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19-Sep-2025 02:31 PM
By First Bihar
Bihar Politics: बिहार में विधानसभा चुनाव का माहौल धीरे-धीरे बनता जा रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले महीने तक चुनाव की आधिकारिक घोषणा हो सकती है। ऐसे में राज्य के तमाम राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीतियां बनाकर जनता के बीच पहुंच रहे हैं। महागठबंधन की तरफ से अभी तक सबसे बड़ा सवाल यही है कि चुनाव किसके चेहरे पर लड़ा जाएगा। राजद (RJD) लगातार तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बता रही है, लेकिन कांग्रेस की ओर से इस पर कोई स्पष्ट रुख सामने नहीं आया है। इसी बीच महागठबंधन की तीसरी बड़ी पार्टी भाकपा-माले (CPI-ML) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने इस मुद्दे पर बड़ा बयान दिया है।
दीपांकर भट्टाचार्य ने साफ कहा है कि महागठबंधन बिना मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किए भी चुनाव मैदान में उतर सकता है। उन्होंने हालांकि यह भी स्पष्ट किया कि यदि सरकार बनी तो मुख्यमंत्री पद की कमान आरजेडी नेता और विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के हाथ में ही होगी। समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में उन्होंने कहा—“हो सकता है कि औपचारिक तौर पर मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार का ऐलान न हो, लेकिन इसमें कोई अस्पष्टता नहीं है कि आरजेडी गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी है। इसलिए नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ही महागठबंधन की ओर से सीएम का चेहरा हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि चुनाव से पहले औपचारिक घोषणा न करने के पीछे भी एक सोच है। “कभी-कभी लोग मानते हैं कि हर काम उचित समय पर होना चाहिए। जब हमें जनता का बहुमत मिल जाएगा और सरकार बनाने की स्थिति में होंगे, तब मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार का औपचारिक एलान कर दिया जाएगा,” भट्टाचार्य ने कहा।
महागठबंधन के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर भले ही स्थिति लगभग स्पष्ट दिखाई देती है, लेकिन डिप्टी सीएम की कुर्सी पर भी चर्चा छिड़ गई है। विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के नेता मुकेश सहनी हाल ही में खुद को उपमुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित कर चुके हैं। इस पर सवाल पूछे जाने पर भट्टाचार्य ने कहा कि यह मुद्दा चुनाव के बाद की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। “इन बातों को उसी समय देखा जाएगा जब जनता हमें बहुमत देगी और सरकार बनाने की स्थिति बनेगी,” उन्होंने कहा।
गौरतलब है कि महागठबंधन में राजद, कांग्रेस, भाकपा-माले समेत कई अन्य दल शामिल हैं। 2020 के विधानसभा चुनाव में तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को कड़ी टक्कर दी थी और विपक्ष ने बड़ी संख्या में सीटें जीतकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। इस बार एक बार फिर से महागठबंधन भाजपा और एनडीए गठबंधन को चुनौती देने की तैयारी में है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि महागठबंधन के भीतर सीएम उम्मीदवार को लेकर औपचारिक ऐलान न करना कहीं न कहीं रणनीति का हिस्सा हो सकता है। इससे एक ओर तो सहयोगी दलों के बीच सामंजस्य बना रहेगा, वहीं दूसरी ओर चुनाव के समय इस मुद्दे को जनता के बीच उभारकर माहौल बनाने का मौका भी मिल सकता है। हालांकि, राजद की ओर से बार-बार यह दोहराया जा रहा है कि मुख्यमंत्री पद के लिए सिर्फ तेजस्वी यादव का ही नाम आगे रखा जाएगा। वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी इस मुद्दे पर अब तक चुप्पी साधे हुए हैं। इससे गठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठते हैं, लेकिन माले नेता का बयान इस अस्पष्टता को काफी हद तक दूर करता है।
कुल मिलाकर, बिहार चुनाव 2025 में महागठबंधन का मुख्य चेहरा तेजस्वी यादव ही होंगे, भले ही इसकी औपचारिक घोषणा अभी बाकी हो। महागठबंधन फिलहाल जनता के बीच अपनी नीतियों और मुद्दों को लेकर जा रहा है और उम्मीद कर रहा है कि चुनावी समर में एकजुट होकर सत्ता पर काबिज होगा।