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Bihar Politics: विधानसभा चुनाव से पहले JDU को झटका, परबत्ता विधायक ने छोड़ा जदयू; तेजस्वी यादव संग आज थामेंगे RJD का दामन

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले सियासत में हलचल तेज हो गई है। नेताओं के पाला बदलने का सिलसिला भी लगातार जारी है। इसी बीच खगड़िया जिले के परबत्ता से जदयू विधायक डॉ. संजीव कुमार ने बड़ा कदम उठाते हुए पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने शुक्रवा

03-Oct-2025 07:21 AM

By First Bihar

Bihar Politics: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले नेताओं के पाला बदलने का दौर शुरू हो गया है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जदयू) को बड़ा झटका लगा है। खगड़िया जिले के परबत्ता विधानसभा सीट से जदयू विधायक डॉ. संजीव कुमार ने पार्टी छोड़ दी है। वे शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की मौजूदगी में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की सदस्यता ग्रहण करेंगे।


संजीव कुमार ने शुक्रवार सुबह सोशल मीडिया पर पोस्ट कर अपने फैसले की जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि दोपहर एक बजे हजारों समर्थकों के साथ राजद में शामिल होंगे। उनके इस कदम से जदयू को चुनाव से पहले नुकसान उठाना पड़ा है, वहीं राजद को खगड़िया जिले में नई राजनीतिक ताकत मिल सकती है।


दरअसल, सियासी गलियारों में बीते दिनों से ही यह चर्चा थी कि संजीव कुमार का जदयू से टिकट कट सकता है। इसको लेकर विधायक ने भी इशारों-इशारों में नाराजगी जताई थी। उन्होंने अपनी ही सरकार के कुछ नेताओं पर परबत्ता में विकास कार्यों में बाधा डालने का आरोप लगाया था। संजीव कुमार ने कहा था कि चाहे उन्हें टिकट मिले या नहीं, वे जनता की लड़ाई लड़ते रहेंगे और परबत्ता की जनता की जीत सुनिश्चित करेंगे।


गौरतलब है कि 2020 विधानसभा चुनाव में जदयू ने परबत्ता सीट से संजीव कुमार को प्रत्याशी बनाया था। उन्होंने कड़ी टक्कर में राजद उम्मीदवार दिगंबर प्रसाद तिवारी को मात्र 951 वोटों से हराया था। संजीव के पिता आर.एन. सिंह जदयू के कद्दावर नेता रहे हैं। वे परबत्ता से चार बार विधायक चुने गए और नीतीश सरकार में मंत्री भी बने। इसी साल मई में उनका निधन हो गया था। उन्हें खगड़िया का विकास पुरुष कहा जाता था।


अब संजीव कुमार राजद के लालटेन चुनाव चिन्ह पर मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। उनके पार्टी बदलने से परबत्ता सीट पर चुनावी मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। यह कदम जदयू के लिए बड़ा झटका और राजद के लिए सियासी मजबूती माना जा रहा है।