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16-Feb-2026 09:01 PM
By First Bihar
PATNA:बिहार के ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी ने पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में योगदान दिया। कुलपति प्रो. उपेन्द्र प्रसाद सिंह ने उन्हें नियुक्ति पत्र सौंपा। पटना के एएन कॉलेज में उनकी पोस्टिंग हुई है। जहां वे पॉलिटिकल साइंस पढाएंगे। बता दें कि उनकी नियुक्ति पर नाम में अंतर को लेकर सियासी विवाद हुआ था, जिसे अब सुलझा लिया गया है। नाम विवाद में क्लीन चिट मिलने के बाद नियुक्ति पत्र सौंपा गया है। नीतीश के मंत्री अशोक चौधरी अब कॉलेज में पढ़ाते दिखेंगे।
बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग से क्लीन चिट मिलने के बाद शिक्षा विभाग ने मंत्री अशोक चौधरी की नियुक्ति को लेकर पत्र जारी किया। जिसके बाद पाटलिपुत्र यूनिवर्सिटी के कुलपति उपेंद्र प्रसाद और कुलसचिव अबू बकर रिजवी ने उन्हें नियुक्ति पत्र सौंपा। इस मौके पर मगध विश्वविद्यालय के कुलपति शशि प्रताप शाही भी मौजूद थे। ज्वाइनिंग के बाद मंत्री अशोक चौधरी ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें शेयर की। अशोक चौधरी ने कहा कि आज का दिन उनके लिए गौरव का क्षण है। वे पाटलिपुत्र यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में अपनी सेवा देने जा रहे हैं।
बता दें कि बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग ने 2020 में विभिन्न कॉलेजों में खाली पड़े पदों को भरने के लिए असिस्टेंट प्रोफेसर की बहाली निकाली थी। मंत्री अशोक चौधरी ने भी फॉर्म भरा था। साक्षात्कार के बाद 2025 में बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग ने रिजल्ट जारी किया था। जिसमें 274 उम्मीदवारों का चयन किया गया था। सफल उम्मीदवारों की लिस्ट में मंत्री अशोक चौधरी का भी नाम शामिल था। आवेदन में कुछ कमी पाए जाने के बाद शिक्षा विभाग ने उनकी नियुक्ति को होल्ड पर रखा था।
उनके नाम को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। यह कहा गया था कि उनके सर्टिफिकेट में नाम अशोक कुमार है, जबकि चुनावी हलफनामा में अशोक चौधरी है। इसी वजह से उनकी नियुक्ति को रोक दिया गया था। बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग से क्लीन चिट मिलने के बाद शिक्षा विभाग ने मंत्री अशोक चौधरी को नियुक्ति पत्र जारी कर दिया। बता दें कि पीएचडी तक की पढ़ाई कर चुके 58 वर्षीय अशोक चौधरी अभी बिहार विधान परिषद के सदस्य हैं और लंबे समय से बिहार सरकार में मंत्री भी हैं।

नई जिम्मेदारी, नया संकल्प 🙏
— Dr. Ashok Choudhary (@AshokChoudhaary) February 16, 2026
आज मेरे लिए अत्यंत हर्ष और गौरव का क्षण है कि मैं #पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापक (Assistant Professor) के रूप में अपनी सेवाएँ प्रारम्भ करने जा रहा हूँ। मैं विशेष रूप से हमारे मित्र प्रो. एस. पी. शाही जी, कुलपति, मगध विश्वविद्यालय के… pic.twitter.com/PLoLI6GOBP