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15-Jun-2025 08:05 AM
By First Bihar
Bihar News: बिहार के सभी नदी घाटों से बालू के खनन पर पूर्ण रूप से पाबंदी लागू हो जाएगी। यह पाबंदी मानसून अवधि के दौरान पर्यावरण संरक्षण और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में लगाई जा रही है। इसके लिए एक अवधि भी निर्धारित किया गया है और यह बताया है कि कब से कब तक राज्य में बालु खनन बंद रहेगा। इस निर्धारित अवधी से पहले कोई भी बंदोबस्तधारी या अन्य निजी संस्थान नदियों से बालू नहीं निकाल सकेंगे।
बता दें कि आज यानि रविवार से बिहार में 15 जून 2025 से 30 सितंबर 2025 तक राज्य के सभी नदी घाटों से बालू के खनन पर पूर्ण रूप से पाबंदी लागू हो जाएगी। खान एवं भूतत्व विभाग के सचिव दिवेश सेहरा ने जानकारी दी कि इस अवधि के लिए राज्य भर में 30 लाख क्यूबिक फीट (सीएफटी) से अधिक बालू का भंडारण घाटों के सेकेंड्री लोडिंग प्वाइंट्स पर पहले से ही किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, अधिकृत स्टॉकिस्टों को बालू भंडारण का लाइसेंस भी दिया गया है, ताकि आपूर्ति में किसी प्रकार की बाधा न आए।
विभाग ने यह भी बताया कि पहले जब्त किया गया बालू भी बिक्री के लिए उपलब्ध रहेगा। सभी जिलों के जिलाधिकारियों (डीएम) को इस संबंध में पत्र भेजकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा चुके हैं। इस दौरान राज्य के बाहर बालू भेजने पर पूर्ण रोक रहेगी और उत्तर प्रदेश तथा झारखंड की सीमावर्ती जिलों में कैमूर, गया, नवादा आदि से अन्य राज्यों में बालू की आपूर्ति नहीं की जाएगी।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, मानसून के दौरान आमतौर पर निजी क्षेत्र में बालू की मांग घट जाती है, क्योंकि निर्माण कार्यों में लगे लोग खेती के कार्यों में व्यस्त हो जाते हैं। हालांकि, सरकारी परियोजनाओं और बुनियादी ढांचा विकास से जुड़े निर्माण कार्यों को देखते हुए सरकार ने पर्याप्त बालू की व्यवस्था की है। विभागीय स्तर पर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी सरकारी एजेंसी को निर्माण सामग्री की कमी न हो।
मानसून अवधि में बालू खनन पर रोक का मुख्य उद्देश्य नदियों में रहने वाले जीव-जंतुओं की सुरक्षा और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखना है। एनजीटी के आदेशानुसार नदियों में मशीनों से खनन पर रोक से मछलियों और अन्य जल जीवों के प्राकृतिक आवास को संरक्षित किया जा सकेगा।
राज्य सरकार के आपदा प्रबंधन समूह और संबंधित जिलों के डीएम और एसपी को यह निर्देश दिया गया है कि वे पाबंदी का सख्ती से पालन कराएं और अवैध खनन पर पूरी तरह रोक लगाएं। बालू ढुलाई की मॉनिटरिंग के लिए भी विशेष निगरानी की व्यवस्था की गई है।
एक अनुमान के अनुसार बिहार में सालाना 50 करोड़ सीएफटी बालू की खपत होती है। लेकिन अवैध खनन और अनियमितताओं के कारण वास्तविक निकासी इससे कम रह जाती है। इसलिए सरकार लगातार इस क्षेत्र में सुधारात्मक कदम उठा रही है। बिहार में पीला बालू के कुल 457 घाट चिन्हित हैं, जिनमें से फिलहाल 161 घाट चालू हैं। 37 घाटों को सरेंडर किए जाने के कारण उनके दोबारा बंदोबस्ती की प्रक्रिया जारी है।