Silver hallmarking : सोने के बाद अब चांदी के आभूषणों में मिलावटखोरी पर अब पूरी तरह से शिकंजा कसने वाला है। दरअसल, 1 सितंबर से चांदी के गहनों पर भी हॉलमार्किंग में 6 डिजिट का कोड (HUID) होगा, जो उसकी शुद्धता को बताएगा। इसके साथ ही उसकी शुद्धता की जांच किस हॉलमार्क सेंटर में की गई है, ये भी जानकारी मिलेगी।
दरअसल, चांदी में अभी तक जो हॉलमार्किंग होती थी, उसमें ये कोड नहीं होता था। ऐसे में अब नवरात्रि और दिवाली जैसे त्योहारों के पहले सरकार का ये बड़ा कदम ग्राहकों के लिए बड़ा हथियार साबित हो सकता है। इसको लेकर छह ग्रेड तय किए गए हैं। जिसमें 800,835,900,925,970 ग्रेड है। हर हॉलमार्क चांदी पर बीआइएस का लोगो, शुद्धत्ता का अंक और पंजीकरण नंबर अंकित रहेगा। लेकिन,पुरे बिहार में केवल पटना जिले में दो हॉलमार्किंग सेंटर है।
भारतीय मानक ब्यूरो के प्रमुख चंद्रकेश सिंह ने बताया कि हॉलमार्क से ग्राहकों को शुद्धता की गारंटी मिलेगी और वजन से साथ अन्य किसी समस्या का सामना नहीं करना होगा। इससे नकली और मिलावटी चांदी के बिक्री पर भी रोक लगेगी। हालांकि,ऐसा हो सकता है कि इससे जेवरात थोड़े महंगे हो। वर्तमान में जो पायल 800 रुपए तक आते हैं वह अब 1000 से कम में नहीं आएंगे।
आपको बताते चलें कि, सिल्वर या गोल्ड के लिए हॉलमार्किंग सेंटर खोलने में 40-50 लाख रुपये की लागत आती है। अगर किसी के पास गोल्ड हॉलमार्किंग का सेंटर है तो फिर सिल्वर हॉलमार्किंग के लिए ऐसी सुविधा के लिए 15-20 लाख रुपये की लागत आएगी। अगर सरकार इसे छह महीने या साल भर में अनिवार्य बनाती है तो सेंटर निश्चित तौर पर बढ़ेंगे।