UPI पेमेंट में बड़ा बदलाव: अब UPI ID या मोबाइल नंबर डालकर नहीं कर पाएंगे भुगतान, जानें नया तरीका

UPI Payment Security: भारत में डिजिटल भुगतान अब और भी सुरक्षित होने जा रहा है। NPCI ने यूपीआई प्रणाली में बड़ा बदलाव किया है, जिसमें उपयोगकर्ताओं को अब मैन्युअल रूप से यूपीआई आईडी टाइप करने की बजाय सीधे ऐप आइकन क्लिक या क्यूआर कोड स्कैन करके भुगतान

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 05, 2026, 2:26:13 PM

UPI पेमेंट में बड़ा बदलाव: अब UPI ID या मोबाइल नंबर डालकर नहीं कर पाएंगे भुगतान, जानें नया तरीका

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UPI Payment Security: भारत में डिजिटल भुगतान तेजी से बढ़ रहा है और इसी को अधिक सुरक्षित और आसान बनाने के लिए National Payments Corporation of India (एनपीसीआई) ने यूपीआई प्रणाली में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब धीरे-धीरे उस तरीके को खत्म किया जा रहा है जिसमें उपयोगकर्ता ऑनलाइन भुगतान करते समय अपनी यूपीआई आईडी या मोबाइल नंबर खुद टाइप करते थे।


अब इस पुराने तरीके की जगह सीधे यूपीआई अनुप्रयोग के चिन्ह पर क्लिक करके या क्यूआर कोड स्कैन करके भुगतान करने का विकल्प दिया जाएगा। इस बदलाव का उद्देश्य डिजिटल भुगतान को पहले से अधिक सुरक्षित बनाना और धोखाधड़ी की संभावनाओं को कम करना है। यह व्यवस्था 28 फरवरी 2026 से लागू करने की योजना के तहत लाई गई है।


क्या होता था यूपीआई कलेक्ट

यूपीआई कलेक्ट ऑनलाइन भुगतान करने का एक ऐसा तरीका था जिसमें ग्राहक अपनी यूपीआई आईडी या मोबाइल नंबर खुद दर्ज करता था। जब उपयोगकर्ता किसी वेबसाइट या अनुप्रयोग से कोई वस्तु खरीदता था, तब उसे भुगतान के लिए अपनी यूपीआई आईडी या मोबाइल नंबर डालना पड़ता था।


इसके बाद वह वेबसाइट या अनुप्रयोग भुगतान लेने के लिए उपयोगकर्ता के यूपीआई अनुप्रयोग को एक अनुरोध भेजती थी। जब यह अनुरोध उपयोगकर्ता के मोबाइल पर पहुंचता था, तब वह अपने मोबाइल में मौजूद यूपीआई अनुप्रयोग खोलकर यूपीआई पिन डालता था और भुगतान पूरा करता था।


यही कारण है कि इस प्रक्रिया को “कलेक्ट” कहा जाता था, क्योंकि इसमें भुगतान लेने वाला प्लेटफॉर्म उपयोगकर्ता से पैसे लेने के लिए अनुरोध भेजता था और उपयोगकर्ता उस अनुरोध को स्वीकार करके भुगतान करता था।


क्यों किया जा रहा है यह बदलाव

डिजिटल भुगतान बढ़ने के साथ-साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी और गलत भुगतान की समस्याएं भी सामने आने लगी थीं। कई बार उपयोगकर्ता गलती से गलत यूपीआई आईडी डाल देते थे या फिर फर्जी यूपीआई आईडी के कारण धोखाधड़ी हो जाती थी।


इन समस्याओं को कम करने के लिए एनपीसीआई ने निर्णय लिया कि ज्यादातर ऑनलाइन लेनदेन में मैन्युअल रूप से यूपीआई आईडी टाइप करने की जरूरत खत्म की जाए और उसकी जगह सीधे सुरक्षित विकल्प दिए जाएं।


इस नए बदलाव से क्या-क्या होगा

1. गलत यूपीआई आईडी डालने की संभावना कम होगी

2. भुगतान प्रक्रिया तेज होगी

3. धोखाधड़ी के मामलों में कमी आएगी

4. उपयोगकर्ताओं को भुगतान करना आसान होगा


अब कैसे होगा यूपीआई से भुगतान

नए सिस्टम के तहत अब उपयोगकर्ताओं को भुगतान करने के लिए दो मुख्य विकल्प दिए जाएंगे।


1. यूपीआई अनुप्रयोग का चिन्ह

जब आप किसी वेबसाइट या अनुप्रयोग पर भुगतान करेंगे तो वहां अलग-अलग यूपीआई अनुप्रयोगों के चिन्ह दिखाई देंगे।

यदि आप उस चिन्ह पर क्लिक करेंगे तो आपके मोबाइल में मौजूद यूपीआई अनुप्रयोग सीधे खुल जाएगा और वहां से आप यूपीआई पिन डालकर तुरंत भुगतान कर सकेंगे।


2. क्यूआर कोड स्कैन करना

दूसरा तरीका क्यूआर कोड के जरिए भुगतान का होगा। इसमें वेबसाइट या दुकान की ओर से एक क्यूआर कोड दिखाया जाएगा।

आप अपने मोबाइल के यूपीआई अनुप्रयोग से उस क्यूआर कोड को स्कैन करेंगे और फिर यूपीआई पिन डालकर भुगतान पूरा कर पाएंगे।

इन दोनों तरीकों से भुगतान करना पहले की तुलना में अधिक तेज और सुरक्षित माना जा रहा है।


इन यूपीआई अनुप्रयोगों से कर सकेंगे भुगतान

भारत में कई लोकप्रिय यूपीआई अनुप्रयोग मौजूद हैं जिनके जरिए उपयोगकर्ता आसानी से भुगतान कर सकते हैं। इनमें प्रमुख हैं:

  • Google Pay
  • PhonePe
  • Paytm


इन अनुप्रयोगों के जरिए उपयोगकर्ता क्यूआर कोड स्कैन करके या सीधे अनुप्रयोग खोलकर भुगतान कर सकते हैं।


इन परिस्थितियों में अभी भी चलेगा पुराना तरीका

हालांकि यूपीआई कलेक्ट प्रणाली को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा रहा है। कुछ खास परिस्थितियों में अभी भी यूपीआई आईडी या मोबाइल नंबर डालकर भुगतान करना संभव रहेगा।


1. शेयर बाजार और आईपीओ में निवेश

अगर कोई व्यक्ति शेयर बाजार में निवेश करता है या किसी कंपनी के आईपीओ के लिए आवेदन करता है, तो वहां अभी भी यूपीआई आईडी या मोबाइल नंबर दर्ज करके ही भुगतान करना होगा।


2. एप्पल और आईफोन उपयोगकर्ता

अगर कोई उपयोगकर्ता Apple iPhone या आईओएस उपकरण का उपयोग करके मोबाइल अनुप्रयोग या ब्राउज़र के जरिए खरीदारी करता है, तो कई जगहों पर अभी भी पुराना भुगतान तरीका इस्तेमाल किया जा सकता है।


3. पहले से तय किए गए स्वचालित भुगतान

यदि किसी उपयोगकर्ता ने पहले से किसी सेवा के लिए स्वचालित भुगतान यानी ऑटो भुगतान सेट किया हुआ है, तो उसे बदलने या बंद करने के लिए भी यूपीआई आईडी या मोबाइल नंबर का उपयोग करना पड़ सकता है।


4. अंतरराष्ट्रीय भुगतान

यदि आप किसी विदेशी वेबसाइट से खरीदारी करते हैं या देश के बाहर किसी व्यवसाय को भुगतान करते हैं, तो वहां भी यूपीआई कलेक्ट वाला पुराना तरीका लागू रह सकता है।


डिजिटल भुगतान को मिलेगा बढ़ावा

भारत पहले ही दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल भुगतान बाजारों में शामिल हो चुका है। ऐसे में यूपीआई प्रणाली में किए जा रहे ये सुधार भविष्य में डिजिटल लेनदेन को और तेज, भरोसेमंद और सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।