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Patna Metro: पटना मेट्रो को सस्ती बिजली नहीं मिलेगी, आयोग ने याचिका की खारिज

Patna Metro: पटना मेट्रो की सस्ती बिजली दर की मांग को बिहार विद्युत विनियामक आयोग (BERC) ने खारिज कर दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि मेट्रो परिचालन के दौरान बिजली दरों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा और पहले से तय की गई दरें ही लागू रहेंगी।

Patna Metro

13-Nov-2025 08:23 AM

By First Bihar

Patna Metro: पटना मेट्रो की सस्ती बिजली दर की मांग को बिहार विद्युत विनियामक आयोग (BERC) ने खारिज कर दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि मेट्रो परिचालन के दौरान बिजली दरों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा और पहले से तय की गई दरें ही लागू रहेंगी। आयोग ने अपने फैसले में कहा कि पटना मेट्रो एक दिन में औसतन 16 घंटे तक परिचालन करेगी, और परिचालन की अवधि चाहे कम हो, बिजली दर रेलवे की तर्ज पर ही लागू होगी।


पटना मेट्रो ने याचिका में तर्क दिया था कि उनकी सेवा 24 घंटे नहीं चलेगी, इसलिए रेलवे की तरह बिजली दर लागू करना अनुचित है। लेकिन आयोग ने इसे खारिज करते हुए कहा कि रिव्यू याचिका केवल टंकण या तथ्यात्मक गलती के लिए होती है, और बिजली दर पहले ही तय की जा चुकी है। इसके तहत 540 रुपए प्रति केवीए फिक्स्ड चार्ज और 8.16 रुपये प्रति यूनिट विद्युत शुल्क लागू होगा।


पटना मेट्रो पर टीओडी रेटिंग भी लागू होगी। आयोग ने इसके अनुसार बिजली की खपत और शुल्क को समय के आधार पर विभाजित किया है। सुबह 6 बजे से शाम 5 बजे तक के कुल परिचालन में मेट्रो की खपत का 45 प्रतिशत हिस्सा आता है, इस अवधि में मेट्रो को केवल 80 प्रतिशत विद्युत शुल्क देना होगा। इसके बाद तीन घंटे के लिए सामान्य बिजली दर यानी 100 प्रतिशत शुल्क लागू होगा। वहीं पीक आवर के सात घंटे में मेट्रो को 120 प्रतिशत शुल्क देना होगा, जो सामान्य दर से 20 प्रतिशत अधिक है।


आयोग ने अनुमान लगाया है कि एलिवेटेड स्टेशनों में शुरुआत में प्रति स्टेशन 200 किलोवाट बिजली खपत होगी, जो आने वाले वर्षों में 300 किलोवाट तक बढ़ सकती है। वहीं भूमिगत स्टेशनों की बिजली खपत 1500 किलोवाट से शुरू होकर भविष्य में 2000 किलोवाट तक पहुँच सकती है।


इस निर्णय के बाद मेट्रो प्रशासन को बिजली की लागत के लिए पूर्व निर्धारित बजट के अनुसार योजना बनानी होगी, और बिजली की खपत और शुल्क के अनुसार परिचालन व्यय को नियंत्रित करना होगा। विद्युत शुल्क की यह दरें मेट्रो के परिचालन की आर्थिक व्यवहार्यता और सरकारी उपभोक्ताओं के लिए टिकाऊ मॉडल सुनिश्चित करने के लिए लागू की गई हैं।