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BIHAR NEWS : पटना से बड़ा ऐलान! अब देश के किसी भी कोने से मदद मांग सकेंगे बिहार के प्रवासी मजदूर

पटना में प्रवासी श्रमिकों के लिए बड़ा कदम उठाया जा रहा है। जल्द कॉल सेंटर शुरू होगा और आधार आधारित डेटाबेस तैयार किया जाएगा, जिससे देशभर में काम कर रहे मजदूरों को तुरंत सहायता मिल सकेगी।

BIHAR NEWS : पटना से बड़ा ऐलान! अब देश के किसी भी कोने से मदद मांग सकेंगे बिहार के प्रवासी मजदूर
Tejpratap
Tejpratap
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BIHAR NEWS : बिहार सरकार प्रवासी श्रमिकों की मदद के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। विभिन्न राज्यों में काम कर रहे बिहार के लाखों श्रमिकों की समस्याओं के समाधान और त्वरित सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राजधानी पटना में जल्द ही एक समर्पित कॉल सेंटर स्थापित किया जाएगा। इसके साथ ही राज्य सरकार सभी प्रवासी श्रमिकों का आधार नंबर से जुड़ा एक व्यापक डेटाबेस तैयार करने की दिशा में भी काम कर रही है।


श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग की ओर से इस परियोजना को लेकर तेजी से कार्रवाई की जा रही है। बुधवार को कॉल सेंटर की स्थापना के लिए टेंडर जारी कर दिया गया है। इच्छुक कंपनियों को 21 अप्रैल तक ऑनलाइन निविदा भरने का समय दिया गया है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद कॉल सेंटर की स्थापना का काम शुरू किया जाएगा।


कॉल सेंटर शुरू होने के बाद एक टोल-फ्री नंबर जारी किया जाएगा, जिस पर देश के किसी भी राज्य में कार्यरत बिहार के प्रवासी श्रमिक संपर्क कर सकेंगे। इस नंबर के जरिए श्रमिक अपनी समस्याएं दर्ज करा सकेंगे, सहायता मांग सकेंगे या किसी भी तरह की सूचना दे सकेंगे। इससे आपातकालीन स्थितियों में सरकार तक उनकी बात जल्दी पहुंच सकेगी।


इसी के साथ सरकार प्रवासी श्रमिकों का डिजिटल डेटाबेस तैयार करने की दिशा में भी काम कर रही है। विभाग ने इसके लिए एक विशेष सॉफ्टवेयर और मोबाइल एप विकसित किया है, जिसे फिलहाल सुरक्षा ऑडिट के लिए भेजा गया है। ऑडिट पूरा होने के बाद इसे आधिकारिक रूप से लॉन्च किया जाएगा। इस एप के जरिए राज्य के सभी प्रवासी श्रमिकों का डेटा आधार नंबर के साथ सुरक्षित रखा जाएगा।


यह बिहार में पहली बार होगा जब प्रवासी श्रमिकों का इस तरह संगठित और प्रमाणित डेटाबेस तैयार किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, इस डेटाबेस के बनने से किसी भी आपदा, दुर्घटना या अन्य परिस्थितियों में श्रमिकों की जानकारी तुरंत उपलब्ध हो सकेगी, जिससे राहत और सहायता कार्यों में तेजी आएगी।


गौरतलब है कि इससे पहले भी विभाग द्वारा प्रवासी श्रमिकों का पंजीकरण किया जा रहा था और अब तक लगभग सात लाख श्रमिकों का रजिस्ट्रेशन किया जा चुका है। हालांकि अब इस प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है, क्योंकि सरकार आधार आधारित नए सिस्टम के जरिए अधिक सटीक और विश्वसनीय डेटा तैयार करना चाहती है। इसके तहत पंजीकरण की प्रक्रिया नए सिरे से शुरू की जाएगी।


वर्ष 2023 में हुई जाति आधारित गणना के अनुसार, बिहार के करीब 46 लाख लोग रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में रहकर काम कर रहे हैं। इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए सरकार का यह कदम काफी अहम माना जा रहा है।


हालांकि, इससे पहले सरकार ने देश के कुछ प्रमुख राज्यों में प्रवासी श्रमिक सहायता केंद्र खोलने की योजना भी बनाई थी, लेकिन वह योजना अब तक धरातल पर नहीं उतर सकी है। ऐसे में अब कॉल सेंटर और डिजिटल डेटाबेस को प्रवासी श्रमिकों के लिए एक महत्वपूर्ण और प्रभावी पहल के रूप में देखा जा रहा है।