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21-Nov-2025 04:50 PM
By First Bihar
PATNA: दीपक प्रकाश ने जब से मंत्री पद की शपथ ली है, तब से बिहार में राजनीति तेज हो गयी है। इसे लेकर विपक्ष हमलावर है। अब इस बात की चर्चा सोशल मीडिया पर भी खूब हो रही है कि दीपक प्रकाश को मंत्री क्यों बनाया गया? इस सवाल का जवाब दीपक प्रकाश के पिता और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के सुप्रीमो उपेन्द्र कुशवाहा ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर दिया है।
उपेन्द्र कुशवाहा ने कहा कि कल से मैं देख रहा हूं, हमारी पार्टी के निर्णय को लेकर पक्ष और विपक्ष में आ रही प्रतिक्रियाएं....उत्साहवर्धक भी, आलोचनात्मक भी..! आलोचनाएं स्वस्थ भी हैं, कुछ दूषित और पूर्वाग्रह से ग्रसित भी। स्वस्थ आलोचनाओं का मैं हृदय से सम्मान करता हूं। ऐसी आलोचनाएं हमें बहुत कुछ सिखाती हैं, संभालती हैं। क्योंकि ऐसे आलोचकों का मकसद पवित्र होता है। दूषित आलोचनाएं सिर्फ आलोचकों की नियत का चित्रण करती हैं। दोनों प्रकार के आलोचकों से कुछ कहना चाहता हूं। पहले स्वस्थ आलोचकों से:- आपने मेरे उपर परिवारवाद का आरोप लगाया है।
उपेन्द्र कुशवाहा ने आगे लिखा कि मेरा पक्ष है कि अगर आपने हमारे निर्णय को परिवारवाद की श्रेणी में रखा है, तो जरा समझिए मेरी विवशता को। पार्टी के अस्तित्व व भविष्य को बचाने व बनाए रखने के लिए मेरा यह कदम जरुरी ही नहीं अपरिहार्य था। मैं तमाम कारणों का सार्वजनिक विश्लेषण नहीं कर सकता, लेकिन आप सभी जानते हैं कि पूर्व में पार्टी के विलय जैसा भी अलोकप्रिय और एक तरह से लगभग आत्मघाती निर्णय लेना पड़ा था। जिसकी तीखी आलोचना बिहार भर में हुई। उस वक्त भी बड़े संघर्ष के बाद आप सभी के आशीर्वाद से पार्टी ने सांसद, विधायक सब बनाए। लोग जीते और निकल लिए। झोली खाली की खाली रही। शुन्य पर पहूंच गए। पुनः ऐसी स्थिति न आए, सोचना ज़रूरी था।
कुशवाहा ने आगे कहा कि सवाल उठाइए, लेकिन जानिए। आज के हमारे निर्णय की जितनी आलोचना हो, लेकिन इसके बिना फिलहाल कोई दूसरा विकल्प फिर से शुन्य तक पहुंचा सकता था। भविष्य में जनता का आशीर्वाद कितना मिलेगा, मालूम नहीं। परन्तु खुद के स्टेप से शुन्य तक पहुंचने का विकल्प खोलना उचित नहीं था। इतिहास की घटनाओं से यही मैंने सबक ली है। समुद्र मंथन से अमृत और ज़हर दोनों निकलता है। कुछ लोगों को तो ज़हर पीना ही पड़ता है। वर्तमान के निर्णय से परिवारवाद का आरोप मेरे उपर लगेगा। यह जानते/समझते हुए भी निर्णय लेना पड़ा, जो मेरे लिए ज़हर पीने के बराबर था। फिर भी मैंने ऐसा निर्णय लिया। पार्टी को बनाए/बचाए रखने की जिद्द को मैंने प्राथमिकता दी। अपनी लोकप्रियता को कई बार जोखिम में डाले बिना कड़ा/बड़ा निर्णय लेना संभव नहीं होता। सो मैंने लिया। पूर्वाग्रह से ग्रसित आलोचकों के लिए बस इतना ही:- "सवाल ज़हर का नहीं था, वो तो मैं पी गया । तकलीफ़ उन्हें तो बस इस बात से है कि मैं फिर से जी गया ।
अरे भाई, रही बात दीपक प्रकाश की तो जरा समझिए - विद्यालय की कक्षा में फेल विद्यार्थी नहीं है। मेहनत से पढ़ाई करके कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की डिग्री ली है, पूर्वजों से संस्कार पाया है उसने। इंतजार कीजिए, थोड़ा वक्त दीजिए उसे। अपने को साबित करने का। करके दिखाएगा। अवश्य दिखाएगा। आपकी उम्मीदों और भरोसा पर खरा उतरेगा। वैसे भी किसी भी व्यक्ति की पात्रता का मूल्यांकन उसकी जाति या उसके परिवार से नहीं, उसकी काबिलियत और योग्यता से होना चाहिए। आप सबों का आभार 🙏
बता दें कि बिहार विधानसभा चुनाव में NDA की प्रचंड जीत के बाद 20 नवंबर को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में शपथग्रहण समारोह का आयोजन हुआ। नीतीश कुमार 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री बने। उनके साथ-साथ 26 अन्य नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली। सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था लेकिन जब उपेन्द्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को मंच पर शपथ लेने के लिए बुलाया गया तब वहां मौजूद लोग भी हैरान रह गये। अब इस बात की चर्चा सोशल मीडिया पर भी खूब हो रही है कि दीपक प्रकाश को मंत्री क्यों बनाया गया?
उपेन्द्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश ना किसी सदन, ना ही विधानसभा और ना ही विधान परिषद के सदस्य हैं, इसके बावजूद उन्होंने बिहार के मंत्री के रूप में पद और गोपनियता की शपथ ली। इसे लेकर विपक्ष लगातार हमलावर है। राजद के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह के पुत्र राजद सांसद सुधाकर सिंह ने भी उपेन्द्र कुशवाहा के बेटे के मंत्री बनने पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा जिस तरीके से चुनावी अभियान में जिन मुद्दों का आधार बना कर लड़ा गया उसमें आप देखेंगे किस तरीके से मोदी जी लाचार हैं और बिहार को लेकर केवल उपेंद्र कुशवाहा नहीं कम से कम एक दर्जन लोग किसी न किसी परिवार से मंत्री बनाए गए हैं। एक दर्जन में इन व्यक्तियों में शामिल उपेन्द्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश जिसकी चर्चा हो रही है, उनका चुनावी राजनीति से दूर-दूर तक कोई रिश्ता नहीं है। विपक्ष के इस सवाल का उपेन्द्र कुशवाहा ने जवाब सोशल मीडिया के माध्यम से दिया है।