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17-Feb-2026 08:12 AM
By First Bihar
Patna High Court : पटना हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि केवल किसी परिसर से शराब बरामद होने के आधार पर संपत्ति को सील या जब्त नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि अवैध शराब के भंडारण या कारोबार में परिसर स्वामी की प्रत्यक्ष संलिप्तता या मिलीभगत का प्रमाण होना अनिवार्य है। यह फैसला बिहार में लागू शराबबंदी कानून के तहत संपत्ति जब्ती मामलों में एक अहम न्यायिक मार्गदर्शन माना जा रहा है।
यह आदेश न्यायमूर्ति मोहित कुमार शाह और न्यायमूर्ति आलोक कुमार पांडेय की खंडपीठ ने दयामंती देवी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद प्रशासन द्वारा की गई जमीन जब्ती की कार्रवाई को अवैध बताते हुए रद्द कर दिया और संबंधित जमीन को दो सप्ताह के भीतर डि-सील करने का निर्देश दिया।
मामला नवादा जिले के उत्पाद थाना कांड संख्या 873/2024 से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार 13 दिसंबर 2024 को पुलिस ने दो आरोपितों के पास से करीब 1.500 लीटर अवैध विदेशी शराब बरामद की थी। वहीं याचिकाकर्ता दयामंती देवी की घेराबंदी वाली जमीन पर कचरे में छिपाकर रखी गई एक बोरी से लगभग 2.625 लीटर शराब बरामद हुई थी। इसके बाद प्रशासन ने संबंधित जमीन को सील करते हुए जब्ती की कार्रवाई शुरू कर दी थी।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दीपक कुमार ने अदालत में दलील देते हुए कहा कि दयामंती देवी का इस मामले में किसी भी प्रकार का संबंध नहीं है। न तो उन्हें इस केस में आरोपी बनाया गया और न ही बरामद शराब से उनका कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष जुड़ाव सिद्ध किया गया है। उन्होंने कहा कि केवल जमीन पर शराब मिलने के आधार पर संपत्ति जब्त करना कानून और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
सरकारी पक्ष अपनी दलीलों के दौरान यह साबित करने में विफल रहा कि जमीन मालिक का अवैध शराब के भंडारण या तस्करी में कोई हाथ था। इस पर अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि बिना ठोस साक्ष्य के किसी नागरिक की संपत्ति को सील करना संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 300A के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। कोर्ट ने कहा कि प्रशासन को कार्रवाई से पहले निष्पक्ष जांच और पर्याप्त प्रमाण प्रस्तुत करना आवश्यक है।
खंडपीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यदि किसी परिसर से शराब बरामद होती है तो मात्र उसी आधार पर संपत्ति जब्ती की कार्रवाई नहीं की जा सकती। जब तक यह प्रमाणित नहीं हो जाता कि संपत्ति स्वामी अवैध गतिविधि में शामिल है, तब तक उसकी संपत्ति को जब्त करना गैरकानूनी माना जाएगा। अदालत ने प्रशासन को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता की जमीन को दो सप्ताह के भीतर डि-सील किया जाए और आगे ऐसी कार्रवाई करते समय कानून के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित किया जाए।
बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद इस प्रकार के कई मामले सामने आते रहे हैं, जहां शराब बरामदगी के बाद जमीन या मकान को सील करने की कार्रवाई की गई। इस फैसले को ऐसे मामलों में मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय नागरिकों के संपत्ति अधिकारों की सुरक्षा और प्रशासनिक कार्रवाई में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।