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15-Jan-2026 07:40 PM
By First Bihar
PATNA: पटना के मुन्ना चौक इलाके में नीट की तैयारी कर छात्रा की मौत के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है. इस नये खुलासे से पटना पुलिस पर बेहद गंभीर सवाल खड़े हो गये हैं. पटना पुलिस के SSP से लेकर ASP लगातार ये दावे कर रहे थे कि पीड़ित छात्रा के साथ रेप नहीं हुआ है और उसकी मौत काफी संख्या में नींद की गोली खाने के कारण हुई थी. लेकिन अब जब छात्रा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई है तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ है.
छात्रा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा
नीट छात्रा की मौत के इस मामले में पटना पुलिस के बयान पर लगातार सवाल उठ रहे थे. बगैर पोस्टमार्टम रिपोर्ट के पुलिस ये दावे कर रही थी कि छात्रा के साथ कोई गलत काम नहीं हुआ था. लेकिन पीड़ित परिवार लगातार गंभीर आरोप लगा रहा था. पीड़ित परिवार बार-बार ये कह रहा था कि छात्रा के साथ रेप कर हत्या कर दी गयी है. लेकिन पुलिस सुनने को तैयार नहीं थी. घटना में पुलिसिया रवैये के खिलाफ बड़ी संख्या में लोगों ने प्रदर्शन भी किया था.
घटना को लेकर लोगों के आक्रोश को देखते हुए PMCH में मेडिकल बोर्ड ने छात्रा की डेड बॉडी का पोस्टमार्टम किया था. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डॉक्टरों ने साफ साफ कहा है कि बॉडी पर जो निशान मिले हैं, उससे इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता कि छात्रा के साथ यौन हिंसा हुई थी. यानि पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पटना पुलिस के सारे दावों की हवा निकाल दी है.
पुलिस ने हॉस्टल संचालक को गिरफ्तार किया
वैसे पटना पुलिस ने अब भी पूरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट पुलिस के पास है और पुलिस ने मीडिया को सिर्फ इतनी ही जानकारी दी है कि रिपोर्ट में रेप की संभावना से इंकार नहीं किया गया है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आने के बाद पुलिस ने जिस हॉस्टल में छात्रा रहती थी उसके मालिक मनीष कुमार रंजन को गिरफ्तार कर लिया है.
पूरा वाकया जानिये?
इस घटना की जानकारी 9 जनवरी को पटना पुलिस को मिली थी. पीड़िता के पिता ने पटना के चित्रगुप्त नगर थाने में एफआईआर दर्ज कराया था. उन्होंने बताया कि उनकी बेटी 5 जनवरी को अपने घर से हॉस्टल जाने के लिए निकली. उसने रात में हॉस्टल पहुंच कर फोन किया कि सही सलामत पहुंच गयी है. पिता को अगले दिन यानि 6 जनवरी को ये खबर मिली कि उनकी बेटी हॉस्टल में बेहोश पड़ी है.
पिता ने जब हॉस्टल की केयर टेकर से बात की तो उसने बताया कि लड़की को इलाज के लिए एक डॉक्टर के क्लीनिक में भर्ती कराया गया है. लड़की के परिजन वहां पहुंचे तो देखा कि वह बेहोश ही है. इसके बाद उसे पटना के ही एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वह दो दिनों तक कोमा में पड़ी रही. इसके बाद उसे पटना के एक बड़े अस्पताल में ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया.
पिता ने जतायी थी रेप और मारपीट की आशंका
इस घटना को लेकर 9 जनवरी को पीड़िता के पिता ने पटना के चित्रगुप्त नगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई. पीड़िता के पिता ने स्पष्ट तौर पर ये आशंका जतायी कि उनकी बेटी के साथ गलत हुआ है. उसके बॉडी और सिर पर चोट के निशान हैं. पिता ने आशंका जताई कि उनकी बेटी के साथ यौन हिंसा हुई है.
पुलिस ने सर्टिफिकेट कैसे बांटी
इस मामले में सबसे हैरानी वाली बात है पटना पुलिस के आला अधिकारियों का स्टैंड. 11 जनवरी को पटना के सिटी ASP अभिनव कुमार ने मीडिया के सामने बयान दिया कि पीड़िता के पिता ने 9 जनवरी को अपनी बेटी के साथ यौन हिंसा की शिकायत दर्ज कराई थी. ASP ने कहा कि अब तक की जांच में ये पता चला है कि लड़की के साथ यौन हिंसा नहीं हुई है. ये डॉक्टरों का कहना है. सिटी एसपी ने कहा कि डॉक्टरों ने कहा है कि लड़की ने काफी संख्या में नींद की गोलियां खाई थी और उसे मियादी बुखार था. कुल मिलाकर सिटी एसपी ने पीड़िता के पिता के आरोपों को सरासर गलत ठहरा दिया.
सिटी एसपी के बयान से आक्रोशित हुए लोग
सिटी एसपी के क्लीनचिट से लोगों के एक समूह में आक्रोश फैला. इसके बाद लड़की की डेड बॉडी के साथ परिजनों औऱ आम लोगों ने पटना के कारगिल चौराहे पर प्रदर्शन किया. इसी आक्रोश को देखते हुए मेडिकल बोर्ड से लड़की की बॉडी का पोस्टमार्टम कराने का फैसला लिया गया.
SSP ने भी दे दिया क्लीन चिट
13 जनवरी को पटना के सीनियर एसपी कार्तिकेय शर्मा ने इस मसले पर मीडिया से बात की. सीनियर एसपी ने भी कहा कि लड़की के साथ कोई यौन हिंसा नहीं हुई थी. सीनियर एसपी ने कहा कि डॉक्टरों ने कहा है कि किसी तरह की यौन हिंसा या यौन शोषण नहीं हुआ है.
किस डॉक्टर ने पटना पुलिस को दी थी सलाह
पटना के सीनियर एसपी औऱ ASP मीडिया के सामने ये बयान तब दे रहे थे जब लड़की की मौत हो चुकी थी और उसका पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं आया था. कानून में स्पष्ट प्रावधान है कि मौत के मामले में सरकारी पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर ही मौत का कारण पता चलता है. सवाल ये है कि फिर किन डॉक्टरों की सलाह पर पटना पुलिस के आलाधिकारी यौन शोषण नहीं होने का सर्टिफिकेट बांट रहे थे. क्या पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार नहीं सकती थी.
घटना में कई संदेहजनक तथ्य साफ तौर पर नजर आ रहा था. जैसे लड़की अगर अपने कमरे में बेहोश पड़ी थी तो उसके कमरे का दरवाजा किसने और कब खोला. उस वक्त हॉस्टल संचालक ने पुलिस को खबर क्यों नहीं किया. लड़की के शरीर पर चोट के निशान थे, हॉस्टल संचालक या जिस निजी क्लीनिक में उसका इलाज कराया गया उसने पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी. 5 जनवरी को घर से हॉस्टल आयी लड़की अगले दिन यानि 6 जनवरी को मियादी बुखार की मरीज कैसे हो गई. वह भी इतनी ज्यादा गंभीर तौर पर बीमार कि बेहोश हो गयी.
हॉस्टल संचालक के राजनीतिक रसूख ने दवाब बनाया?
सवाल ये उठ रहा है कि क्या हॉस्टल संचालक का रसूख इतना ज्यादा था कि पुलिस के हाथ बंध गये. मुन्ना चौक के आस-पास के लोग बताते हैं कि शंभू गर्ल्स हॉस्टल के संचालक और उसके सगे-संबंधियों की पहुंच बिहार के ‘बड़े घर’ तक थी. फर्स्ट बिहार इसकी पुष्टि नहीं करता लेकिन पीड़िता के परिजन ऐसा आरोप लगा रहे हैं. क्या यही वजह थी कि छात्रा की मौत में पुलिस खुद से सुपर एक्टिव थी. ऐसे ढ़ेरो सवाल हैं जो पटना पुलिस पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं.