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31-Jan-2026 09:11 AM
By First Bihar
Ganga river bridge : गंगा नदी पर आरा, बलिया और छपरा को जोड़ने वाले पक्के पुल के निर्माण की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। इस पुल के बनने से तीनों जिलों के बीच यात्रा समय काफी कम हो जाएगा और सांस्कृतिक, आर्थिक एवं सामाजिक दृष्टि से क्षेत्र में नया संचार मार्ग खुल जाएगा। यह पुल राष्ट्रीय राजमार्ग 31 (उत्तर प्रदेश) और राष्ट्रीय राजमार्ग 922 (बिहार) को जोड़ने का कार्य करेगा।
पूर्व सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त के अनुसार, महुली गंगा घाट पर बनने वाले इस फोरलेन पुल के लिए लगभग 1200 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। उन्होंने बताया कि सड़क परिवहन विभाग ने पहले दो लेन के पुल का प्रस्ताव रखा था, लेकिन हाल में इसे फोरलेन बनाने का निर्णय लिया गया। इसके परिणामस्वरूप पुल निर्माण की लागत लगभग छह सौ करोड़ रुपये से बढ़कर बारह सौ करोड़ रुपये हो गई है।
वर्तमान में आरा, बलिया और छपरा के बीच संपर्क सीमित है। गंगा नदी के इस हिस्से पर पक्का पुल नहीं होने के कारण तीनों जिले एक-दूसरे से दूरी महसूस कर रहे हैं। हालांकि, क्षेत्र की संस्कृति और परंपराओं ने इन जिलों को सदैव आपस में जोड़े रखा है। अब पुल निर्माण से यह दूरी मिटेगी और इन जिलों के बीच सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि होगी।
पूर्व सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने सोनबरसा स्थित अपने कार्यालय से जानकारी दी कि गंगा नदी पर पुल निर्माण के बाद उत्तर प्रदेश के बैरिया शहर से बिहार के आरा तक यात्रा केवल एक घंटे में पूरी की जा सकेगी। इससे न केवल सड़क मार्ग से यात्रा आसान होगी, बल्कि व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच भी सुगम हो जाएगी।
राष्ट्रीय राजमार्ग 31 के माध्यम से यह पुल करण छपरा (उत्तर प्रदेश) और शोभा छपरा, लक्ष्मण छपरा, धतुरी टोला तथा खवासपुर होते हुए महुली गंगा घाट से जुड़ा जाएगा। वहीं, महुली गंगा घाट से फोरलेन 922 के माध्यम से पटना और बक्सर के क्षेत्र को सिंगही के पास से जोड़ने की योजना है। इस सड़क मार्ग को जोड़ने की टेंडर प्रक्रिया जून 2026 में पूरी होने की संभावना है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, खवासपुर के खलीफा टोला निवासी गांधी जी यादव ने बताया कि पूर्व सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने सड़क परिवहन मंत्री से भी इस विषय पर चर्चा की थी। मंत्री ने स्पष्ट किया कि पुल का निर्माण 2026 में ही कराया जाएगा। इसके लिए सभी आवश्यक औपचारिकताएं और बजट स्वीकृति प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी गई है।
इस फोरलेन पुल के बनने से क्षेत्र के विकास में नया अध्याय खुलेगा। आरा, बलिया और छपरा के लोग अब आसानी से एक-दूसरे के शहरों में व्यापार, शिक्षा और रोजगार के अवसरों का लाभ ले सकेंगे। इसके अलावा, पर्यटन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए भी यह पुल अहम साबित होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पुल केवल सड़क मार्ग को नहीं जोड़ेगा, बल्कि गंगा नदी के पार आने-जाने में समय और खर्च दोनों में कटौती करेगा। पूर्व सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने बताया कि यह परियोजना न केवल क्षेत्रीय विकास में योगदान करेगी, बल्कि लोगों के रोजमर्रा जीवन को भी आसान बनाएगी।
इस पुल के निर्माण की तैयारी, स्वीकृत राशि और टेंडर प्रक्रिया के बाद, उम्मीद जताई जा रही है कि 2026 तक निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा और आने वाले वर्षों में आरा, बलिया और छपरा के बीच यातायात की गुणवत्ता और सुविधा में सुधार होगा।
गांधी जी यादव ने यह भी बताया कि पुल निर्माण के बाद सड़क परिवहन विभाग को उम्मीद है कि राष्ट्रीय राजमार्गों के संपर्क से स्थानीय व्यवसाय और किसानों के लिए माल-आवागमन सुगम होगा। इसके साथ ही, लोगों की यात्रा का समय घटने से आर्थिक गतिविधियों में भी तेजी आएगी।
संक्षेप में, महुली गंगा घाट पर बनने वाला यह फोरलेन पुल आरा, बलिया और छपरा के बीच न केवल दूरी घटाएगा, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से इन जिलों को मजबूत रूप से जोड़ेगा। 2026 में निर्माण कार्य शुरू होने की योजना के साथ यह परियोजना क्षेत्रवासियों के लिए एक उम्मीद की किरण साबित हो रही है।