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05-Oct-2025 04:20 PM
By First Bihar
Darjeeling Bridge Accident : दार्जिलिंग में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण कई जगह भूस्खलन की घटनाएं हुई हैं, जिससे मकान, सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इसके परिणामस्वरूप दूरदराज के कई गांवों का बाहरी दुनिया से संपर्क टूट गया है और स्थानीय लोग संकट में फंसे हैं। हादसे में कई लोगों की मौत की खबर है और कुछ लोग मलबे में फंसे हुए हैं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस दुखद घटना पर शोक जताया और शोकसंतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने राहत एवं बचाव कार्यों में सफलता की प्रार्थना की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दार्जिलिंग पुल दुर्घटना में लोगों की मौत पर दुःख व्यक्त किया और प्रभावित परिवारों के साथ अपनी संवेदनाएं साझा की। पीएम ने कहा कि प्रशासन प्रभावित इलाकों की स्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए है और हरसंभव सहायता प्रदान की जा रही है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस हादसे पर गहरा दुख जताया। उन्होंने बताया कि एनडीआरएफ की टीम घटनास्थल पर पहुंच चुकी है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त दल भी तैयार हैं। स्थानीय प्रशासन, पुलिस और आपदा मोचन दल राहत और बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं। मिरिक झील क्षेत्र, सरसली, जसबीरगांव, मिरिक बस्ती और धार गांव (मेची) जैसे प्रभावित क्षेत्रों में एनडीआरएफ बचाव अभियान चला रहा है। धार गांव में भूस्खलन से कई मकान ढह गए, लेकिन मलबे से कम से कम चार लोगों को सुरक्षित निकाला गया।
भूस्खलन के कारण मिरिक-सुखियापोखरी सड़क सहित कई प्रमुख मार्ग अवरुद्ध हो गए हैं। इसके अलावा, कई पहाड़ी बस्तियों की संचार लाइनें भी टूट गई हैं, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में संपर्क बाधित हो गया है।भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने दार्जिलिंग और कलिम्पोंग सहित उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल के लिए 6 अक्टूबर तक अत्यधिक भारी वर्षा का ‘रेड अलर्ट’ जारी किया है। मौसम विभाग ने और अधिक भूस्खलन होने तथा सड़कें बंद होने की चेतावनी दी है। प्रशासन और राहत दलों ने प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और आपात आवश्यकताओं को पूरा करने का काम शुरू कर दिया है।
इस हादसे ने स्थानीय लोगों के जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। प्रशासन, एनडीआरएफ और अन्य बचाव दल लगातार राहत एवं बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं ताकि प्रभावित लोगों को हर संभव मदद पहुंचाई जा सके और आगे संभावित खतरों से उन्हें सुरक्षित रखा जा सके।