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राज्यसभा चुनाव को लेकर तेजस्वी और ओवैसी के बीच डील की चर्चा, अख्तरुल ने शुभ संकेत बताया

बिहार राज्यसभा चुनाव को लेकर तेजस्वी यादव और AIMIM के बीच बातचीत हुई। बैठक के बाद अख्तरुल ईमान ने इसे सकारात्मक बताया। आरजेडी उम्मीदवार की जीत के लिए AIMIM और बसपा के समर्थन पर नजर।

11-Mar-2026 08:40 PM

By First Bihar

PATNA:16 मार्च को बिहार में होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई हैं। बिहार विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के बीच संभावित समझौते की चर्चा जोर पकड़ ली है। इसी सिलसिले में बुधवार 11 मार्च को पटना में तेजस्वी यादव और AIMIM के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान के बीच अहम बैठक हुई।


बैठक में राज्यसभा चुनाव की रणनीति को लेकर दोनों नेताओं के बीच काफी देर तक बातचीत हुई। बैठक के बाद अख्तरुल ईमान ने कहा कि उनके बीच जो बातचीत हुई वह सकारात्मक रही। उन्होंने मीडिया से कहा कि इसे शुभ संकेत माना जा सकता है। आगे उन्होंने यह भी कहा कि बैठक में हुई बातचीत की जानकारी एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी को दी जाएगी, जिसके बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।


अख्तरुल ईमान ने कहा कि जो दल दलितों, शोषितों और पीड़ितों की आवाज उठाते हैं, उन्हें देश और बिहार के हित में एकजुट होना चाहिए। इस दिशा में सकारात्मक बातचीत हुई है और आगे की रणनीति पार्टी नेतृत्व से चर्चा के बाद तय की जाएगी।


गौरतलब है कि बिहार के 5 राज्यसभा सीट के लिए चुनाव 16 मार्च को होना है। राज्यसभा चुनाव के लिए कुल 6 उम्मीदवार मैदान में हैं। विपक्ष की ओर से आरजेडी ने मौजूदा राज्यसभा सांसद एडी सिंह को उम्मीदवार बनाया है। लेकिन उनकी जीत के लिए आरजेडी के पास अभी पर्याप्त विधायकों का समर्थन नहीं है।


बता दें कि बिहार विधानसभा में आरजेडी के 25 विधायक हैं। बात महागठबंधन की करें तो कुल 35 विधायक इनके पास हैं। जबकि राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 41 विधायकों का समर्थन जरूरी होता है। ऐसे में तेजस्वी यादव की नजर AIMIM के 5 और बसपा के 1 विधायक के समर्थन पर टिकी हुई है। अगर इनका समर्थन मिल जाता है तो महागठबंधन का आंकड़ा 41 तक पहुंच सकता है। वहीं दूसरी ओर सत्ताधारी एनडीए की तरफ से विपक्ष में टूट और क्रॉस वोटिंग की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में 16 मार्च को होने वाले मतदान के दौरान क्रॉस वोटिंग की चर्चा भी तेज हो गई है। 


बता दें कि एनडीए की ओर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, भाजपा के नितिन नवीन, रालोमो प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा, केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर और भाजपा नेता शिवेश राम को उम्मीदवार बनाया गया है। बता दें कि बिहार विधानसभा में NDA के कुल 202 विधायक हैं। ऐसे में चार सीटों पर उनकी जीत लगभग तय मानी जा रही है, जबकि पांचवीं सीट के लिए उन्हें अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। अब देखना यह होगा कि एआईएमआईएम और बसपा के विधायकों का समर्थन महागठबंधन को मिल पाता है या नहीं? यह 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव के बाद ही पता चल पाएगा।  


बिहार में राज्यसभा चुनाव का फॉर्मूला 'आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली' पर आधारित है, जिसमें 'एकल संक्रमणीय मत' का उपयोग किया जाता है। एक सीट जीतने के लिए कम से कम 41 विधायकों के वोट की आवश्यकता होती है। बिहार में 5 सीटों पर हो रहे चुनावों में सत्ता पक्ष (NDA) और विपक्ष (महागठबंधन) के बीच कड़ी टक्कर है: NDA (बीजेपी, जेडीयू व अन्य): एनडीए के पास कुल 202 विधायक हैं। इस संख्या बल के साथ एनडीए 4 सीटें आसानी से जीत सकता है .


चार सीटें जीतने के बाद एनडीए के पास 38 अतिरिक्त वोट बचते हैं, जो पांचवीं सीट के लिए जरूरी 41 वोटों से केवल 3 कम हैं। विपक्ष (RJD, कांग्रेस, वाम दल): महागठबंधन के पास लगभग 35 विधायक हैं (RJD-25, कांग्रेस-6, वाम दल-3, IIP-1)विपक्ष को अपनी एक सीट पक्की करने के लिए भी कम से कम 6 अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है। 


पांचवीं सीट का फैसला उन विधायकों पर निर्भर करता है जो किसी भी बड़े गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं: AIMIM (ओवैसी की पार्टी): 5 विधायक और BSP:1 विधायक हैं। अगर ये विधायक विपक्ष (RJD) के साथ आते हैं, तो विपक्ष की संख्या 41 हो सकती है, जिससे वे एक सीट जीत सकते हैं।