Bihar Politics : पटना इस समय राजनीतिक हलचलों का केंद्र बना हुआ है। कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की बैठक के आयोजन के साथ ही प्रदेश की सियासत में नई गतिविधियों ने जोर पकड़ लिया है। इस बैठक के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव से मुलाकात करेंगे। माना जा रहा है कि इस मुलाकात में विधानसभा चुनाव की तैयारियों और खासकर सीट बंटवारे पर गहन चर्चा होगी। बिहार की राजनीति में यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है क्योंकि विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक की रणनीति में बिहार की भूमिका निर्णायक मानी जाती है।


पटना में हो रही कांग्रेस कार्य समिति की बैठक पार्टी के लिए कई मायनों में खास है। कांग्रेस लंबे समय बाद बिहार में इतनी बड़ी राजनीतिक बैठक कर रही है। सीडब्ल्यूसी की इस बैठक में राष्ट्रीय स्तर के नेताओं की मौजूदगी पार्टी के कार्यकर्ताओं को नया उत्साह देने के साथ-साथ संगठन को मजबूती देने का संदेश भी है। बैठक में संगठन की वर्तमान स्थिति, आने वाले चुनाव की रणनीति, गठबंधन की मजबूती और भाजपा को घेरने की नीति पर चर्चा की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस बिहार में अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने की रणनीति पर काम कर रही है। पिछले कई दशकों में पार्टी यहां धीरे-धीरे हाशिए पर चली गई थी। अब वह गठबंधन की ताकत से फिर से अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाहती है।


सीडब्ल्यूसी बैठक के बाद राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में उत्सुकता बढ़ा दी है। बिहार में महागठबंधन (आरजेडी, कांग्रेस और अन्य दल) की मजबूती इस मुलाकात पर टिकी हुई है। तेजस्वी यादव युवाओं के बीच लोकप्रिय नेता हैं और राहुल गांधी भी युवाओं के बीच अपनी छवि को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। दोनों नेताओं की मुलाकात से यह संदेश जाएगा कि गठबंधन का शीर्ष नेतृत्व एकजुट है।


माना जा रहा है कि इस मुलाकात में सीट बंटवारे का मुद्दा प्रमुख रहेगा। बिहार की कुल 243 विधानसभा सीटों में पिछले चुनाव में भाजपा और उसकी सहयोगी पार्टियों का प्रदर्शन बेहद अच्छा रहा था। ऐसे में विपक्षी दलों के लिए जरूरी है कि वे सीटों पर आपसी तालमेल बैठाकर मैदान में उतरें। बिहार में सीट बंटवारा हमेशा से एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। आरजेडी खुद को राज्य की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी मानती है और उसका दावा सबसे अधिक सीटों पर रहता है। दूसरी ओर, कांग्रेस भी चाहती है कि उसे पर्याप्त सीटें मिलें ताकि वह अपने संगठन को मजबूत कर सके। साथ ही, वाम दलों की भी दावेदारी रहती है।


सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस चाहती है कि उसे कम से कम 70 सीटें मिलें, जबकि आरजेडी का रुख यह है कि कांग्रेस को 60 सीटों से अधिक न दिया जाए। इसके अलावा सीएम फेस का नाम आगे न किया जाए इस खींचतान के बीच राहुल और तेजस्वी की मुलाकात से एक संतुलित फार्मूला निकालने की कोशिश होगी।


इंडिया ब्लॉक की रणनीति साफ है कि भाजपा को हराने के लिए सभी दलों को मिलकर चुनाव लड़ना होगा। अगर सीट बंटवारे को लेकर असहमति बनी रहती है तो इसका सीधा फायदा भाजपा को मिल सकता है। यही वजह है कि राहुल और तेजस्वी की मुलाकात को गठबंधन की एकजुटता का प्रतीक बताया जा रहा है। इसके अलावा, इस बैठक में चुनाव प्रचार की संयुक्त रणनीति, साझा घोषणापत्र और मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है। बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों को विपक्ष चुनाव में केंद्र में लाना चाहता है।