दिशा में बड़ा कदम उठा सकता है।
डोनाल्ड ट्रम्प और मस्क की नई जिम्मेदारी
टेस्ला के भारत में प्रवेश की खबरों के बीच, अमेरिका में भी मस्क सुर्खियों में हैं। अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने नवंबर में चुनाव जीतने के बाद "डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी (DoGE)" नाम से एक नया विभाग बनाने की घोषणा की, जिसका नेतृत्व इलॉन मस्क और भारतवंशी बिजनेसमैन विवेक रामास्वामी को सौंपा गया था। हालांकि, बाद में विवेक को इस जिम्मेदारी से हटा दिया गया।
शेयर बाजार में टेस्ला की धुआंधार रफ्तार
टेस्ला का शेयर बीते एक साल में 83.65% चढ़ चुका है और फिलहाल इसका मूल्य $355.84 है। कंपनी का कुल मार्केट कैप 1.12 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 97.37 लाख करोड़ रुपये) है, जो इसे दुनिया की सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों में शामिल करता है।
क्या टेस्ला भारत में गेम चेंजर साबित होगी?
टेस्ला की भारत एंट्री से इलेक्ट्रिक कार इंडस्ट्री को जबरदस्त बूस्ट मिल सकता है। घरेलू कंपनियों टाटा, महिंद्रा और ओला इलेक्ट्रिक को टेस्ला से कड़ी टक्कर मिलेगी, लेकिन यह प्रतिस्पर्धा भारतीय उपभोक्ताओं के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। अब देखना यह है कि टेस्ला सिर्फ इंपोर्टेड कारें लाती है या भारतीय बाजार के लिए खास लोकल मैन्युफैक्चरिंग की भी घोषणा करती है। लेकिन इतना तय है कि भारत में इलेक्ट्रिक कारों का भविष्य अब और भी रोमांचक होने जा रहा है।