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Bihar teachers : बिहार के शिक्षकों के लिए नया आदेश, संपत्ति विवरण के बिना नहीं मिलेगा वेतन; विभाग ने जारी किया लेटर

बिहार सरकार ने सरकारी शिक्षकों के लिए एक नया आदेश जारी किया है, जिसके तहत सभी शिक्षकों को अपनी चल और अचल संपत्ति का पूरा ब्योरा विभाग को देना अनिवार्य होगा। यह नियम प्रधानाध्यापक, विशिष्ट शिक्षक, विद्यालय अध्यापक और नियोजित शिक्षक सहित सभी कोटि के सर

26-Dec-2025 08:22 AM

By First Bihar

Bihar teachers : बिहार सरकार ने राज्य के सरकारी शिक्षकों के लिए एक अहम और सख्त आदेश जारी किया है। इस नए निर्देश के तहत अब सरकारी स्कूलों में कार्यरत सभी श्रेणी के शिक्षकों को अपनी चल और अचल संपत्ति का पूरा ब्योरा विभाग को देना अनिवार्य होगा। जब तक शिक्षक यह विवरणी जमा नहीं करेंगे, तब तक उन्हें जनवरी महीने का वेतन नहीं मिलेगा। इस फैसले से राज्यभर के शिक्षकों में हलचल मच गई है।


शिक्षा विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार यह नियम प्रधानाध्यापक, विशिष्ट शिक्षक, विद्यालय अध्यापक और नियोजित शिक्षक सहित सभी कोटि के सरकारी शिक्षकों पर समान रूप से लागू होगा। यानी किसी भी स्तर या श्रेणी के शिक्षक को इस प्रक्रिया से छूट नहीं दी गई है। विभाग का कहना है कि यह कदम पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।


गुरुवार को विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक शिक्षकों को अपनी चल संपत्ति (जैसे नकद, बैंक जमा, वाहन, आभूषण आदि), अचल संपत्ति (जैसे जमीन, मकान, फ्लैट आदि) के साथ-साथ सभी तरह के दायित्वों (लोन, कर्ज आदि) का भी स्पष्ट विवरण देना होगा। यह जानकारी A-4 साइज के सादे कागज पर कंप्यूटर में टंकित कर दी जाएगी।


संपत्ति विवरणी कुल तीन पन्नों की होगी और इसके साथ संबंधित अनुलग्नक भी संलग्न करना अनिवार्य होगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रत्येक पेज के नीचे शिक्षक के हस्ताक्षर जरूरी होंगे। बिना हस्ताक्षर के विवरणी मान्य नहीं मानी जाएगी।


शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि यह संपत्ति विवरण 31 दिसंबर की स्थिति के आधार पर तैयार किया जाएगा। यानी शिक्षक को वर्ष के अंत तक उनके पास मौजूद सभी संपत्तियों और दायित्वों का उल्लेख करना होगा। यह निर्देश बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन सोसायटी के आदेश के तहत जारी किया गया है।


दरअसल, इस मिशन सोसायटी ने राज्य के समूह ‘क’, ‘ख’ और ‘ग’ के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए संपत्ति विवरण देना अनिवार्य कर दिया है। चूंकि सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षक भी इन्हीं श्रेणियों में आते हैं, इसलिए उन्हें भी इस नियम के दायरे में लाया गया है।


इस आदेश की सबसे सख्त शर्त यह है कि संपत्ति विवरण जमा न करने पर शिक्षकों का वेतन रोक दिया जाएगा। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक शिक्षक अपनी प्रॉपर्टी और दायित्वों की जानकारी विभाग को उपलब्ध नहीं कराएंगे, तब तक जनवरी महीने का वेतन जारी नहीं किया जाएगा।


विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यह व्यवस्था केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि इसे गंभीरता से लागू किया जाएगा। सभी जिलों के शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षकों से समय पर संपत्ति विवरण प्राप्त करें और उसकी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजें।


इस आदेश के बाद शिक्षकों के बीच मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ शिक्षक इसे पारदर्शिता की दिशा में सही कदम बता रहे हैं, वहीं कई शिक्षक इसे वेतन से जोड़ने को लेकर नाराजगी जता रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि पहले से ही उन्हें कई तरह की प्रशासनिक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है और अब संपत्ति विवरण के नाम पर एक और बोझ डाल दिया गया है।


हालांकि शिक्षा विभाग का तर्क है कि यह प्रक्रिया सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए समान रूप से लागू है और इसमें शिक्षकों के साथ किसी तरह का भेदभाव नहीं किया गया है। विभाग का मानना है कि इससे सरकारी तंत्र में ईमानदारी और जवाबदेही बढ़ेगी।


कुल मिलाकर, बिहार सरकार का यह नया आदेश राज्य के शिक्षकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। संपत्ति विवरण देना अब केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि वेतन से जुड़ी अनिवार्य शर्त बन चुका है। ऐसे में सभी शिक्षकों को तय समय सीमा के भीतर अपनी चल-अचल संपत्ति और दायित्वों का पूरा विवरण तैयार कर विभाग को सौंपना होगा, ताकि उन्हें वेतन भुगतान में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।