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06-Jan-2026 07:28 AM
By First Bihar
Nitish government scheme for weavers : बिहार की नीतीश सरकार ने राज्य के बुनकरों को आर्थिक संबल देने की दिशा में एक अहम फैसला लिया है। सरकार राज्य के निबंधित बुनकरों को 15-15 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देगी। यह राशि कार्यपूंजी के रूप में सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाएगी, ताकि वे अपने काम को दोबारा खड़ा कर सकें और आजीविका को मजबूती मिल सके। सरकार ने इस योजना के लिए कुल तीन करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जिसमें से तत्काल एक करोड़ रुपये का आवंटन भी कर दिया गया है। उद्योग विभाग ने योजना को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
राज्य में इस समय लगभग एक लाख बुनकर हैं, जिनमें से 70 से 75 हजार बुनकर सक्रिय माने जा रहे हैं। हालांकि इनमें निबंधित बुनकरों की संख्या महज करीब सात हजार के आसपास है। सरकार की यह सहायता फिलहाल निबंधित बुनकरों को ही दी जाएगी। लंबे समय से आर्थिक तंगी झेल रहे बुनकरों के लिए यह राहत भरी खबर मानी जा रही है। कच्चे माल की बढ़ती कीमत, बाजार में प्रतिस्पर्धा और सीमित पूंजी के कारण बुनकरों की स्थिति लगातार खराब होती जा रही थी।
आर्थिक संकट के कारण कई बुनकर न केवल अपने परंपरागत काम को ठीक से नहीं कर पा रहे हैं, बल्कि बड़ी संख्या में लोग इस पेशे को छोड़ने को भी मजबूर हो चुके हैं। इससे न केवल उनकी व्यक्तिगत आर्थिक स्थिति बिगड़ी है, बल्कि राज्य की पारंपरिक हस्तकरघा और रेशम उद्योग को भी नुकसान पहुंचा है। सरकार ने इस गंभीर स्थिति को देखते हुए माना है कि बुनकरों को तत्काल आर्थिक सहायता देना अब अपरिहार्य हो गया है।
उद्योग विभाग के निर्देश पर सभी संबंधित महाप्रबंधक और जिला उद्योग केंद्र लाभुक पात्र बुनकरों की सूची तैयार करेंगे। इस सूची में बुनकरों का नाम, पंजीकरण विवरण और बैंक खाता संबंधी जानकारी शामिल होगी। इसके बाद यह पूरी जानकारी हस्तकरघा एवं रेशम निदेशालय को भेजी जाएगी, ताकि निर्धारित प्रक्रिया के तहत सीधे खाते में राशि भेजी जा सके।
इस योजना से पहले राज्य के कई जिलों में बुनकरों की स्थिति की गहन जांच कराई गई थी। पटना, भागलपुर, बांका, गया, औरंगाबाद, रोहतास, कैमूर, नालंदा, नवादा, सीवान, पश्चिम चंपारण और मधुबनी जैसे जिलों के जिला उद्योग केंद्रों द्वारा बुनकरों की वास्तविक स्थिति का आकलन किया गया। जांच में सामने आया कि बड़ी संख्या में बुनकर बेहद खराब आर्थिक हालात में जीवन यापन कर रहे हैं।
हाल ही में उद्योग विभाग स्तर पर बुनकरों की समस्याओं को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक भी आयोजित की गई थी। इस बैठक में बुनकरों की मौजूदा स्थिति की व्यापक समीक्षा की गई और यह निष्कर्ष निकाला गया कि यदि उन्हें तत्काल आर्थिक सहायता नहीं दी गई, तो यह परंपरागत उद्योग और अधिक कमजोर हो जाएगा। इसी क्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी उद्योग विभाग को बुनकरों के लिए समुचित कार्ययोजना बनाने का निर्देश दिया था, जिसमें आर्थिक मदद को प्राथमिकता देने की बात कही गई थी।
इस पूरे मामले पर उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि सरकार बुनकरों को विशेष सहायता देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि योजना के तहत सीधे बुनकरों के खाते में पैसा भेजा जाएगा, ताकि किसी तरह की बिचौलिया व्यवस्था न रहे। मंत्री ने कहा, “हम बुनकरों की आर्थिक स्थिति सुधारना चाहते हैं, ताकि वे बेहतर ढंग से काम कर सकें और अपने पारंपरिक व्यवसाय को आगे बढ़ा सकें।”सरकार की यह पहल न केवल बुनकरों को तत्काल राहत देगी, बल्कि बिहार के हस्तकरघा उद्योग को पुनर्जीवित करने की दिशा में भी एक मजबूत कदम साबित हो सकती है।