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Bihar News: बिहार के इस शहर में धूल भी बनी जानलेवा, विशेषज्ञों की चेतावनी जारी

Bihar News: CUSB के अध्ययन में इस जिले के 8 बस स्टैंडों की सड़क धूल में जस्ता, तांबा, सीसा जैसे भारी धातुओं का उच्च स्तर पाया गया। यातायात और निर्माण से प्रदूषण बढ़ रहा है, यात्रियों-बच्चों के लिए खतरा..

Bihar News
प्रतीकात्मक
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Deepak Kumar
Deepak Kumar
3 मिनट

Bihar News: बिहार के गया शहर की व्यस्त सड़कों पर जमा धूल अब स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन रही है। दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के एक नए अध्ययन में शहर के आठ प्रमुख बस स्टैंडों पर सड़क किनारे की धूल में जस्ता, तांबा, सीसा और निकल जैसी भारी धातुओं का खतरनाक स्तर पाया गया है। यह अध्ययन अरेबियन जर्नल ऑफ जियोसाइंसेज में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि अनियंत्रित शहरी विकास और बढ़ते यातायात उत्सर्जन से आने वाले समय में यात्रियों, विक्रेताओं और स्कूली बच्चों के लिए प्रदूषण का जोखिम काफी बढ़ सकता है।


अध्ययन के लिए गया रेलवे स्टेशन के पास, किरानी घाट, टेकरी, पंचाननपुर, डेल्हा, मानपुर, गांधी मैदान और सिकारिया मोड़ जैसे व्यस्त बस स्टैंड चुने गए। इन जगहों की धूल में जस्ता और तांबे की मात्रा प्राकृतिक स्तर से काफी अधिक पाई गई। शोधकर्ता राजेश कुमार रंजन, कुमारी सौम्या और अलविया असलम ने पाया कि ये धातुएं मुख्य रूप से वाहनों के धुएं, ब्रेक-टायर घिसाव, ईंधन दहन और निर्माण कार्यों से आ रही हैं। वर्तमान में प्रदूषण का स्तर निम्न से मध्यम है, लेकिन लगातार बढ़ोतरी चिंताजनक है।


भारी धातुएं सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर फेफड़ों, हृदय और नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकती हैं। लंबे समय तक संपर्क में रहने से कैंसर, श्वसन रोग और बच्चों में विकास संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। गया जैसे धार्मिक और पर्यटन शहर में लाखों यात्री रोज आते-जाते हैं, इसलिए बस स्टैंडों पर यह खतरा और गंभीर है। शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि सड़क धूल की नियमित निगरानी, वाहन उत्सर्जन पर सख्ती, निर्माण स्थलों पर पानी छिड़काव और हरियाली बढ़ाने जैसे उपाय तुरंत अपनाए जाएं।


प्रशासन को अब पर्यावरणीय मानकों को सख्ती से लागू करना होगा, ताकि पितृपक्ष और पर्यटन सीजन में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सेहत सुरक्षित रहे। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अभी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य संकट गंभीर रूप ले सकता है। गया की धूल में छिपा यह जहर अब सबके लिए चेतावनी की घंटी है।