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12-Jan-2026 01:35 PM
By First Bihar
Bihar Sand Mining : बिहार में बालू खनन (Bihar Sand Mining) से होने वाली राजस्व प्राप्ति लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। राज्य के चार प्रमुख जिले—पटना, रोहतास, गया और औरंगाबाद—निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले काफी पीछे चल रहे हैं। खान एवं भू-तत्व निदेशक की समीक्षा बैठक में यह तथ्य सामने आने के बाद संबंधित जिलों को मार्च 2026 तक अपने लक्ष्य को पूरा करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में यह पता चला कि रोहतास जिले को चालू वित्तीय वर्ष में 426 करोड़ रुपये राजस्व संग्रह का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन दिसंबर 2025 तक सिर्फ 145 करोड़ रुपये ही वसूले जा सके हैं। इसी तरह गया ने 279 करोड़ रुपये के लक्ष्य में से 188 करोड़ रुपये, पटना ने 639 करोड़ रुपये के लक्ष्य में से 203 करोड़ रुपये और औरंगाबाद ने 512 करोड़ रुपये के लक्ष्य में से केवल 176 करोड़ रुपये का राजस्व ही संग्रहित किया।
राजस्व में इस कमी का असर न केवल इन चार जिलों पर बल्कि पूरे राज्य के खनन विभाग की योजनाओं और बजट पर पड़ रहा है। खान निदेशक ने कहा कि अवैध खनन, परिवहन में गड़बड़ी, ठेकों की प्रक्रिया में देरी और निगरानी की कमी इसके मुख्य कारण हो सकते हैं। विशेष रूप से अवैध खनन ने राजस्व संग्रह में बड़ा अंतर पैदा किया है। कई स्थानों पर नियमों के उल्लंघन के कारण राज्य को अपेक्षित राजस्व प्राप्त नहीं हो रहा है। वहीं, परिवहन और ठेके की प्रक्रियाओं में देरी ने भी लक्ष्य हासिल करने में बाधा डाली है।
खान निदेशक ने स्पष्ट किया कि बालू घाटों की नियमित जांच और ई-चालान प्रणाली का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना अनिवार्य है। उन्होंने संबंधित जिलों के जिला खनन पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे राजस्व संग्रह की प्रगति की प्रतिदिन समीक्षा करें और दैनिक लक्ष्य तय करके वसूली सुनिश्चित करें। बैठक में यह भी चेतावनी दी गई कि मार्च 2026 तक यदि निर्धारित लक्ष्य प्राप्त नहीं किया गया, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसमें अवैध खनन रोकने, घाटों की निगरानी बढ़ाने और ई-चालान प्रणाली के प्रभावी संचालन की जिम्मेदारी भी शामिल है।
सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार के लिए बालू खनन राजस्व विशेष महत्व रखता है क्योंकि इससे सड़क, पुल और अन्य अवसंरचना परियोजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध होते हैं। राजस्व लक्ष्य से पीछे रहने के कारण विकास योजनाओं पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। विभाग ने चार जिलों में विशेष अभियान चलाने की योजना बनाई है। इसमें अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई, घाटों पर नियमित निरीक्षण, ई-चालान प्रणाली का प्रभावी क्रियान्वयन और दैनिक लक्ष्य के अनुसार काम करने के निर्देश शामिल हैं। अधिकारियों को नियमित रिपोर्ट प्रस्तुत करने और समस्याओं के त्वरित समाधान की जिम्मेदारी दी गई है।
खंडित आंकड़ों के अनुसार, पटना, रोहतास, गया और औरंगाबाद में लक्ष्य के मुकाबले राजस्व संग्रह में अंतर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। उदाहरण के लिए, पटना ने 639 करोड़ रुपये के लक्ष्य में से मात्र 203 करोड़ रुपये ही राजस्व संग्रह किया। इसी तरह रोहतास, गया और औरंगाबाद के आंकड़े भी लक्ष्य से काफी कम हैं।
खान निदेशक ने बैठक में साफ किया कि केवल योजनाएं बनाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि उनका कड़ाई से पालन करना आवश्यक है। यह संदेश राज्य के खनन विभाग और संबंधित अधिकारियों के लिए स्पष्ट है कि बिहार में बालू खनन (Bihar Sand Mining) में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
कुल मिलाकर, बिहार में बालू खनन से राजस्व प्राप्ति की कमी को रोकने के लिए विभाग ने मार्च 2026 तक लक्ष्य पूरा करने के लिए विशेष कदम उठाए हैं। अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई, ई-चालान प्रणाली का प्रभावी क्रियान्वयन और दैनिक लक्ष्यों की समीक्षा इस अभियान के मुख्य हिस्से होंगे।