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06-Jan-2026 03:02 PM
By Viveka Nand
Bihar Transport: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने सितंबर 2025 में फर्जीवाड़े के आरोप में तीन स्वचालित वाहन फिटनेस जांच केंद्रों को बंद कर दिया था. साथ ही राज्य सरकार के परिवहन विभाग को आदेश दिया था कि जांच टीम गठित कर वैसे सभी केंद्रों की जांच कर रिपोर्ट MORTH को दें. दरअसल, इन एटीएस पर आरोप हैं कि गाड़ी के सेंटर्स पर पहुंचे बिना फिटनेस का प्रमाण पत्र जारी किया गया. मंत्रालय के राजपत्र में कहा गया है कि एटीएस सीसीटीवी से लैश होंगे, साथ ही फुटेज को छह माह तक सुरक्षित रखना है. इतना ही नहीं राज्य या केंद्र सरकार की एजेंसी को अगर जरूरत पड़ी तो संग्रहित सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराना होगा. लेकिन यहां के एटीएस संचालक जांच टीम को सीसीटीवी फुटेज ही नहीं दे रहे.
बिना गाड़ी जांच ही सर्टिफिकेट देने पर तीन एटीएस हैं बंद
सड़क परिवहन मंत्रालय का जो राजपत्र है, उसमें एटीएस संचालन को लेकर जारी गाइडलाइन का जिक्र है. सड़क परिवहन मंत्रालय की अधिसूचना में कहा गया है कि प्रत्येक सुविधा केंद्र के प्रवेश द्वार और प्रत्येक कंसोल के अंत में सीसीटीवी कैमरे लगाना है. ताकि वाहन के संपुर्ण परीक्षण की सुस्पष्ट दृश्यता और व्यापक कवरेज सुनिश्चित हो सके. साथ ही डेटा को छह माह की अवधि तक संग्रहित किया जाना चाहिए. इसके अतिरिक्त राज्य या संघ राज्य क्षेत्र सरकार द्वारा आवश्यकतानुसार, सुविधा में संस्थापित सीसीटीवी फुटेज तक पहुंच अधिकृत एजेंसियों को प्रदान की जा सकती है.
कमेटी को दो बिंदुओं पर करनी थी जांच
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा सख्त एक्शन लिए जाने के बाद बिहार के परिवहन विभाग ने जांच के लिए एक कमिटी बनाई. जांच टीम को पटना, दरभंगा और भागलपुर के एक-एक बंद एटीएस की जांच करनी है. जांच टीम को इस बिंदु पर जांच करना था कि जिन गाड़ियों का फिटनेस प्रमाण पत्र जारी किया गया है, वो गाड़ी एटीएस तक पहुंची या नहीं ? साथ ही वाहनों की जांच के समय क्या परिणाम में हेरफेर किया गया है ? जांच के लिए गाड़ियां स्वचालित परीक्षण केंद्र ( एटीएस) तक आई या नहीं ?
सबसे बड़े आरोप की नहीं हुई जांच..सीसीटीवी फुटेज ही नहीं था
जानकारी के मुताबिक, जांच टीम रिपोर्ट तैयार करने के लिए बंद पड़े एक एटीएस पर गई. टीम ने सीसीटीवी फुटेज की मांग की तो बताया गया कि स्वचालित परीक्षण केंद्र का AFMS एक्सेस सितंबर 2025 से ही बंद है. साथ ही सीसीटीवी फुटेज की स्टोरेज क्षमता 8टीबी ही है. लिहाजा संचालक जांच कमेटी को सीसीटीवी फुटेज नहीं दिखा पाए. कमेटी जब सीसीटीवी फुटेज ही नहीं देख पाई तो पूर्व में जिस गाड़ियों के फिटनेस प्रमाण पत्र जारी किए गए, वो एटीएस तक पहुंची या नहीं, इसकी जांच ही नहीं हो पाई. यानि सबसे बड़े आरोप का कोई निष्कर्ष नहीं निकला. हालांकि सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय की तरफ से स्पष्ट गाइडलाइन है कि सीसीटीवी फुटेज छह महीने तक संग्रहित रखना है.
बता दें, बिहार में संचालित स्वचालित वाहन परीक्षण केंद्रों पर बड़ा खेल हो रहा है. लगातार मिल रही शिकायतों के बाद फर्जीवाड़ा करने वाले तीन एटीएस पर मोर्थ का डंडा चला है. इसके बाद भी फर्जीवाड़ा रूकने का नाम नहीं ले रहा. वर्तमान में संचालित अन्य एटीएस के बारे में भी इस तरह की शिकायत मिल रही है कि सेंटर तक गाड़ी पहुंचे ही, फिटनेस का प्रमाण पत्र जारी कर दिया जा रहा.