Bihar Politics : BJP ने दिया नीतीश कुमार को धोखा, चाचा को निमंत्रण देने के सवाल पर बोले तेजस्वी ....बिहार की जनता चाहती है सत्ता परिवर्तन Petrol-Diesel Price Today: कच्चे तेल में अचानक उछाल, क्या आपके शहर में भी बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम? जानिए Bihar Politics : शादी में जिसने किया था कार ड्राइव उससे ही पहला चुनाव हार गए थे नीतीश कुमार , जानिए क्या था नाम और कब हुआ था चुनाव नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? गिरिराज सिंह ने दिया जवाब नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? गिरिराज सिंह ने दिया जवाब Nitish Kumar : राज्यसभा जाने के बाद भी इस दिन तक CM की कुर्सी पर बने रहेंगे नीतीश कुमार, बिहार में इनके हाथ में होगी JDU की कमान! CTET 2026 उम्मीदवारों के लिए बड़ा अपडेट: आज जारी होगा आंसर-की और OMR शीट, ऐसे करें डाउनलोड Nitish Kumar : गजब संयोग: मार्च महीने में ही पहली बार CM पद की शपथ ली थी... नीतीश कुमार मार्च में ही छोड़ रहे मुख्यमंत्री की कुर्सी बिहार में सियासी उलटफेर के बीच BJP दफ्तर पहुंचे राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, थोड़ी देर में राज्यसभा के लिए करेंगे नामांकन बिहार में सियासी उलटफेर के बीच BJP दफ्तर पहुंचे राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, थोड़ी देर में राज्यसभा के लिए करेंगे नामांकन
01-Jan-2026 07:09 AM
By FIRST BIHAR
Bihar News: बिहार की पांच दर्जन से अधिक नदियों का अस्तित्व गंभीर खतरे में है। जीवनदायिनी कही जाने वाली ये नदियां अब विलुप्त होने के कगार पर पहुंच चुकी हैं। अतिक्रमण, जलवायु परिवर्तन, बढ़ते प्रदूषण, समुचित प्रबंधन के अभाव और सरकारी तंत्र की लापरवाही के कारण कई नदियां अंतिम सांसें ले रही हैं। हालात ऐसे हो गए हैं कि अधिकांश नदियां अब सिर्फ बरसात के मौसम में ही बहती नजर आती हैं।
यह संकट बिहार के किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश में नदियों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। कोसी, सीमांचल और पूर्वी बिहार के जिलों में बहने वाली एक दर्जन से अधिक नदियों के वजूद पर खतरा मंडरा रहा है। सहरसा जिले में कोसी की सहायक नदियां तिलावे और सुरसर लगभग समाप्ति की ओर हैं। सिमरी बख्तियारपुर के धनुपुरा इलाके में कमला बलान, सिमरटोका नदी, दह कोसी उपधारा और आगर नदी पूरी तरह सूख चुकी हैं। वहीं अररिया जिले के रानीगंज प्रखंड से गुजरने वाली कारी कोसी नदी भी अस्तित्व के संकट से जूझ रही है।
कटिहार जिले में कोसी धारा में अत्यधिक गाद जमा होने के कारण नदी लगभग विलुप्त हो चुकी है। कभी उन्मुक्त बहाव के लिए पहचानी जाने वाली सौरा नदी अब लगातार अतिक्रमण के चलते नाले का रूप लेती जा रही है। जमुई जिले के लक्ष्मीपुर प्रखंड के सबलपुर जंगली क्षेत्र से बहने वाली दुहवा और सिर्मनिया नदियां अपना अस्तित्व खो चुकी हैं। इन नदियों में पहाड़ों से लगभग पांच किलोमीटर तक पानी का बहाव होता था, लेकिन अब केवल बरसात के दिनों में ही इनमें पानी दिखाई देता है।
लखीसराय जिले की प्रमुख नदियों में शामिल किऊल और हरोहर नदी भी अतिक्रमण की चपेट में हैं, जिससे इनके अस्तित्व पर खतरा बढ़ गया है। बांका जिले की बदुआ, चांदन, ओढ़नी और चीर नदियां भी अंतिम दौर में पहुंच चुकी हैं। नदियों के सूखने से इलाके में सिंचाई और खेती पर सीधा असर पड़ रहा है और किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थिति यह है कि कई नदियों के बहाव क्षेत्र में अब किसान खेती करने लगे हैं। मानसून गुजरते ही नदी के बीच बड़े-बड़े मैदान बन जाते हैं, जो बच्चों के खेल मैदान या मेलों का स्थल बन जाते हैं। नदी सूखने के बाद अतिक्रमण तेजी से बढ़ रहा है, जिससे इनके पुनर्जीवन की संभावनाएं भी कमजोर होती जा रही हैं। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में बिहार की कई नदियां केवल नाम मात्र की रह जाएंगी।