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BIHAR POLICE : बिहार में अपराध मामलों की मेडिकल रिपोर्ट में देरी पर डॉक्टरों पर होगी कानूनी कार्रवाई, ADG का निर्देश

BIHAR POLICE : बिहार में अब अपराध मामलों से जुड़ी मेडिकल रिपोर्ट देने में लापरवाही बरतने वाले डॉक्टरों पर सख्त कार्रवाई होगी। पुलिस मुख्यालय की ओर से स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं

29-Aug-2025 03:34 PM

By First Bihar

BIHAR POLICE : बिहार के डॉक्टरों के लिए यह काफी महत्वपूर्ण है। अब राज्य के किसी भी डॉक्टर यदि अपराध से जुड़ीं मामलों में मेडिकल रिपोर्ट देने में अधिक समय लगाते हैं तो उनपर क़ानूनी एक्शन लिया जाएगा। इसको लेकर निर्देश जारी कर दिया गया है। इसके बाद अब इसको लेकर राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में सुचना देने का काम किया जा रहा है। 


जानकारी के मुताबिक, आपराधिक वारदातों में मेडिकल रिपोर्ट देने में विलंब करने वाले डॉक्टर के खिलाफ अब पुलिस कानूनी कार्रवाई करेगी। डीआईजी कार्यालय में लंबित कांडों की समीक्षा के लिए मुख्यालय पटना से आए एडीजी ने यह निर्देश दिया है। उन्होंने कहा है कि पर्यवेक्षी अधिकारी पहले लिखित रूप से चिकित्सक से जख्म प्रतिवेदन के लिए आग्रह करेंगे। जख्म प्रतिवेदन नहीं मिलने पर कार्रवाई होगी।


इसके आगे उन्होंने कहा कि अब थाने में केस दर्ज होने के पांच दिनों के अंदर सुपरवीजन रिपोर्ट जारी कर देना है। गंभीर प्रवृति के पुराने कांडों में अब हर 15 दिन पर समीक्षा होगी। समीक्षा के साथ ही प्रोग्रेस रिपोर्ट जारी करना है। समय से जख्म जांच प्रतिवेदन नहीं मिलने पर संबंधित चिकित्सक से पृच्छा करे और विधि-सम्मत कारवाई करना है। 


इसके साथ ही कोर्ट में पक्षद्रोही होने वाले सरकारी गवाहों के विरूद्ध विभागीय कारवाई करने का निर्देश दिया। इसके लिए हर दिन कोर्ट से गवाहों के संबंध में जानकारी प्राप्त करने के लिए कहा। आदेश में कहा गया कि स्पीडी ट्रायल में गवाहों की उपस्थिति की मॉनिटरिंग प्रतिदिन पुलिस अधीक्षक और पुलिस उपाधीक्षक स्तर के पदाधिकारी से करेंगे। केस का सुपरवीजन करने वाले डीएसपी और इंस्पेक्टर घटनास्थल पर पहुंचकर वीडियो बनाकर ई-साक्ष्य एप पर अपलोड करेंगे।


इसका जिक्र वह सुपरवीजन रिपोर्ट में भी करेंगे। इसी तरह आईओ घटनास्थल पर जाकर ई-साक्ष्य एप पर वीडियो अपलोड करेंगे। हर महीने सभी पदाधिकारियों के कार्यों की समीक्षा का भी निर्देश दिया गया। बताते चलें कि कोर्ट में बड़ी संख्या में कांड इंज्यूरी रिपोर्ट के आभाव में लंबित हैं। कई मामलों में आईओ भी परेशान हैं।