मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 16 जनवरी से शुरू करेंगे 'समृद्धि यात्रा', देखिये पूरा शेड्यूल जमुई के मजोस-भंटा मैग्नेटाइट ब्लॉकों की नीलामी प्रक्रिया तेज, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये 'रोडशो' का आयोजन Bihar News: दरभंगा राज की महारानी कामसुंदरी देवी के अंतिम संस्कार से पहले भारी बवाल, दो पक्षों के बीच हुई जमकर मारपीट Bihar News: दरभंगा राज की महारानी कामसुंदरी देवी के अंतिम संस्कार से पहले भारी बवाल, दो पक्षों के बीच हुई जमकर मारपीट लखीसराय में GTSE सेमिनार का भव्य आयोजन, मेधावी छात्रों को किया गया सम्मानित Shikhar Dhawan Engagement: शिखर धवन ने सोफी शाइन के साथ की सगाई, फैंस को इंस्टाग्राम पर दी खुशखबरी Shikhar Dhawan Engagement: शिखर धवन ने सोफी शाइन के साथ की सगाई, फैंस को इंस्टाग्राम पर दी खुशखबरी औरंगाबाद में GTSE सेमिनार का भव्य आयोजन, सैकड़ों छात्रों ने लिया मार्गदर्शन Bihar Crime News: बिहार में दिल दहला देने वाली वारदात, बीड़ी नहीं देने पर बुजुर्ग महिला को पीट-पीटकर मार डाला बिहार के गांव की सड़कें होंगी 'डबल लेन'! जानिए मंत्री अशोक चौधरी ने क्या कहा?
12-Jan-2026 03:18 PM
By First Bihar
BPSC teacher death : बिहार के नवादा जिले के हिसुआ थाना क्षेत्र में शुक्रवार की सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ, जिसमें दो बीपीएससी शिक्षक बालू लदे ट्रैक्टर की चपेट में आ गए। हादसे में कुंदन प्रभात की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके साथी आलोक कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों शिक्षक नवादा शहर के निवासी थे और एक ही बाइक से मेसकौर प्रखंड के परोरिया गांव स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय में ड्यूटी पर जा रहे थे।
जानकारी के अनुसार, कुंदन प्रभात और आलोक कुमार अपनी दैनिक दिनचर्या के अनुसार सुबह जल्दी निकले थे। विभागीय आदेश के मुताबिक, शिक्षकों को सुबह 9:30 बजे तक विद्यालय पहुंचकर हाजिरी दर्ज करानी अनिवार्य है। इसी दौरान तेज रफ्तार ट्रैक्टर ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। इस हादसे में कुंदन प्रभात की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि आलोक कुमार को स्थानीय लोगों ने तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, आलोक कुमार की हालत गंभीर बनी हुई है।
इस हादसे से नवादा के शिक्षक समुदाय में गहरा शोक छा गया है। शिक्षक नेताओं ने मृतक कुंदन प्रभात के परिजनों को उचित मुआवजा, सरकारी नौकरी और अन्य राहत की मांग की है। साथ ही घायल आलोक कुमार के इलाज का खर्च विभाग द्वारा वहन करने की मांग भी उठाई जा रही है। शिक्षक समुदाय का कहना है कि ऐसे हादसे उनकी सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाते हैं और ग्रामीण सड़कों पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता है।
बिहार में इस समय कड़ाके की ठंड पड़ रही है। अधिकांश जिलों में ठंड को देखते हुए स्कूलों के संचालन में बदलाव किया गया है या उन्हें बंद रखा गया है। लेकिन नवादा जिले में जिलाधिकारी रवि प्रकाश और जिला शिक्षा पदाधिकारी के आदेश पर सभी सरकारी विद्यालय सामान्य समय पर खुले रखे गए। जबकि बच्चों के लिए पठन-पाठन का समय सुबह 11 बजे से शुरू होता है, शिक्षकों को सुबह 9:30 बजे तक स्कूल पहुंचने का निर्देश है। शिक्षक समुदाय का कहना है कि बच्चों के लिए स्कूल देर से खुल रहा है, लेकिन उन्हें इतनी जल्दी आने के लिए मजबूर करना अनुचित है। इसे लेकर शिक्षक वर्ग में नाराजगी है।
हिसुआ थाने के एसआई परदेशी कुमार ने घटनास्थल पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए नवादा सदर अस्पताल भेजा। उन्होंने बताया कि ट्रैक्टर चालक की तलाश जारी है और मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। स्थानीय लोग भी बता रहे हैं कि इस मार्ग पर अक्सर तेज रफ्तार वाहनों के कारण हादसे होते रहते हैं, जिससे ग्रामीण सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।
एसआई परदेशी कुमार ने कहा, "घटनास्थल पर पहुंचकर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए नवादा सदर अस्पताल भेजकर मामला दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है। इस हादसे में एक शिक्षक की मौत हो गई है और दूसरा गंभीर रूप से घायल है।"
यह हादसा एक बार फिर बिहार की ग्रामीण सड़कों पर सुरक्षा की कमी को उजागर करता है। सुबह जल्दी ड्यूटी पर जाने वाले शिक्षक बिना पर्याप्त रोशनी और तेज रफ्तार वाहनों के खतरे में रहते हैं। स्थानीय लोग और शिक्षक दोनों ही मांग कर रहे हैं कि संबंधित मार्ग पर उचित सड़क सुरक्षा उपाय किए जाएं, जैसे कि गति सीमा का पालन, सड़क पर चेतावनी संकेत और पुलिस निगरानी।
विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में तेज रफ्तार ट्रैक्टर और अन्य भारी वाहनों के चलते सड़क दुर्घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। शिक्षकों और आम लोगों की सुरक्षा के लिए स्थानीय प्रशासन को तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है।
नवादा जिले का यह सड़क हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि ग्रामीण सड़क सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर कमियों का संकेत है। शिक्षक समुदाय में शोक और गहरी नाराजगी के बीच अब प्रशासन पर यह जिम्मेदारी बनती है कि वह मृतक के परिवार को न्यायोचित मुआवजा दिलाए और घायल शिक्षक आलोक कुमार के उपचार में पूरी मदद करे। साथ ही, भविष्य में ऐसे हादसों से बचने के लिए सड़क सुरक्षा, वाहन गति नियंत्रण और ग्रामीण क्षेत्रों में सतत निगरानी सुनिश्चित करनी होगी।